संसद मार्च के बाद देश की राजधानी में राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने बातचीत का भरोसा देकर उनके प्रतिनिधियों को रोक लिया, जबकि दूसरी ओर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग किया गया। दीपके का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई पहले से तय रणनीति का हिस्सा थी और प्रदर्शनकारियों को भ्रमित करने के लिए ऐसा किया गया।
मीडिया से बातचीत करते हुए अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की ओर से बातचीत के लिए सीजेपी के दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बुलाया गया था। पार्टी को उम्मीद थी कि सरकार छात्रों और आंदोलनकारियों की मांगों पर सकारात्मक चर्चा करेगी, लेकिन उनके मुताबिक घटनाक्रम पूरी तरह अलग दिशा में चला गया। उन्होंने कहा कि बातचीत की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही प्रतिनिधिमंडल को वहां से बाहर नहीं निकलने दिया गया और उनसे संपर्क भी टूट गया।
दीपके ने बताया कि पार्टी के प्रतिनिधि सौरभ दास और आशुतोष रांका बातचीत के लिए पहुंचे थे, लेकिन बाद में उनका किसी से संपर्क नहीं हो सका। उन्होंने दावा किया कि दोनों के मोबाइल फोन उनके पास नहीं रहने दिए गए, जिसके कारण पार्टी के अन्य नेता और कार्यकर्ता कई घंटों तक उनकी स्थिति के बारे में कुछ भी नहीं जान पाए। उनका कहना था कि करीब तीन घंटे तक दोनों से कोई संपर्क नहीं हो सका, जिससे पार्टी के भीतर चिंता का माहौल बन गया।
सीजेपी संस्थापक ने आरोप लगाया कि जब उनके प्रतिनिधि बातचीत में व्यस्त बताए जा रहे थे, उसी दौरान बाहर मौजूद प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी। उनके अनुसार सरकार ने एक तरफ वार्ता का संदेश दिया और दूसरी तरफ आंदोलन को रोकने के लिए बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में समाधान निकालने की इच्छा होती तो शांतिपूर्ण बातचीत को प्राथमिकता दी जाती, न कि प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई।
दीपके ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार जवाब देने के बजाय आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, जिन छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से मार्च निकाला था, उनके साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का भी उल्लेख करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। दीपके ने कहा कि सरकार अपने मंत्रियों को बचाने के लिए छात्रों के आंदोलन को दबाना चाहती है। उनका कहना था कि यदि प्रशासन प्रदर्शन को नियंत्रित करना ही चाहता था तो इसके लिए अपेक्षाकृत कम कठोर उपाय अपनाए जा सकते थे। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर पानी की बौछारों जैसे विकल्प मौजूद होने के बावजूद आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा क्यों लिया गया।
सीजेपी नेता ने कहा कि आंदोलन में शामिल कई युवाओं और छात्रों को चोटें आई हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान कई लोगों के सिर पर गंभीर चोट लगी। उनके अनुसार, आंदोलन में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र शामिल थे जो अपनी समस्याओं को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना चाहते थे। उन्होंने कहा कि ऐसे युवाओं पर बल प्रयोग किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी अभिजीत दीपके ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। उनके अनुसार कुछ युवा लड़कियों और नाबालिग बच्चियों को भी नहीं बख्शा गया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों ने ऐसे कई दृश्य देखे जिनमें पुलिसकर्मी महिलाओं और छात्राओं के खिलाफ सख्ती बरतते दिखाई दिए।
दीपके ने विशेष रूप से आरोप लगाया कि कई मामलों में पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार महिला पुलिसकर्मियों की भूमिका सीमित रही, जबकि कार्रवाई करने वालों में अधिकांश पुरुष पुलिसकर्मी शामिल थे। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
सीजेपी की ओर से यह भी कहा गया कि आंदोलनकारियों के साथ हुए व्यवहार ने पार्टी नेतृत्व को गहरा आहत किया है। दीपके ने कहा कि जिन छात्रों और युवाओं ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की कोशिश की, उनके खिलाफ अपनाया गया रवैया बेहद निराशाजनक रहा। उनका कहना था कि विरोध प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है और इसे बलपूर्वक दबाने की बजाय संवाद के जरिए समाधान तलाशा जाना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम के अनशन को लेकर भी नई जानकारी सामने आई। अभिजीत दीपके ने बताया कि पहले यह तय किया गया था कि सोनम अपना अनशन समाप्त कर सकते हैं, लेकिन प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया है। उनके अनुसार, छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कथित सख्ती से वे बेहद दुखी हैं और इसी कारण उन्होंने फिलहाल अनशन जारी रखने का निर्णय लिया है।
दीपके ने बताया कि सोनम की ओर से उनकी पत्नी के माध्यम से एक संदेश भेजा गया है। इस संदेश में कहा गया है कि जब तक छात्रों के साथ हुई कथित कार्रवाई के मुद्दे पर उचित कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा। पार्टी का कहना है कि यह फैसला प्रदर्शनकारियों के समर्थन में लिया गया है।
सीजेपी नेतृत्व ने यह भी स्पष्ट किया कि सोमवार को हुई पुलिस कार्रवाई के बावजूद उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा। पार्टी ने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन का अगला चरण शुरू किया जाएगा। दीपके ने कहा कि संगठन जल्द ही अपने अगले बड़े कार्यक्रम की घोषणा करेगा और आंदोलन को पहले से अधिक व्यापक बनाया जाएगा।
उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन जारी रखने की अपील भी की। उनका कहना था कि पार्टी लोकतांत्रिक दायरे में रहकर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास करेगी। साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं से संयम बनाए रखने और किसी भी तरह की हिंसा से दूर रहने की बात कही।
संसद मार्च के बाद सामने आए इन आरोपों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर सीजेपी सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी ओर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना है। फिलहाल पार्टी अपने आरोपों पर कायम है और आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
इस बीच, सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है, जबकि सीजेपी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने आंदोलन को रोकने के बजाय आगे और तेज करने की रणनीति पर काम करेगी।