पंजाब में आने वाले वर्षों में बिजली की जरूरत और उपलब्ध उत्पादन क्षमता के बीच अंतर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी को लेकर पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र भेजकर राज्य के बिजली क्षेत्र को लेकर तत्काल नीतिगत कदम उठाने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि अगर अभी से बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम शुरू नहीं किया गया, तो भविष्य में राज्य को हर साल बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है।
एसोसिएशन ने खास तौर पर थर्मल और सोलर बिजली उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी पर जोर दिया है। संगठन के महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल के मुताबिक पंजाब का बिजली क्षेत्र एक साथ दो बड़ी चुनौतियों से गुजर रहा है। एक तरफ बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य के भीतर उपलब्ध उत्पादन क्षमता उस गति से नहीं बढ़ पा रही है। इसका सीधा असर पावरकॉम की वित्तीय स्थिति पर भी पड़ रहा है।
महंगी बिजली खरीदने की मजबूरी
पंजाब में बिजली की मांग बढ़ने के साथ पावरकॉम को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए बाहरी स्रोतों और ऊर्जा एक्सचेंज पर निर्भर रहना पड़ रहा है। एसोसिएशन के अनुसार, बाहर से बिजली खरीदने की लागत कई बार राज्य के अपने उत्पादन की तुलना में अधिक होती है। ऐसे में बिजली की बढ़ती मांग केवल आपूर्ति की समस्या नहीं रह जाती, बल्कि यह राज्य के बिजली क्षेत्र पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव भी डालती है।
इंजीनियरों का मानना है कि अगर पंजाब अपनी खुद की उत्पादन क्षमता में पर्याप्त निवेश करता है तो लंबी अवधि में बाहरी बिजली पर निर्भरता कम की जा सकती है। इससे पावरकॉम को बाजार से महंगी बिजली खरीदने की जरूरत भी कम होगी और बिजली व्यवस्था को अधिक स्थिर बनाया जा सकेगा।
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि बिजली उत्पादन से जुड़ी नई परियोजनाओं पर फैसले लेने में और देरी नहीं की जाए। संगठन के अनुसार, मौजूदा मांग और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए क्षमता विस्तार को प्राथमिकता देना जरूरी हो गया है।
गर्मियों के संकट से स्थायी समाधान की जरूरत
पंजाब में गर्मियों के दौरान बिजली की मांग तेजी से बढ़ती है। खेती के लिए ट्यूबवेल, घरों में कूलर और एसी तथा उद्योगों की बढ़ती जरूरत बिजली की खपत को और ऊपर ले जाती है। एसोसिएशन का कहना है कि केवल गर्मी के मौसम में अस्थायी इंतजाम करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
इंजीनियरों के मुताबिक राज्य को ऐसी उत्पादन क्षमता विकसित करनी होगी जो दिन और रात दोनों समय बिजली की जरूरत को पूरा करने में मदद करे। सौर ऊर्जा दिन के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, लेकिन रात में इसकी उपलब्धता सीमित रहती है। इसलिए गैर-सौर घंटों और रात के समय की अधिकतम मांग को पूरा करने के लिए थर्मल उत्पादन क्षमता को मजबूत करना जरूरी है।
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य ने अभी क्षमता बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले वर्षों में हर गर्मी के मौसम में बिजली की कमी का दबाव दोबारा सामने आ सकता है। इसका असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृषि और औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ेगा।
निजी थर्मल प्लांटों के कोयला भंडार पर सवाल
पत्र में राजपुरा और तलवंडी साबो स्थित निजी थर्मल पावर प्लांटों की कोयला उपलब्धता को लेकर भी चिंता जाहिर की गई है। एसोसिएशन का आरोप है कि इन संयंत्रों में पर्याप्त कोयला भंडार बनाए रखने में कमी रही है और फिलहाल वहां कोयले की भारी कमी बताई जा रही है।
इंजीनियर्स एसोसिएशन के अनुसार, बिजली संयंत्रों के लिए पर्याप्त कोयला उपलब्ध रहना लगातार उत्पादन बनाए रखने की बुनियादी जरूरत है। संगठन ने इसे सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी की निर्धारित व्यवस्थाओं और नियमों के संदर्भ में गंभीर विषय बताया है।
इंजीनियरों का तर्क है कि यदि किसी बड़े ताप विद्युत संयंत्र के पास पर्याप्त ईंधन उपलब्ध नहीं होगा तो उसकी उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर राज्य की कुल बिजली उपलब्धता पर पड़ सकता है। इसलिए कोयला आपूर्ति और भंडारण व्यवस्था की नियमित निगरानी तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत है।
बिजली की कमी का असर किन क्षेत्रों पर पड़ेगा?
एसोसिएशन ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि बिजली संकट का असर किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहने वाला। पंजाब की अर्थव्यवस्था में कृषि और उद्योग दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है और इन दोनों क्षेत्रों के लिए भरोसेमंद बिजली आपूर्ति आवश्यक है।
कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। दूसरी तरफ औद्योगिक इकाइयों के लिए बिजली की उपलब्धता उत्पादन और निवेश से सीधे जुड़ी हुई है। यदि उद्योगों को पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली नहीं मिलती तो उत्पादन लागत बढ़ सकती है और नए निवेश के फैसले प्रभावित हो सकते हैं।
घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली खपत भी लगातार बढ़ रही है। जीवनशैली में बदलाव, गर्मी के दौरान कूलिंग उपकरणों का बढ़ता इस्तेमाल और नए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की संख्या बिजली की मांग में इजाफा कर रही है। ऐसे में भविष्य की मांग का अनुमान लगाकर पहले से उत्पादन क्षमता तैयार करना जरूरी माना जा रहा है।
पावरकॉम की वित्तीय स्थिति भी चिंता का विषय
एसोसिएशन ने बिजली उत्पादन की समस्या को राज्य की वित्तीय स्थिति से भी जोड़कर देखा है। संगठन के अनुसार पावरकॉम पहले से ही आर्थिक दबाव में है और पंजाब सरकार की ओर से सब्सिडी की बकाया राशि का भुगतान समय पर नहीं होने से कंपनी की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ रहा है।
एसोसिएशन का अनुमान है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में पावरकॉम को करीब 7,800 करोड़ रुपये की राजस्व कमी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए महंगी दरों पर लगातार बिजली खरीदनी पड़ी तो वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है।
इंजीनियरों का कहना है कि बिजली क्षेत्र में केवल तत्काल आपूर्ति की व्यवस्था करना पर्याप्त नहीं होगा। राज्य को उत्पादन, खरीद, सब्सिडी और निवेश से जुड़ी पूरी व्यवस्था की समीक्षा करनी होगी। दीर्घकालीन योजना के बिना हर साल बढ़ती मांग के साथ समस्या और गंभीर होती जाएगी।
औद्योगिक विस्तार और डेटा सेंटर से बढ़ेगी मांग
एसोसिएशन ने भविष्य में बिजली की बढ़ती जरूरत को देखते हुए कई नए क्षेत्रों का भी उल्लेख किया है। पंजाब में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ बिजली की खपत बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा कृषि और घरेलू क्षेत्र की मांग भी बनी रहेगी।
डेटा सेंटर जैसे उच्च बिजली खपत वाले नए क्षेत्रों के विकास से भी राज्य की कुल मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। ऐसे केंद्रों को लगातार और स्थिर बिजली आपूर्ति की आवश्यकता होती है। इसलिए आने वाले समय में पंजाब की बिजली व्यवस्था पर केवल मौजूदा उपभोक्ताओं का भार नहीं होगा, बल्कि नए उद्योग और हाई-लोड सेक्टर भी अतिरिक्त मांग पैदा करेंगे।
इसी वजह से एसोसिएशन का मानना है कि उत्पादन क्षमता बढ़ाने की प्रक्रिया भविष्य की मांग आने के बाद शुरू करने के बजाय अभी से शुरू की जानी चाहिए। परियोजनाओं को मंजूरी, जमीन, वित्तीय व्यवस्था और निर्माण में समय लगता है। इसलिए देर से लिया गया फैसला भविष्य में बिजली संकट को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता।
सौर ऊर्जा के साथ थर्मल क्षमता पर भी जोर
बिजली क्षेत्र में सौर ऊर्जा का विस्तार पंजाब के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन एसोसिएशन ने केवल सोलर क्षमता बढ़ाने को पर्याप्त नहीं माना है। संगठन के मुताबिक दिन के समय सौर ऊर्जा बिजली की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकती है, लेकिन रात और गैर-सौर घंटों में भरोसेमंद बिजली आपूर्ति के लिए अन्य स्रोतों की जरूरत बनी रहती है।
इसी कारण थर्मल उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। इंजीनियरों के अनुसार, राज्य को ऐसी संतुलित बिजली व्यवस्था की आवश्यकता है जिसमें सौर और थर्मल समेत अलग-अलग स्रोतों का उचित इस्तेमाल हो और मांग के अनुसार लगातार बिजली उपलब्ध कराई जा सके।
निवेश में देरी भविष्य में बढ़ा सकती है मुश्किल
एसोसिएशन ने राज्य सरकार से बिजली क्षेत्र में निवेश को लेकर स्पष्ट और दीर्घकालीन नीति अपनाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि उत्पादन क्षमता बढ़ाने में लगातार देरी करने से बिजली की मांग और राज्य के भीतर उपलब्ध उत्पादन के बीच अंतर बढ़ता जाएगा।
अगर यह अंतर लगातार बढ़ा तो पावरकॉम को अधिक मात्रा में बिजली बाहर से खरीदनी पड़ सकती है। इससे वित्तीय बोझ बढ़ेगा और उपभोक्ताओं तथा राज्य की अर्थव्यवस्था पर अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।
इंजीनियरों ने यह भी कहा है कि नई बिजली परियोजनाओं में निवेश केवल बिजली संकट का समाधान नहीं देगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है। राज्य में बिजली उत्पादन से जुड़ी परियोजनाओं, निर्माण कार्यों और तकनीकी सेवाओं के विस्तार से पंजाब के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बनने की संभावना है।
अब एसोसिएशन की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है। इंजीनियरों की मांग है कि पंजाब बिजली क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए तत्काल कदम उठाए जाएं और भविष्य की मांग के अनुरूप उत्पादन क्षमता विकसित करने की प्रक्रिया तेज की जाए। संगठन का मानना है कि समय रहते निवेश और योजना पर काम किया गया तो राज्य न केवल संभावित बिजली संकट से बच सकता है, बल्कि अपनी ऊर्जा व्यवस्था को आर्थिक रूप से भी अधिक मजबूत बना सकता है।