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The Scoopp

 

एलपीयू हिंसा में पुलिस का शिकंजा, 12 गिरफ्तार; 30 संदिग्धों की तलाश तेज

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में 26 सितंबर की रात शुरू हुए हंगामे के बाद पुलिस की जांच अब तेजी से आगे बढ़ेगी। कैंपस में तोड़फोड़, दुकानों में लूटपाट और सड़क जाम करने के मामले में पुलिस ने करीब 40 लोगों की पहचान की है। इनमें मौजूदा विद्यार्थियों के साथ पूर्व छात्र और यूनिवर्सिटी से किसी तरह का संबंध नहीं रखने वाले बाहरी युवक भी शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि करीब 30 अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। अधिकारियों के मुताबिक पहचाने गए लोगों में जम्मू-कश्मीर के तीन छात्र भी शामिल हैं। इनमें से एक को पुलिस गिरफ्तार कर फगवाड़ा लेकर आई है, जबकि बाकी दो की तलाश के लिए टीम भेजी गई है। पुलिस शुक्रवार को आरोपियों के नाम और उनकी भूमिका को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा करेगी। जांच में एक छात्रा के आंध्र प्रदेश से होने की बात भी सामने आई है, वहीं कुछ लड़कियों की तस्वीरें भी पुलिस के हाथ लगी हैं, जिनमें वे कथित तौर पर लूटे गए सामान के साथ जाती दिखाई दे रही हैं। पुलिस अब इन तस्वीरों के आधार पर उनकी पहचान करने के साथ यह पता लगाने में जुटी है कि घटना के दौरान उनकी वास्तविक भूमिका क्या थी।

सीसीटीवी और मोबाइल लोकेशन से तैयार हो रही आरोपियों की सूची

पुलिस की जांच केवल वीडियो फुटेज तक सीमित नहीं है। घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को खंगालने के साथ संदिग्धों की मोबाइल टावर लोकेशन और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इसी प्रक्रिया के आधार पर उन लोगों की पहचान की जा रही है, जो हिंसा, तोड़फोड़ या लूटपाट के दौरान मौके पर मौजूद थे। पुलिस यह भी देख रही है कि कौन व्यक्ति वास्तव में घटना में शामिल था और कौन केवल भीड़ का हिस्सा बनकर वहां पहुंचा था। पहचान किए गए लोगों में कई ऐसे पूर्व विद्यार्थी भी बताए जा रहे हैं, जो यूनिवर्सिटी के लॉ गेट के आसपास बने पीजी में रह रहे थे। पुलिस को आशंका है कि हिंसा के बाद कुछ लोग इन कमरों का इस्तेमाल लूटपाट के दौरान मिले सामान को छिपाने के लिए कर सकते हैं। इसी वजह से अब पीजी इलाकों में जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है।

लॉ गेट के पीजी कमरों पर पुलिस की नजर

जांच का एक अहम हिस्सा अब एलपीयू के लॉ गेट के आसपास मौजूद पीजी बन गए हैं। पुलिस को सूचना मिली है कि बवाल के दौरान दुकानों से उठाया गया सामान कुछ कमरों में रखा जा सकता है। जांच में ऐसे संकेत भी मिले हैं कि कुछ पूर्व विद्यार्थी और अन्य युवक कथित तौर पर सामान अपने कमरों में रखने के बाद वहां से निकल गए। कई कमरों पर ताले लगे होने के कारण पुलिस सीधे तलाशी नहीं ले पा रही है। ऐसे में संबंधित कमरों की जांच के लिए अदालत से सर्च वारंट लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस ने अदालत में आवेदन देकर बंद कमरों को खुलवाकर तलाशी लेने की अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद इन पीजी में तलाशी अभियान चलाया जाएगा और यह पता लगाने की कोशिश होगी कि वहां यूनि मॉल या आसपास की दुकानों से लूटा गया कोई सामान मौजूद है या नहीं। पुलिस को उम्मीद है कि तलाशी के दौरान बरामदगी होने पर मामले में आरोपियों की भूमिका और स्पष्ट हो सकेगी।

तीन आरोपियों को तीन दिन के रिमांड पर भेजा गया

फगवाड़ा पुलिस ने वीरवार को टिब्बी मोहल्ले के रहने वाले गगन, जेम्स दहिया और अभि को गिरफ्तार किया था। इनमें जेम्स दहिया एलपीयू का विद्यार्थी बताया गया है, जबकि गगन डोमिनोज के लिए पिज्जा डिलीवरी का काम करता था। गिरफ्तारी के बाद तीनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से हिंसा के दौरान उनकी मौजूदगी, दूसरे युवकों से संपर्क और लूटपाट से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश करेगी। इससे पहले पुलिस साहिल नाम के एक युवक को भी गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस के मुताबिक साहिल के हाथ में लोहे की छड़ थी और वह दुकानों में तोड़फोड़ करने वाले लोगों के साथ घूमता दिखाई दिया था। अब पुलिस गिरफ्तार किए गए सभी लोगों से अलग-अलग पूछताछ कर घटना के पूरे घटनाक्रम और उसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास करेगी।

पूछताछ के लिए कई युवक हिरासत में, एक नाबालिग भी

गिरफ्तारियों के अलावा पुलिस ने कुछ अन्य युवकों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। इनमें से एक के नाबालिग होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस उसकी उम्र की पुष्टि करने के साथ यह पता कर रही है कि वह घटना के समय कहां मौजूद था और उसका किसी तरह की तोड़फोड़ या लूटपाट में कोई संबंध था या नहीं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी संदिग्धों की भूमिका उपलब्ध डिजिटल और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी। किसी व्यक्ति की पहचान केवल तस्वीर या वीडियो में दिखाई देने के आधार पर अंतिम आरोपी के रूप में नहीं की जा रही है। जांच एजेंसियां घटनास्थल की फुटेज, मोबाइल लोकेशन और अन्य जानकारी को आपस में मिलाकर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रही हैं।

जिस छात्र पर आरोप लगा, घटना के समय घर पर मिला

मामले की जांच में एक ऐसा पहलू भी सामने आया है, जिसने पुलिस की पड़ताल को अलग दिशा दी है। लुधियाना के एक विद्यार्थी को एलपीयू प्रबंधन की ओर से आरोपी बताए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि पुलिस जांच में पाया गया कि जिस समय कैंपस में हिंसा हुई, उस दौरान वह विद्यार्थी अपने घर पर था। उसके घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग और मोबाइल टावर लोकेशन से उसके घर पर होने की पुष्टि हुई है। इसके बावजूद पुलिस ने उसकी भूमिका को पूरी तरह जांच से बाहर नहीं किया है और फिलहाल मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल जारी रखी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी व्यक्ति की वास्तविक भूमिका को लेकर स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जाएगा।

लड़कियों की तस्वीरें भी जांच का हिस्सा

हिंसा और लूटपाट की जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसी तस्वीरें मिली हैं, जिनमें लड़कियां सामान लेकर जाती हुई दिखाई दे रही हैं। पुलिस इन तस्वीरों के आधार पर उनकी पहचान करने का प्रयास कर रही है। जांच अधिकारियों के सामने यह सवाल भी है कि तस्वीरों में नजर आ रहा सामान कहां से आया और संबंधित लोगों की घटना में क्या भूमिका थी। पुलिस इस मामले में जल्दबाजी से किसी को आरोपी घोषित करने के बजाय उपलब्ध फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का मिलान कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों की पहचान होगी, उनसे पूछताछ के बाद यह स्पष्ट किया जाएगा कि वे हिंसा में शामिल थे, लूटे गए सामान को ले जा रहे थे या किसी अन्य वजह से मौके पर मौजूद थे।

सोशल मीडिया पर फैली दुष्कर्म की सूचना के बाद बिगड़ा माहौल

एलपीयू में पूरा विवाद 26 सितंबर की रात सोशल मीडिया पर फैली एक छात्रा से दुष्कर्म की सूचना के बाद शुरू हुआ था। इस सूचना के फैलते ही कैंपस में विद्यार्थियों की भीड़ जुटने लगी और देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसके बाद यूनिवर्सिटी परिसर में तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं और यूनि मॉल में मौजूद दुकानों को भी निशाना बनाया गया। स्थिति बिगड़ने के बाद प्रदर्शनकारियों ने जालंधर-फगवाड़ा मार्ग पर एनएच-44 को जाम कर दिया था। यह जाम 18 घंटे से अधिक समय तक चला, जिससे इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ। बाद में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के बीच स्थिति को नियंत्रित किया गया। अब पुलिस का फोकस इस बात पर है कि अफवाह फैलने के बाद भीड़ किस तरह संगठित हुई और हिंसा के दौरान किन लोगों ने कानून व्यवस्था को प्रभावित किया।

गिरफ्तार गगन के परिवार ने लगाया जानकारी नहीं देने का आरोप

गगन की गिरफ्तारी के बाद उसके परिवार ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। उसके मामा का आरोप है कि परिवार को उसकी गिरफ्तारी के बारे में समय पर जानकारी नहीं दी गई। परिजनों के अनुसार गगन करीब एक दिन से लापता था और उसने अदालत में पेशी से पहले फोन करके अपने गिरफ्तार होने की जानकारी परिवार को दी। परिवार का कहना है कि गगन ने लगभग डेढ़ महीने पहले ही डोमिनोज में नौकरी शुरू की थी। पुलिस की ओर से गगन पर लगाए गए आरोपों और उसकी भूमिका की जांच अब रिमांड के दौरान की जा रही है। पुलिस उसके मोबाइल फोन, घटनास्थल से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि वह हिंसा के दौरान किसके संपर्क में था।

अशोक मित्तल ने पंजाब में बढ़ती घटनाओं पर जताई चिंता

एलपीयू के चांसलर और राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल ने यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने पंजाब में नशाखोरी, गैंगस्टरवाद, छीना-झपटी और अपहरण जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जाहिर की। मित्तल ने कहा कि चितकारा यूनिवर्सिटी और एलपीयू में हुई घटनाओं का स्वरूप उन्हें एक जैसा दिखाई देता है। उनके अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट के जरिए अफवाहें फैलाकर विद्यार्थियों को उकसाने का आरोप भी सामने आया है। उन्होंने दावा किया कि कुछ बाहरी तत्वों ने स्थिति का फायदा उठाते हुए यूनिवर्सिटी में तोड़फोड़ और चोरी की। मित्तल ने इस पूरे मामले की गहन जांच की मांग करते हुए कहा कि घटना के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान होनी चाहिए। उन्होंने पंजाब को सीमावर्ती राज्य बताते हुए कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय करने की जरूरत पर जोर दिया।

अब पुलिस के सामने कई सवाल

एलपीयू हिंसा मामले में पुलिस की कार्रवाई के साथ जांच का दायरा भी बढ़ता जा रहा है। करीब 40 लोगों की पहचान, 12 गिरफ्तारियां, जम्मू-कश्मीर के छात्रों से जुड़ी जांच, पीजी कमरों में संभावित लूट का सामान, संदिग्ध लड़कियों की तस्वीरें और बाहरी युवकों की भूमिका जैसे कई पहलू इस समय जांच के केंद्र में हैं। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों और सीसीटीवी रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हिंसा के दौरान कौन व्यक्ति किस स्थान पर था और उसकी भूमिका क्या थी। अदालत से तलाशी की अनुमति मिलने के बाद लॉ गेट के आसपास पीजी में जांच से भी मामले में नए तथ्य सामने आने की संभावना है। पुलिस की आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों से कितनी अतिरिक्त जानकारी सामने आती है। शुक्रवार को पुलिस की ओर से आरोपियों की पहचान और उनकी भूमिका के संबंध में आधिकारिक जानकारी दिए जाने के बाद मामले की जांच की दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।