पाकिस्तान में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हाफिज सईद के बेटे तल्हा सईद का एक और भड़काऊ वीडियो सामने आया है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शेखूपुरा में दिए गए बताए जा रहे भाषण में तल्हा ने भारत के खिलाफ जिहाद और कथित कुर्बानी जारी रखने की बात कही। इसी दौरान उसने दिल्ली को लेकर भी विवादित ऐतिहासिक दावा किया और भारत की सत्ता में बैठे लोगों को कथित तौर पर यह याद रखने की बात कही कि दिल्ली पर लंबे समय तक मुस्लिम शासकों का शासन रहा है।
तल्हा का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान में आतंकवाद और भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सामने आए वीडियो में तल्हा ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए भारत के खिलाफ अपने पुराने रुख को दोहराया। उसने कहा कि उसके रहते जिहाद और कुर्बानी का सिलसिला नहीं रुकेगा। उसके भाषण का एक हिस्सा दिल्ली की सत्ता और उसके इतिहास पर केंद्रित रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह वीडियो 5 सितंबर को शेखूपुरा में आयोजित एक कार्यक्रम का बताया जा रहा है। इसे ऑसिनटीवी ने सोशल मीडिया पर साझा किया है। वीडियो में तल्हा को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि जब तक वह और उसके समर्थक जीवित हैं, तब तक जिहाद और कथित कुर्बानियों का सिलसिला जारी रहेगा। इसके बाद उसने दिल्ली को लेकर भारत के खिलाफ राजनीतिक और धार्मिक रंग वाला बयान दिया।
दिल्ली को लेकर तल्हा ने क्या कहा?
तल्हा सईद ने अपने भाषण में भारत की राजधानी दिल्ली का उल्लेख करते हुए वहां की सत्ता में बैठे लोगों को कथित तौर पर चेतावनी देने की कोशिश की। उसने कहा कि दिल्ली की सत्ता संभालने वालों को यह नहीं भूलना चाहिए कि दिल्ली पर करीब 500 वर्षों तक किसका शासन रहा और यह शहर किसका था।
उसका यह बयान इतिहास की एक चुनिंदा व्याख्या पर आधारित है। दिल्ली का इतिहास कई राजवंशों, साम्राज्यों और राजनीतिक शक्तियों के शासन से जुड़ा रहा है। अलग-अलग दौर में दिल्ली पर विभिन्न हिंदू, मुस्लिम और अन्य राजवंशों का प्रभाव रहा है। ऐसे में किसी एक धार्मिक पहचान के आधार पर दिल्ली को किसी एक समूह की स्थायी संपत्ति के रूप में पेश करना ऐतिहासिक वास्तविकता को बेहद सीमित तरीके से देखने जैसा है।
तल्हा ने हालांकि अपने भाषण में इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हुए भारत के खिलाफ अपने राजनीतिक संदेश को आगे बढ़ाया। उसके बयान में जिहाद और संघर्ष जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी किया गया, जिससे यह भाषण एक बार फिर भारत विरोधी कट्टरपंथी बयानबाजी के तौर पर चर्चा में आया है।
पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर की तारीफ
तल्हा सईद ने अपने भाषण में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की भी प्रशंसा की। उसने मुनीर के धार्मिक रुख और उनके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली धार्मिक भाषा को पाकिस्तान के लिए अच्छी बात बताया।
तल्हा ने कहा कि पाकिस्तान को ऐसा आर्मी चीफ और फील्ड मार्शल मिला है जो ईमान, जिहाद और परहेजगारी की बात करता है। उसने इसे पाकिस्तान की खुशकिस्मती बताया और कहा कि देश के लोगों को इस बात पर खुश होना चाहिए कि उन्हें ऐसा सैन्य नेतृत्व मिला है।
तल्हा का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान में सेना का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। असीम मुनीर के नेतृत्व को लेकर भी पाकिस्तान में राजनीतिक, धार्मिक और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विमर्श चलते रहे हैं। ऐसे में एक ऐसे व्यक्ति द्वारा सेना प्रमुख की सार्वजनिक प्रशंसा, जिसका परिवार लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा रहा है, सुरक्षा के नजरिए से भी ध्यान खींचती है।
हाफिज सईद की सजा के बाद सक्रिय हुआ तल्हा
तल्हा सईद को हाफिज सईद का बेटा माना जाता है और बीते कुछ वर्षों में पाकिस्तान में उसकी सार्वजनिक गतिविधियां बढ़ी हैं। हाफिज सईद को पाकिस्तान की अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद तल्हा कई मौकों पर सार्वजनिक मंचों और रैलियों में दिखाई दिया है।
हाफिज सईद लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक और 26/11 मुंबई आतंकी हमलों का प्रमुख साजिशकर्ता रहा है। भारत और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लंबे समय से उसे आतंकवाद से जोड़ती रही हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी उसे वैश्विक आतंकवादियों की सूची में शामिल किया है।
हाफिज सईद के खिलाफ पाकिस्तान में कार्रवाई और सजा के बाद उसके बेटे तल्हा की सार्वजनिक सक्रियता को कई रिपोर्टों में संगठन के भविष्य से जोड़कर देखा गया है। वह पाकिस्तान के अलग-अलग इलाकों में रैलियों और सभाओं को संबोधित करता रहा है। इन कार्यक्रमों में भारत विरोधी भाषण और धार्मिक मुद्दों से जुड़े बयान अक्सर चर्चा में आते रहे हैं।
राजनीति में भी हाथ आजमा चुका है तल्हा
तल्हा सईद ने केवल धार्मिक या सार्वजनिक मंचों तक अपनी गतिविधियों को सीमित नहीं रखा। उसने पाकिस्तान में राजनीतिक क्षेत्र में भी कदम रखने की कोशिश की। वह मरकजी मुस्लिम लीग नाम की राजनीतिक पार्टी से जुड़ा और चुनाव भी लड़ा।
हालांकि चुनावी राजनीति में उसे बड़ी सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उसके राजनीतिक प्रयासों को पाकिस्तान में प्रतिबंधित या कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े लोगों के मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश की कोशिश के उदाहरण के तौर पर देखा गया है।
विशेषज्ञों के बीच यह सवाल भी उठता रहा है कि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े प्रभावशाली परिवार किस तरह सामाजिक और राजनीतिक नेटवर्क तैयार करने की कोशिश करते हैं। तल्हा की सार्वजनिक गतिविधियां इसी व्यापक संदर्भ में देखी जाती हैं।
क्या लश्कर की जिम्मेदारी तल्हा के हाथ में है?
तल्हा सईद को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या वह अब लश्कर-ए-तैयबा के संचालन में बड़ी भूमिका निभा रहा है। कुछ रिपोर्टों और सुरक्षा मामलों से जुड़े दावों में कहा गया है कि हाफिज सईद के जेल में होने के बाद संगठन की जिम्मेदारी तल्हा को दी गई है।
हालांकि इस संबंध में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में कई दावे हैं और संगठन की वास्तविक कमान को लेकर पूरी तरह स्वतंत्र और स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आती। फिर भी तल्हा की लगातार बढ़ती सार्वजनिक गतिविधियों को इस दावे के संदर्भ में देखा जाता है।
बताया जाता है कि वह पाकिस्तान के पंजाब और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर समेत अलग-अलग इलाकों में कार्यक्रमों में शामिल होता रहा है। ऐसी गतिविधियों का मकसद समर्थकों को संगठित करना, संगठन के प्रभाव को बनाए रखना और भारत विरोधी नैरेटिव को आगे बढ़ाना बताया जाता रहा है।
हाफिज सईद अभी कहां है?
हाफिज सईद को पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़े मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है और पाकिस्तान की ओर से उसे जेल में रखे जाने की बात कही गई है। लेकिन समय-समय पर ऐसी रिपोर्टें और दावे सामने आते रहे हैं कि उसे सामान्य जेल के बजाय किसी सुरक्षित स्थान पर रखा गया हो सकता है।
उसके वर्तमान ठिकाने को लेकर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि हाफिज सईद की स्थिति और पाकिस्तान की ओर से उसके खिलाफ की गई कार्रवाई पर सवाल उठते रहे हैं।
भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों और उनके नेताओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने का दबाव बनाता रहा है। विशेष रूप से 26/11 मुंबई हमलों के बाद हाफिज सईद भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए प्रमुख आतंकवादी चेहरों में शामिल रहा है।
भारत विरोधी बयानबाजी का सिलसिला जारी
तल्हा सईद के ताजा वीडियो को उसके पिछले बयानों की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले भी वह भारत के खिलाफ बयान देता रहा है और कश्मीर समेत कई मुद्दों पर पाकिस्तान के कट्टरपंथी नैरेटिव को आगे बढ़ाता रहा है।
इस बार उसके भाषण में दिल्ली का उल्लेख विशेष रूप से चर्चा में आया है। राजधानी को लेकर उसका बयान केवल राजनीतिक टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने इसे धार्मिक और ऐतिहासिक दावे से जोड़ने की कोशिश की। इसके साथ ही जिहाद जारी रखने की बात कहकर उसने अपने भाषण को और अधिक उग्र रूप दिया।
तल्हा का ताजा बयान इस बात की ओर भी इशारा करता है कि हाफिज सईद के परिवार से जुड़े नेटवर्क में भारत विरोधी विचारधारा को सार्वजनिक मंचों पर लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञ ऐसे बयानों को महज राजनीतिक भाषण मानने के बजाय आतंकवादी संगठनों की विचारधारा और उनके समर्थक नेटवर्क के संदर्भ में देखते हैं।
फिलहाल तल्हा की गतिविधियों और लश्कर-ए-तैयबा में उसकी वास्तविक भूमिका को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। लेकिन उसका सार्वजनिक रूप से सामने आना, भारत के खिलाफ जिहाद की बात करना, दिल्ली को लेकर विवादित दावा करना और पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व की धार्मिक छवि की तारीफ करना यह बताता है कि भारत विरोधी कट्टरपंथी बयानबाजी पाकिस्तान में अब भी सार्वजनिक मंचों पर जगह बनाए हुए है।