पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ी खबर के बाद शुरू हुआ छात्र प्रदर्शन रविवार को हिंसक रूप ले गया। कैंपस से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंच गया और काफी समय तक जालंधर-फगवाड़ा मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा। हालात बिगड़ने के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ, जिसमें पथराव, वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल बुलाया और बाद में कैंपस में भारी सुरक्षा तैनात कर दी गई। ताजा जानकारी के मुताबिक पुलिस ने पांच युवकों को हिरासत में लिया है और उनके पास से एक दातर तथा वॉकी-टॉकी सेट बरामद किए जाने की बात कही गई है।
पूरे विवाद की शुरुआत छात्राओं से जुड़े एक कथित यौन अपराध की खबर से हुई। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसर में एक छात्रा के साथ दुष्कर्म हुआ और बाद में उसकी आत्महत्या की खबर सामने आई। सोशल मीडिया और कैंपस में यह जानकारी तेजी से फैलने के बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थी एकत्र हो गए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने वायरल हो रही बातों को खारिज करते हुए इन्हें झूठी और मनगढ़ंत अफवाह बताया है। पुलिस ने भी शुरुआती स्तर पर मामले की वास्तविकता पता लगाने के लिए जांच शुरू की और छात्रों के बयान के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया।
विरोध कर रहे छात्रों की मुख्य मांगों में कथित घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शामिल रही। प्रदर्शन धीरे-धीरे कैंपस से बाहर निकल आया और जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर बड़ी संख्या में छात्र पहुंच गए। हाईवे पर प्रदर्शन और जाम के कारण यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। रिपोर्टों के मुताबिक यह रास्ता कई घंटों तक बाधित रहा और बाद में पुलिस की कार्रवाई के बाद यातायात को बहाल कराया गया। सोमवार सुबह तक पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में आने की बात कही और हाईवे पर आवाजाही बहाल होने की जानकारी दी।
रविवार शाम तक स्थिति अपेक्षाकृत शांत कराने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन बाद में तनाव दोबारा बढ़ गया। पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव किया गया और पुलिस वाहनों को निशाना बनाया गया। कुछ वाहनों को नुकसान पहुंचा और कुछ वाहनों में आग लगाए जाने की जानकारी सामने आई। दूसरी ओर, प्रदर्शन कर रहे छात्रों की ओर से पुलिस कार्रवाई को लेकर आरोप लगाए गए। घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों ने भीड़ को हटाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल प्रयोग किया। इसके बाद हालात और बिगड़ गए और कैंपस तथा उसके आसपास अफरातफरी का माहौल बन गया।
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, मामले में पांच युवकों को पकड़ा गया है। 27वीं बटालियन की कमांडेंट गुरमीत कौर ने बताया कि हिरासत में लिए गए युवकों के पास से दातर और वॉकी-टॉकी सेट मिला है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये लोग कौन हैं, वे प्रदर्शन में किस तरह शामिल हुए और उनके पास ऐसे सामान क्यों थे। अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस बरामदगी के बाद पुलिस कैंपस में बाहरी लोगों की संभावित मौजूदगी और हिंसा के दौरान उनकी भूमिका से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है।
इस बीच, पुलिस ने कथित यौन अपराध की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT गठित की है। जांच एजेंसियां घटना से संबंधित CCTV फुटेज, फोरेंसिक सामग्री और फोन रिकॉर्ड समेत उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि मामले में तथ्यों की पुष्टि के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। FIR फिलहाल अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज की गई है। ऐसे में कथित घटना में किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने से पहले निकालना उचित नहीं होगा।
LPU प्रशासन ने हिंसा के बाद बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए नियमित कक्षाएं 10 दिनों के लिए स्थगित कर दी हैं। यह व्यवस्था 28 सितंबर से लागू हुई है। विश्वविद्यालय ने मिड-टर्म परीक्षाओं को भी अगली सूचना तक टाल दिया है। नए परीक्षा कार्यक्रम की जानकारी बाद में छात्रों को दी जाएगी। इसके बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपने घरों के लिए रवाना होने लगे। विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है ताकि किसी तरह की नई अप्रिय घटना को रोका जा सके।
घटना के बाद पंजाब सरकार ने भी पुलिस प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पुलिस अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को कहा। इसके बाद डीजीपी गौरव यादव ने विश्वविद्यालय पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। डीजीपी ने कहा कि मामले में जो भी व्यक्ति कानून तोड़ेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि हिंसा से जुड़े मामलों की जांच की जाएगी और किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस नेतृत्व की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।
हिंसा को देखते हुए विश्वविद्यालय और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। विभिन्न जिलों से अतिरिक्त पुलिस कर्मियों को बुलाया गया ताकि कैंपस, हाईवे और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखी जा सके। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना और यातायात को सामान्य करना है। रविवार रात हुई घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कैंपस के अलग-अलग हिस्सों में निगरानी बढ़ा दी।
इस पूरे घटनाक्रम में एक छात्र विशाल कुमार ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ बाहरी लोग भी कैंपस में पहुंचे थे। उसके अनुसार इनमें से कुछ लोगों ने मास्क पहन रखा था और उन्होंने कैंपस में तोड़फोड़ की। छात्र ने कहा कि वह खुद और अन्य विद्यार्थी इस घटनाक्रम से डरे हुए थे। हालांकि, बाहरी लोगों की भूमिका को लेकर सामने आए ऐसे दावों की भी पुलिस जांच कर रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हिंसा में शामिल सभी लोग विश्वविद्यालय के छात्र थे या उनमें बाहरी व्यक्ति भी शामिल थे। इसी पहलू को लेकर पुलिस पूछताछ और CCTV फुटेज की जांच कर रही है।
मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। पंजाब भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियावाल ने LPU में हुई हिंसा को लेकर पंजाब सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कैंपस में हुई तोड़फोड़ और झड़पों को लेकर जवाबदेही की मांग की। बलियावाल ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ बाहरी लोग हथियार या संचार उपकरण लेकर परिसर में दाखिल हुए थे और इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उन्होंने इस घटनाक्रम को 30 सितंबर को प्रस्तावित केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम से जोड़कर उठाए गए सवालों की भी जांच की मांग की। हालांकि, इस राजनीतिक दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच फिलहाल हिंसा तथा कथित अपराध से जुड़े तथ्यों पर केंद्रित है।
उधर, पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर भरोसा नहीं करने और सोशल मीडिया पर अपुष्ट जानकारी साझा न करने की अपील की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी वायरल दावों को लेकर अपना पक्ष रखा है और कहा है कि परिसर में कथित दुष्कर्म की बातों में फिलहाल कोई सच्चाई नहीं है। दूसरी तरफ पुलिस ने छात्रों की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस विरोधाभासी स्थिति में अब SIT की जांच अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसी के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि कथित घटना वास्तव में हुई थी या नहीं और हिंसा की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई।
फिलहाल LPU परिसर में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और हाईवे पर यातायात भी बहाल कर दिया गया है। पांच युवकों की गिरफ्तारी, दातर और वॉकी-टॉकी की बरामदगी तथा हिंसा में क्षतिग्रस्त वाहनों की जांच के साथ पुलिस का फोकस अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने पर है। कथित यौन अपराध से लेकर छात्र प्रदर्शन, हाईवे जाम, पुलिस के साथ टकराव और आगजनी तक हर पहलू की जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में SIT की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि वायरल दावों के पीछे वास्तविक तथ्य क्या हैं और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका क्या रही।