पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन की शुरुआत राजनीतिक गर्माहट के बीच हुई। सदन की कार्यवाही आरंभ होते ही विपक्षी कांग्रेस के विधायक अपने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ मुखर नजर आए। कांग्रेस सदस्यों ने विधानसभा के भीतर नारेबाजी करते हुए अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं और सरकार से लंबित मामलों पर जवाब मांगा। इस दौरान विपक्ष ने विशेष रूप से अपने द्वारा दिए गए काम रोको प्रस्तावों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से स्पष्ट स्थिति बताने की मांग की।
कार्यवाही के शुरुआती चरण में सदन का माहौल कुछ देर तक शोर-शराबे वाला रहा। कांग्रेस विधायकों का कहना था कि जिन विषयों को उन्होंने सार्वजनिक हित से जुड़ा बताते हुए काम रोको प्रस्ताव के रूप में प्रस्तुत किया है, उन पर सरकार को तुरंत चर्चा के लिए तैयार होना चाहिए। विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिल रही है और जनता से जुड़े सवालों पर सरकार को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
सदन में बढ़ते शोर के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से प्रस्तुत किए गए काम रोको प्रस्ताव स्वीकार कर लिए गए हैं और नियमानुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। स्पीकर के इस आश्वासन के बाद सदन में कुछ हद तक स्थिति सामान्य हुई और विधानसभा की कार्यवाही प्रश्नकाल की ओर बढ़ी, जहां विभिन्न विभागों से जुड़े सवालों पर चर्चा शुरू हुई।
प्रश्नकाल के दौरान कृषि विभाग से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से सामने आए। विधायकों ने किसानों को उपलब्ध कराई जा रही खाद की गुणवत्ता, उसकी जांच प्रक्रिया और नियमों के पालन को लेकर सरकार से कई सवाल पूछे। इस दौरान नकली या मानकों के अनुरूप न मिलने वाली खाद के मामलों में कार्रवाई का विषय चर्चा का केंद्र बना रहा।
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह ने सदन को बताया कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए लगातार निगरानी कर रही है। उन्होंने कहा कि खाद के नमूनों की नियमित जांच कराई जाती है और यदि किसी उत्पाद में निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं करती और दोषी पाए जाने वालों पर आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।
इसी दौरान विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति अलग दिखाई देती है। उन्होंने सदन में कहा कि कई मामलों में जांच के दौरान खाद नकली या खराब गुणवत्ता की मिलने के बावजूद बड़ी कंपनियों के खिलाफ अपेक्षित स्तर की कार्रवाई नहीं होती। उनका कहना था कि अक्सर छोटे दुकानदारों या खुदरा विक्रेताओं पर कार्रवाई कर दी जाती है, जबकि उत्पादन या आपूर्ति से जुड़ी बड़ी कंपनियां बच निकलती हैं।
विधायक ने सरकार से यह भी पूछा कि अब तक किन बड़ी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और कितने मामलों में उनके लाइसेंस पर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार निष्पक्ष कार्रवाई का दावा कर रही है तो उसके आंकड़े भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि किसानों और जनता के सामने पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके।
इन सवालों का जवाब देते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी स्तर पर भेदभाव नहीं करती। उन्होंने जानकारी दी कि दो बड़ी कंपनियों के लाइसेंस निलंबित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त दो अन्य कंपनियों को नोटिस भी जारी किए गए हैं। मंत्री ने कहा कि जांच में जहां भी अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, वहां संबंधित संस्था या व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।
मंत्री ने यह भी दोहराया कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए विभाग लगातार निरीक्षण अभियान चलाता है और बाजार में उपलब्ध उर्वरकों के नमूनों की जांच कराई जाती है। यदि किसी उत्पाद में निर्धारित गुणवत्ता नहीं मिलती या नियमों का पालन नहीं किया जाता, तो संबंधित पक्ष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।
प्रश्नकाल के दौरान कई सदस्यों ने यह सुझाव भी दिया कि खाद की गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जाए। उनका मानना था कि यदि जांच रिपोर्ट और कार्रवाई से जुड़ी जानकारी समय-समय पर सार्वजनिक की जाए तो किसानों का भरोसा बढ़ेगा और बाजार में नकली उत्पाद बेचने वालों पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
विपक्ष का कहना था कि किसानों की मेहनत और खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यदि उन्हें निम्न गुणवत्ता की खाद मिलती है तो इसका सीधा असर फसल उत्पादन और उनकी आय पर पड़ता है। इसलिए केवल छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई करने के बजाय पूरी आपूर्ति श्रृंखला की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
दूसरी ओर सरकार ने दोहराया कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री ने कहा कि विभागीय अधिकारी नियमित निरीक्षण कर रहे हैं और भविष्य में भी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा और जांच के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे।
सत्र के तीसरे दिन की कार्यवाही ने यह संकेत दिया कि आने वाले दिनों में भी विधानसभा में विपक्ष और सरकार के बीच विभिन्न मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। कांग्रेस जहां जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं सरकार अपने फैसलों और प्रशासनिक कार्रवाई का बचाव करते हुए विपक्ष के सवालों का जवाब देने की तैयारी में नजर आ रही है।
फिलहाल विधानसभा में प्रश्नकाल की कार्यवाही जारी है और विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर सदस्यों द्वारा लगातार सवाल पूछे जा रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि मानसून सत्र के आगामी दिनों में भी कृषि, कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों और जनहित से जुड़े कई अन्य विषयों पर विस्तृत चर्चा देखने को मिलेगी। सरकार और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी दलीलों के साथ सदन में सक्रिय हैं, जिससे आगामी बैठकों के दौरान राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म रहने की संभावना बनी हुई है।