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NEET-UG 2026 री-एग्जाम रिजल्ट पर मचा बवाल, छात्रों के कम स्कोर के दावों पर NTA का बड़ा जवाब; OMR में गड़बड़ी का लगाया आरोप

NEET-UG 2026 की दोबारा आयोजित परीक्षा के नतीजे जारी होने के बाद एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। कई अभ्यर्थियों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के रिजल्ट पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि उनके अनुमानित अंकों और जारी किए गए आधिकारिक स्कोर कार्ड में बड़ा अंतर है। छात्रों का कहना है कि आंसर की से मिलान करने पर उनके अंक काफी ज्यादा बन रहे थे, लेकिन रिजल्ट में उन्हें बेहद कम नंबर मिले हैं।

वहीं, NTA ने इन आरोपों पर सफाई देते हुए कहा है कि कई मामलों में जांच के दौरान जमा की गई OMR शीट में छेड़छाड़ के संकेत मिले हैं। एजेंसी ने छात्रों और अभिभावकों को चेतावनी दी है कि केवल वास्तविक और प्रमाणिक दस्तावेजों के आधार पर ही शिकायत दर्ज कराई जाए। फर्जी या AI की मदद से बनाई गई OMR शीट मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

दरअसल, NEET-UG 2026 का री-एग्जाम 21 जून को आयोजित किया गया था। इसके परिणाम 16 जुलाई की देर रात जारी किए गए। इस परीक्षा में उन उम्मीदवारों को दोबारा मौका दिया गया था, जिनकी पहली परीक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। NTA के मुताबिक, लाखों मेडिकल उम्मीदवारों में से बड़ी संख्या में छात्रों ने इस परीक्षा में भाग लिया और करीब 11 लाख उम्मीदवारों को मेडिकल और अन्य संबंधित स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए योग्य घोषित किया गया।

छात्रों ने सोशल मीडिया पर साझा किए अपने अनुभव

रिजल्ट जारी होने के बाद कई उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने अनुभव साझा किए। छात्रों का आरोप है कि उन्होंने उत्तर कुंजी के आधार पर जो अंक अनुमानित किए थे, अंतिम परिणाम में उससे बहुत कम नंबर दिए गए।

कानपुर की उम्मीदवार आर्या सिंह ने दावा किया कि उन्होंने आधिकारिक आंसर की के आधार पर अपने उत्तरों का मिलान किया था और उनका अनुमानित स्कोर करीब 609 अंक आ रहा था। लेकिन जब उन्होंने NTA के पोर्टल पर अपना परिणाम देखा तो पहले 540 अंक दिखाई दिए। इसके बाद कुछ समय बाद स्कोर बदलकर केवल 167 अंक रह गया। आर्या ने इसे सिस्टम की बड़ी खामी बताते हुए जांच की मांग की है।

इसी तरह लखनऊ की अभ्यर्थी प्रतिभा त्रिवेदी ने भी रिजल्ट पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आंसर की से मिलान करने के बाद उन्हें लगभग 640 अंक मिलने की उम्मीद थी, लेकिन परिणाम में केवल 38 अंक दिखाए गए। प्रतिभा के मुताबिक उन्होंने इस मामले को लेकर NTA को कई बार ईमेल भेजे, लेकिन अभी तक उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।

रांची के छात्र लक्ष्य सिंह ने भी इसी तरह की शिकायत की है। उनका कहना है कि उनके हिसाब से उनका स्कोर करीब 660 अंक होना चाहिए था, लेकिन NTA की ओर से जारी रिजल्ट में सिर्फ 116 अंक दर्ज किए गए। उन्होंने दावा किया कि उनकी OMR शीट पर बारकोड, हस्ताक्षर और अंगूठे का निशान मौजूद है और उन्होंने परीक्षा से जुड़े सभी नियमों का पालन किया था।

पहली परीक्षा क्यों हुई थी रद्द?

NEET-UG 2026 की पहली परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी। लेकिन परीक्षा के बाद पेपर लीक और कथित गड़बड़ियों के आरोप सामने आए थे। कुछ जगहों पर वायरल हुए कथित गेस पेपर और वास्तविक प्रश्न पत्र के बीच समानता मिलने के बाद विवाद बढ़ गया था।

इसके बाद NTA ने जांच और समीक्षा के बाद मूल परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया। एजेंसी ने प्रभावित उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की। मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई। जांच एजेंसी अब तक कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और इस मामले में आगे भी कार्रवाई जारी है।

CBI की जांच में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों और कथित पेपर लीक नेटवर्क की भूमिका की जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी जल्द ही मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है।

NTA ने आरोपों पर दी सफाई

छात्रों की शिकायतें बढ़ने के बाद NTA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया जारी की। एजेंसी ने कहा कि कुछ उम्मीदवारों द्वारा जमा की गई OMR शीट की जांच में अनियमितताएं सामने आई हैं।

NTA ने बताया कि कई शिकायतों में इस्तेमाल की गई OMR कॉपी वास्तविक रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रही थी। एजेंसी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।

एजेंसी ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की कि वे किसी भी शिकायत के लिए केवल आधिकारिक प्रक्रिया का इस्तेमाल करें। NTA ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेज, नकली OMR या AI से तैयार की गई सामग्री के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

तकनीकी खामियों की भी जताई गई आशंका

इस पूरे विवाद के बीच विशेषज्ञों ने भी संभावित कारणों पर चर्चा शुरू कर दी है। दिल्ली स्थित कोचिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष केशव अग्रवाल ने कहा कि ऐसी स्थिति के पीछे कई तकनीकी कारण हो सकते हैं।

उन्होंने संभावना जताई कि प्रश्न पत्र कोड की गलत मैपिंग, सॉफ्टवेयर में तकनीकी समस्या या OMR स्कैनिंग के दौरान हुई गड़बड़ी जैसी वजहों से कुछ छात्रों के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।

उन्होंने उम्मीदवारों से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर आरोप लगाने के बजाय पहले NTA के आधिकारिक शिकायत समाधान सिस्टम के माध्यम से अपनी समस्या दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि हर शिकायत की तकनीकी जांच जरूरी है ताकि वास्तविक समस्या और गलत दावों में अंतर किया जा सके।

शिक्षा मंत्रालय भी कर रहा शिकायतों की समीक्षा

मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने भी इस पर नजर रखने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार, छात्रों की ओर से आई शिकायतों की जांच की जा रही है और सभी तथ्यों को सत्यापित करने के बाद ही कोई निष्कर्ष निकाला जाएगा।

अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी छात्र के साथ वास्तविक तकनीकी गलती हुई है तो उसकी समीक्षा की जाएगी। हालांकि, बिना जांच के किसी भी दावे को सही नहीं माना जा सकता।

विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

NEET-UG विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं।

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने NTA पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में लगातार विवाद होना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने इसे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया।

वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी परीक्षा प्रणाली में बार-बार सामने आ रही समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि छात्रों को निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए और सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए।

छात्रों को अब जांच के नतीजों का इंतजार

फिलहाल NEET-UG 2026 री-एग्जाम रिजल्ट विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि छात्रों के कम स्कोर की शिकायतों में कितनी सच्चाई है। NTA जहां OMR में संभावित छेड़छाड़ और फर्जी दस्तावेजों की बात कर रहा है, वहीं छात्र अपनी ओर से वास्तविक गलती होने का दावा कर रहे हैं।

अब सभी की नजर NTA और शिक्षा मंत्रालय की जांच पर है। अगर जांच में तकनीकी या प्रशासनिक गलती सामने आती है तो प्रभावित छात्रों के लिए आगे कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं, फर्जी दावों की पुष्टि होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना भी बनी हुई है।

NEET जैसी देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखना बड़ी चुनौती है। लाखों छात्रों का भविष्य इस परीक्षा से जुड़ा है, ऐसे में हर शिकायत का निष्पक्ष समाधान करना जरूरी माना जा रहा है।