मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से एक बेहद गंभीर घटना सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो राष्ट्रीय तेल टैंकरों पर कथित तौर पर मिसाइल हमला किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। इस हमले में एक भारतीय चालक दल के सदस्य की जान चली गई, जबकि आठ अन्य लोग घायल हुए हैं। घायलों में कई भारतीय नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। यूएई सरकार ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है और कहा है कि देश अपनी सुरक्षा तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार है।
यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह घटना उस समय हुई जब उसके राष्ट्रीय तेल टैंकर ‘मोम्बासा’ और ‘अल बहिया’ ओमान के क्षेत्रीय समुद्री क्षेत्र से गुजर रहे थे। दोनों जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी नौवहन मार्ग पर आगे बढ़ रहे थे, तभी उन पर कथित तौर पर दो क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। मंत्रालय का कहना है कि शुरुआती जांच में हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार माना गया है। हालांकि घटना की विस्तृत जांच जारी है और सभी तथ्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।
मिसाइल हमले का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि ‘मोम्बासा’ टैंकर पर कार्यरत एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। यूएई अधिकारियों ने पुष्टि की कि मृतक चालक दल का सदस्य था और विस्फोट के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इसके अलावा आठ अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनमें चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों में छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। सभी घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
हमले के बाद दोनों टैंकरों में आग लग गई, जिससे जहाजों को काफी नुकसान पहुंचा। आग लगने के कारण कुछ समय तक स्थिति बेहद चिंताजनक बनी रही, लेकिन राहत और बचाव दल की त्वरित कार्रवाई से आग पर काबू पा लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते आग नहीं बुझाई जाती तो नुकसान और अधिक गंभीर हो सकता था। प्रारंभिक आकलन के अनुसार दोनों जहाजों के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हुए हैं और उनकी तकनीकी जांच की जा रही है।
यूएई रक्षा मंत्रालय ने घटना के बाद जारी बयान में कहा कि यह हमला न केवल उसके राष्ट्रीय संसाधनों पर हमला है, बल्कि समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी गंभीर चुनौती है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि देश अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है तथा किसी भी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई का उचित और सख्त जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
सरकारी बयान में यह भी कहा गया कि यूएई की सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ हालात पर नजर रख रही हैं। समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त निगरानी बढ़ा दी गई है और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत किया गया है। रक्षा मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि देश के समुद्री हितों और महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।
इस घटना के बाद यूएई के विदेश मंत्रालय ने भी अलग बयान जारी करते हुए मिसाइल हमले की कड़ी निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करती है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती है। विदेश मंत्रालय ने विशेष रूप से हमले में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिक के प्रति शोक व्यक्त किया और भारत सरकार तथा मृतक के परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं।
यूएई ने अपने बयान में यह भी कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है और ऐसे हमलों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। मंत्रालय ने सभी पक्षों से तनाव कम करने और क्षेत्र में शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को तत्काल रोकने की अपील की। साथ ही यह भी कहा गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित और पूरी तरह से संचालन योग्य बनाए रखना वैश्विक आर्थिक हितों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकार का हमला अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं और समुद्री सुरक्षा संबंधी सिद्धांतों के विपरीत है। मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी आग्रह किया कि वह समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए।
रक्षा मंत्रालय ने आम नागरिकों और मीडिया से भी जिम्मेदारी बरतने की अपील की है। मंत्रालय ने कहा कि घटना से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा किया जाए। सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों, अफवाहों और भ्रामक दावों से बचने का आग्रह करते हुए अधिकारियों ने कहा कि गलत जानकारी से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है और राहत एवं सुरक्षा कार्यों पर भी असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और ऊर्जा संसाधनों का परिवहन होता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की सैन्य या सुरक्षा संबंधी घटना का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
घटना के बाद संबंधित एजेंसियों ने दोनों टैंकरों की स्थिति का आकलन शुरू कर दिया है। तकनीकी विशेषज्ञ जहाजों को हुए नुकसान की जांच कर रहे हैं ताकि मरम्मत और आगे की परिचालन प्रक्रिया तय की जा सके। साथ ही सुरक्षा एजेंसियां हमले के सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
भारतीय चालक दल के सदस्य की मौत की खबर के बाद भारतीय समुदाय में भी शोक का माहौल है। यूएई अधिकारियों ने कहा है कि मृतक के परिजनों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए संबंधित प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई हैं। वहीं घायल भारतीय नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भी हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
यूएई सरकार ने दोहराया है कि देश अपनी समुद्री सीमाओं, ऊर्जा अवसंरचना और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। सरकार का कहना है कि सुरक्षा बल पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के प्रयास भी जारी रहेंगे।
फिलहाल यह घटना मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था, समुद्री यातायात और कूटनीतिक प्रयास किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। यूएई ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि साथ ही उसने सभी पक्षों से संयम बरतने और क्षेत्र में शांति बहाल करने की अपील भी की है।