स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले देश की सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान से जुड़े एक कथित आतंकी नेटवर्क के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाकर उसकी गतिविधियों को बड़ा झटका दिया। सुरक्षा एजेंसियों की ओर से की गई कार्रवाई में 14 राज्यों में एक साथ छापेमारी की गई और कुल 253 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह नेटवर्क पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर शहजाद भट्टी के संपर्क में था और देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा था।
अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान सामने आए इनपुट से पता चला कि नेटवर्क से जुड़े लोग सिर्फ आपराधिक गतिविधियों तक सीमित नहीं थे, बल्कि कथित तौर पर आतंकी साजिशों के लिए भी लोगों और संसाधनों को तैयार किया जा रहा था। स्वतंत्रता दिवस जैसे संवेदनशील मौके को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने इसे गंभीरता से लिया और राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर व्यापक अभियान शुरू किया।
बताया गया है कि इस नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में 80 से अधिक मामले दर्ज हैं। कार्रवाई के दौरान हथियारों, विस्फोटक सामग्री और निगरानी में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की बरामदगी ने जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी। बरामद सामान में आईईडी, पिस्टल, जिंदा कारतूस और ऐसे हथगोले शामिल बताए गए हैं, जिन पर पाकिस्तान के आयुध कारखाने के निशान पाए गए।
एक साथ कई राज्यों में हुई कार्रवाई
सुरक्षा एजेंसियों ने 12 अगस्त को इस अभियान को अंजाम दिया। इसका दायरा एक या दो राज्यों तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के 14 राज्यों को इसमें शामिल किया गया। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय के आधार पर संदिग्ध ठिकानों की तलाशी ली गई।
आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 62 लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके बाद हरियाणा में 52 और दिल्ली में 51 संदिग्ध पकड़े गए। पंजाब से 44 लोगों की गिरफ्तारी हुई, जबकि राजस्थान में 15 आरोपितों को पकड़ा गया। महाराष्ट्र से 8 और उत्तराखंड से 5 लोगों को हिरासत में लिया गया।
इसके अलावा कर्नाटक, गुजरात और बिहार में तीन-तीन लोगों को पकड़ा गया। तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल से दो-दो लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। अलग-अलग राज्यों में हुई इस कार्रवाई से साफ है कि जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के संभावित संपर्कों और उसके विस्तार की कड़ियों को खंगाल रही हैं।
अधिकारियों का मानना है कि नेटवर्क ने अलग-अलग राज्यों में अपने संपर्क बनाए हुए थे। इसी वजह से किसी एक स्थान पर कार्रवाई करने के बजाय एक साथ कई राज्यों में अभियान चलाने की रणनीति अपनाई गई। इससे संदिग्धों को एक-दूसरे को सतर्क करने या ठिकाने बदलने का मौका नहीं मिला।
तलाशी में हथियार और विस्फोटक मिलने से बढ़ी चिंता
छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों को कई तरह के हथियार और संदिग्ध सामग्री मिली। इनमें आईईडी, पिस्टल और जिंदा कारतूस के अलावा हथगोले भी बरामद किए गए। खास बात यह बताई गई कि कुछ हथगोलों पर पाकिस्तान के आयुध कारखाने से जुड़े निशान मौजूद थे।
इसके अलावा निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कैमरे भी बरामद हुए। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन उपकरणों का इस्तेमाल किन स्थानों की निगरानी के लिए किया जाता था और इनके जरिए नेटवर्क से जुड़े लोग किस तरह की जानकारी जुटा रहे थे।
सुरक्षा अधिकारियों के लिए हथियारों और विस्फोटक सामग्री की बरामदगी इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे कथित नेटवर्क की गतिविधियों के सिर्फ ऑनलाइन या संपर्क आधारित होने के बजाय जमीनी स्तर पर भी सक्रिय होने के संकेत मिलते हैं। हालांकि बरामद सामग्री का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था और उससे जुड़ी पूरी साजिश क्या थी, इसका खुलासा जांच आगे बढ़ने के बाद ही हो सकेगा।
गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संबंधित गिरोह कई आतंकी गतिविधियों में शामिल था। सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के कारण नेटवर्क पर एक साथ कार्रवाई संभव हुई और इसके ढांचे को नुकसान पहुंचाया गया।
सोशल मीडिया और इंटरनेट के जरिए युवाओं तक पहुंच
जांच में नेटवर्क के काम करने के एक अहम तरीके का भी पता चला है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान में मौजूद शहजाद भट्टी कथित तौर पर इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए भारत में युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश करता था।
नेटवर्क के निशाने पर खासतौर पर ऐसे युवा बताए गए हैं, जो आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हों या किसी तरह के असंतोष और नशे की समस्या से प्रभावित हों। ऐसे लोगों को पहले संपर्क में लिया जाता था और धीरे-धीरे उन्हें नेटवर्क की गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश की जाती थी।
एजेंसियों के मुताबिक, युवाओं को सीधे किसी बड़ी आपराधिक या आतंकी गतिविधि में शामिल करने के बजाय उन्हें छोटे-छोटे काम सौंपे जाने की रणनीति अपनाई जाती थी। शुरुआत में जानकारी जुटाने, किसी स्थान की निगरानी करने या किसी व्यक्ति की गतिविधियों पर नजर रखने जैसे काम दिए जा सकते थे। इसके बाद उन्हें हथियारों की आवाजाही या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों से जोड़े जाने की आशंका जताई गई है।
जांच एजेंसियों का यह भी मानना है कि इंटरनेट के माध्यम से युवाओं तक पहुंच बनाना इस नेटवर्क की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा था। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क स्थापित होने से नेटवर्क संचालकों के लिए अलग-अलग राज्यों में मौजूद लोगों से संपर्क करना आसान हो जाता है। इसी वजह से एजेंसियां अब डिजिटल गतिविधियों और संदिग्ध ऑनलाइन संपर्कों की भी जांच कर रही हैं।
कट्टरपंथ की ओर धकेलने का आरोप
जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, नेटवर्क कथित तौर पर संपर्क में आए युवाओं को धीरे-धीरे प्रभावित करने और उनका कट्टरपंथीकरण करने की कोशिश करता था। इसके बाद उन्हें ऐसे कार्यों में इस्तेमाल किए जाने की आशंका थी, जिनका संबंध जासूसी, निगरानी और आपराधिक गतिविधियों से हो सकता है।
ऐसे युवाओं की पहचान करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती होती है, क्योंकि शुरुआत में उनकी गतिविधियां सामान्य ऑनलाइन बातचीत या छोटे-मोटे आपराधिक संपर्क जैसी दिखाई दे सकती हैं। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, अलग-अलग लोगों के बीच संपर्क, पैसों के लेन-देन और निर्देशों की कड़ियां सामने आ सकती हैं।
यही वजह है कि हालिया अभियान में सिर्फ हथियारों की बरामदगी पर ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि नेटवर्क से जुड़े लोगों और उनके संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है। एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि कथित नेटवर्क ने किन राज्यों में अपनी मौजूदगी बनाई, किस माध्यम से नए लोगों को जोड़ा और उन्हें किस तरह की जिम्मेदारियां दी गईं।
80 से ज्यादा मुकदमों की जांच
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस गिरोह से जुड़े मामलों की संख्या 80 से ज्यादा हो चुकी है। अलग-अलग घटनाओं और आरोपों के आधार पर कई राज्यों में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। अब तक 200 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी का भी दावा किया गया है।
इन मामलों में कई गंभीर धाराओं और कानूनों का इस्तेमाल किया गया है। इनमें गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून यानी यूएपीए, भारतीय न्याय संहिता, शस्त्र अधिनियम, मादक पदार्थों से संबंधित कानून और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम शामिल हैं।
जांच का दायरा अब सिर्फ गिरफ्तार किए गए लोगों तक सीमित नहीं रहने वाला है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन लोगों के पीछे कौन लोग काम कर रहे थे, उन्हें निर्देश कहां से मिलते थे और हथियार या अन्य संसाधन उन तक किस माध्यम से पहुंचाए जाते थे।
राज्यों के बीच सूचना साझा करने से बनी रणनीति
इस पूरे अभियान में राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण रहा। जांच से जुड़े इनपुट संबंधित राज्यों के साथ साझा किए गए और उसके बाद स्थानीय स्तर पर संदिग्ध ठिकानों की पहचान की गई।
एक साथ कई राज्यों में कार्रवाई करने का उद्देश्य नेटवर्क की अलग-अलग शाखाओं को एक-दूसरे से अलग करना भी माना जा रहा है। यदि किसी एक राज्य में कार्रवाई होती तो दूसरे स्थानों पर मौजूद लोग सतर्क होकर अपने ठिकाने बदल सकते थे। लेकिन समन्वित अभियान ने इस संभावना को कम किया।
स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी रहती है। ऐसे में किसी कथित आतंकी नेटवर्क के पास हथियार और विस्फोटक होने की जानकारी सामने आने के बाद एजेंसियों ने तेजी से कार्रवाई की। इस अभियान के जरिए संभावित खतरे को शुरुआती स्तर पर रोकने की कोशिश की गई।
अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेटवर्क की पूरी संरचना का पता लगाना है। गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ, बरामद हथियारों और डिजिटल उपकरणों की जांच तथा अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को जोड़कर इस नेटवर्क की वास्तविक पहुंच का आकलन किया जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, कार्रवाई से शहजाद भट्टी से जुड़े कथित नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचा है। हालांकि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में पूछताछ तथा बरामद सामग्री के विश्लेषण से इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। स्वतंत्रता दिवस से पहले हुई यह कार्रवाई इस बात को भी रेखांकित करती है कि सुरक्षा एजेंसियां आतंकी नेटवर्क के पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए होने वाली कथित भर्ती और संपर्क गतिविधियों पर भी लगातार नजर बनाए हुए हैं।