वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ विवाद अब कानूनी शिकायतों तक पहुंच गया है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। राजधानी में एक वकील की ओर से की गई शिकायत में दोनों नेताओं पर राष्ट्रगीत के कथित अपमान का आरोप लगाया गया है और उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है। यह शिकायत 16 अगस्त को दिल्ली के IP एस्टेट थाने में दी गई थी।
मामला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। कर्नाटक में भी भारतीय जनता पार्टी से जुड़े नेताओं ने सोनिया गांधी के खिलाफ अलग-अलग पुलिस थानों में शिकायतें दर्ज कराई हैं। बेंगलुरु और मंगलुरु में दी गई इन शिकायतों में वंदे मातरम को लेकर कथित आपत्तिजनक व्यवहार का आरोप लगाते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि, कर्नाटक में शिकायत मिलने के बाद अभी FIR दर्ज नहीं की गई है।
दिल्ली में दी गई शिकायत में शिकायतकर्ता ने एक कार्यक्रम से जुड़े वीडियो और उसमें दिखाई देने वाली गतिविधियों का हवाला दिया है। आरोप लगाया गया है कि वंदे मातरम के शुरुआती अंश के बाद सोनिया गांधी की ओर से कुछ ऐसे इशारे किए गए, जिन्हें गीत को आगे जारी रखने पर आपत्ति के रूप में देखा गया। शिकायतकर्ता ने इसी आधार पर मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में राहुल गांधी को लेकर भी एक वीडियो का उल्लेख किया गया है। इसमें उनके कथित बयान ‘हम वंदे मातरम नहीं गाएंगे’ का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि वीडियो में सामने आए कथित बयान और घटनाक्रम की पुष्टि होती है तो यह वंदे मातरम के प्रति अनादर का मामला बन सकता है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
दिल्ली पुलिस द्वारा मामले की जांच शुरू किए जाने के बाद अब यह देखना अहम होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में उपलब्ध वीडियो और अन्य सामग्री की जांच किस तरह की जाती है। पुलिस को यह भी तय करना होगा कि लगाए गए आरोप मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत किसी अपराध की श्रेणी में आते हैं या नहीं।
कर्नाटक में बीजेपी ने भी उठाया मुद्दा
दिल्ली के बाद कर्नाटक में भी वंदे मातरम विवाद ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। बीजेपी नेताओं ने सोनिया गांधी के खिलाफ बेंगलुरु और मंगलुरु में पुलिस से संपर्क किया। बेंगलुरु में बीजेपी युवा मोर्चा की ओर से मल्लेश्वरम पुलिस थाने में शिकायत दी गई, जबकि मंगलुरु में बीजेपी नेताओं ने उर्वा थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई।
इन शिकायतों में आरोप लगाया गया कि वंदे मातरम के दौरान सोनिया गांधी का व्यवहार राष्ट्रगीत के प्रति सम्मानजनक नहीं था। बीजेपी नेताओं ने पुलिस से पूरे घटनाक्रम की जांच करने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई करने की मांग की है।
फिलहाल कर्नाटक पुलिस ने इन शिकायतों पर FIR दर्ज नहीं की है। पुलिस की ओर से आगे की कार्रवाई जांच और शिकायत में उपलब्ध सामग्री के आधार पर तय की जाएगी। इस बीच बीजेपी नेताओं ने इस मुद्दे को राजनीतिक और भावनात्मक दोनों स्तरों पर उठाना शुरू कर दिया है।
बीजेपी ने मांगी सार्वजनिक माफी की मांग
कर्नाटक बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक धीरज मुनिराजू ने इस मामले में राहुल गांधी और सोनिया गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। उनका कहना है कि वंदे मातरम देश के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा महत्वपूर्ण गीत है, इसलिए इसके प्रति किसी भी तरह का कथित अनादर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
बीजेपी की ओर से कहा गया है कि जब तक कांग्रेस के दोनों प्रमुख नेताओं की ओर से इस मुद्दे पर माफी नहीं मांगी जाती, तब तक विरोध जारी रहेगा। पार्टी नेताओं ने इसे केवल राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि राष्ट्रगीत से जुड़ी भावनाओं का विषय बताया है।
मंगलुरु में शिकायत देने वाले बीजेपी नेताओं ने भी सोनिया गांधी के कथित व्यवहार पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम को लेकर जिस तरह की प्रतिक्रिया सामने आई, उससे देश के लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं। उन्होंने पुलिस से घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
विवाद के बीच नए कानून का जिक्र
वंदे मातरम से जुड़ा यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब संसद ने हाल ही में इस गीत को कानूनी संरक्षण देने से संबंधित नया कानून पारित किया है। 29 जुलाई को बने इस कानून के बाद वंदे मातरम को ‘जन गण मन’ के समान कानूनी संरक्षण दिए जाने की बात सामने आई है।
नए प्रावधानों के तहत वंदे मातरम का जानबूझकर अपमान करने या इसके गायन में बाधा पहुंचाने को गंभीरता से लिया गया है। ऐसे मामलों में दोष सिद्ध होने पर अधिकतम तीन वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान बताया गया है।
यही वजह है कि राहुल और सोनिया गांधी को लेकर सामने आई शिकायतों को अब इस नए कानूनी प्रावधान के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि, किसी व्यक्ति पर केवल शिकायत दर्ज होने से अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। पुलिस जांच, उपलब्ध साक्ष्य और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही यह तय होगा कि लगाए गए आरोपों में वास्तव में कोई अपराध बनता है या नहीं।
वीडियो को बनाया गया शिकायत का आधार
दिल्ली में दाखिल शिकायत का एक अहम हिस्सा वह वीडियो है, जिसका उल्लेख शिकायतकर्ता ने किया है। शिकायत में दावा किया गया है कि वीडियो में राहुल गांधी की ओर से वंदे मातरम नहीं गाने संबंधी कथित टिप्पणी सुनाई देती है। इसके साथ ही सोनिया गांधी के कुछ इशारों को भी शिकायतकर्ता ने गीत जारी रखने पर आपत्ति से जोड़कर देखा है।
अब जांच के दौरान वीडियो की वास्तविकता, उसकी पूरी रिकॉर्डिंग, संदर्भ और उसमें मौजूद आवाज या दृश्य की प्रामाणिकता महत्वपूर्ण होगी। किसी वीडियो के छोटे हिस्से के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों को देखना पुलिस जांच का हिस्सा हो सकता है।
यदि जांच में आरोपों की पुष्टि करने वाला पर्याप्त साक्ष्य मिलता है तो पुलिस आगे कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकती है। दूसरी ओर, यदि उपलब्ध सामग्री आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं पाई जाती, तो शिकायत पर उसी अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
राजनीतिक टकराव बढ़ने के संकेत
वंदे मातरम का मुद्दा सामने आने के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। बीजेपी जहां इसे राष्ट्र सम्मान और राष्ट्रीय भावनाओं से जोड़ रही है, वहीं इस मामले में अंतिम स्थिति पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
दिल्ली और कर्नाटक में अलग-अलग शिकायतों के सामने आने से यह विवाद अब कई स्तरों पर फैल चुका है। एक ओर पुलिस के सामने कानूनी पहलू की जांच की चुनौती है, तो दूसरी ओर राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से जनता के सामने रख रहे हैं।
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यही है कि फिलहाल राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोप शिकायत और दावों के स्तर पर हैं। FIR दर्ज होना या किसी मामले की जांच शुरू होना अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। आरोपों की पुष्टि न्यायिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही हो सकती है।
अब दिल्ली पुलिस की जांच और कर्नाटक में पुलिस के अगले कदम पर सभी की नजरें रहेंगी। यदि शिकायतों में लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण सामने आते हैं तो मामला आगे बढ़ सकता है। वहीं, साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अलग निष्कर्ष पर भी पहुंच सकती है।
वंदे मातरम को लेकर चल रहा यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि इसके साथ हाल में लागू किए गए कानूनी प्रावधानों को जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पुलिस की जांच, शिकायतों पर होने वाली कार्रवाई और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगी।