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The Scoopp

 

पंजाब में सीबीआई की छापेमारी से सियासी पारा चढ़ा, सीएम कैंप ऑफिस की तलाशी ने बढ़ाई हलचल

पंजाब में मंगलवार देर शाम केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया। चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री भगवंत मान के कैंप ऑफिस समेत पंजाब और चंडीगढ़ में कई स्थानों पर सीबीआई की टीमों ने एक साथ तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने केंद्र की भाजपा सरकार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने इसे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की दिशा में अहम कदम बताया। सीबीआई की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब पंजाब की राजनीति पहले से ही चुनावी गतिविधियों के बीच तेज हो चुकी है।

मामला मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है। सीबीआई ने मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एजेंसी की अलग-अलग टीमों ने चंडीगढ़, मोहाली, संगरूर, गुरदासपुर, लुधियाना, जालंधर और रोपड़ के मोरिंडा सहित कई स्थानों पर आरोपियों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली। जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, दस्तावेजों, लैपटॉप, मोबाइल फोन और दूसरी सामग्री को कब्जे में लिए जाने की बात सामने आई है।

चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस में चली तलाशी देर शाम शुरू हुई और करीब रात 11 बजे तक जारी रही। कार्रवाई खत्म होने के बाद सीबीआई की टीम जब परिसर से बाहर निकली तो उसके साथ कुछ बैग, फाइलें और दस्तावेज दिखाई दिए। अधिकारियों के हाथ में एक सील लगा प्लास्टिक कंटेनर भी नजर आया। हालांकि, उसमें क्या सामग्री थी, इसकी आधिकारिक जानकारी जांच एजेंसी की ओर से नहीं दी गई है। सीबीआई ने अभी बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक सामान का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया है।

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का हालिया आदेश है। अदालत ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भेजी गई तीन चिट्ठियों में लगाए गए आरोपों की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। हाईकोर्ट ने सीबीआई को आपराधिक मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने और निर्धारित अवधि में रिपोर्ट अदालत के सामने रखने का निर्देश दिया था। इसके बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने एफआईआर दर्ज की और अगले ही दिन कई स्थानों पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया।

ईडी की ओर से भेजी गई शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि सरकारी अधिकारियों से जुड़े विभिन्न कामों में कथित तौर पर बिचौलियों और प्रभावशाली लोगों का नेटवर्क सक्रिय था। आरोपों में अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग प्रभावित करने से लेकर विभागीय कार्रवाई, प्रशासनिक मंजूरियां, टेंडर, लाइसेंस, जमीन से जुड़े मामलों और चेंज ऑफ लैंड यूज यानी सीएलयू जैसी प्रक्रियाओं में कथित हस्तक्षेप का जिक्र था। जांच के दायरे में यह आरोप भी है कि कुछ सरकारी फैसलों या नीतिगत दस्तावेजों से संबंधित जानकारी आधिकारिक तौर पर जारी होने से पहले ही निजी लोगों तक पहुंचाई जाती थी।

मामले में सीबीआई ने राजबीर सिंह घुम्मन के अलावा नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और आरएस नागरा को नामजद किया है। इसके साथ ही कुछ अज्ञात सरकारी और निजी व्यक्तियों को भी जांच में शामिल किया गया है। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपों के पीछे वास्तविक भूमिका किसकी थी और कथित तौर पर सरकारी तंत्र तक पहुंच बनाकर किस तरह फैसलों या प्रक्रियाओं को प्रभावित किया जाता था।

जांच में नितिन गोहल की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ईडी के आरोपों के अनुसार, वह कथित तौर पर सरकारी कामकाज से जुड़े लोगों और प्रभावशाली व्यक्तियों के बीच संपर्क स्थापित करने वाले व्यक्ति के रूप में काम करता था। सरकारी अधिकारियों से जुड़े काम, जमीन-संपत्ति से संबंधित मामलों, सीएलयू और अन्य मंजूरियों के संदर्भ में उसका नाम सामने आया था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी और फिलहाल ये जांच एजेंसियों द्वारा लगाए गए आरोप हैं।

जितिन गोहल उर्फ राजा का नाम भी मामले में शामिल है। वह नितिन गोहल का भाई बताया गया है। जांच एजेंसी की एफआईआर में उसका नाम शामिल किया गया है और मुख्यमंत्री कार्यालय से संबंधित कथित नियुक्ति तथा संपर्कों को लेकर उसकी भूमिका की जांच की जा रही है। इसी तरह रोमी राजा महाजन का नाम भी घुम्मन और गोहल से जुड़े कथित नेटवर्क के संदर्भ में सामने आया है। ईडी के आरोपों के मुताबिक, उसकी भूमिका कुछ लोगों को मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क स्थापित कराने में रही हो सकती है।

बीर देविंदर और आरएस नागरा के नाम भी सीबीआई की कार्रवाई के केंद्र में हैं। जांच एजेंसी इन दोनों से संबंधित कथित संपर्कों और मामले में उनकी भूमिका की पड़ताल कर रही है। सीबीआई की कार्रवाई का मकसद केवल दस्तावेज जुटाना नहीं बल्कि आरोपों से जुड़े लोगों के बीच संबंध, कथित लेन-देन और सरकारी प्रक्रियाओं में संभावित हस्तक्षेप की कड़ियों को जोड़ना भी माना जा रहा है।

इस मामले की शुरुआत तब हुई जब ईडी ने पंजाब के डीजीपी को तीन अलग-अलग पत्र भेजकर कथित भ्रष्टाचार और सरकारी कामकाज में बाहरी प्रभाव के आरोप लगाए। ईडी की शिकायतों पर पंजाब पुलिस की ओर से मामला दर्ज नहीं किए जाने के बाद अधिवक्ता निखिल सराफ ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। अदालत ने उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपना उचित माना।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने जांच को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाते हुए एफआईआर दर्ज की। अदालत ने जांच एजेंसी से दो महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। यही वजह है कि मंगलवार को हुई छापेमारी को इस मामले की शुरुआती बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। अब तलाशी के दौरान मिले दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जांच की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

उधर, सीबीआई की कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भाजपा पर सीधा हमला बोला। मान ने आरोप लगाया कि पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए कर रही है। मुख्यमंत्री का कहना है कि भाजपा पंजाब में राजनीतिक रूप से मुकाबला करने के बजाय ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों के जरिए उनकी सरकार को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है।

मान ने सोशल मीडिया पर कहा कि भाजपा ने पंजाब चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है और उन्हें तथा उनकी सरकार को बदनाम करने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी को मिल रहे समर्थन से भाजपा घबराई हुई है। मुख्यमंत्री के अलावा उनकी सरकार के मंत्रियों ने भी सोशल मीडिया के जरिए सीबीआई की कार्रवाई का विरोध किया और केंद्र पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया।

आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री कार्यालय पर सीबीआई की कार्रवाई भाजपा की घबराहट को दिखाती है। केजरीवाल ने पंजाब से जुड़े कई पुराने मुद्दों का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार पर पंजाब के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि भाजपा चुनावी मैदान में सीधे मुकाबले में आम आदमी पार्टी को हराने की स्थिति में नहीं है, इसलिए जांच एजेंसियों का सहारा लिया जा रहा है। केजरीवाल ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी आगामी चुनाव में बड़ी जीत के साथ इसका राजनीतिक जवाब देगी।

दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने सीबीआई की कार्रवाई को अलग नजरिए से देखा है। विपक्ष का कहना है कि अगर सरकारी फैसलों, अधिकारियों की पोस्टिंग, टेंडर, लाइसेंस और प्रशासनिक मंजूरियों को प्रभावित करने के लिए किसी नेटवर्क के इस्तेमाल के आरोप हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। विपक्ष ने यह भी कहा है कि जांच को राजनीतिक बयानबाजी से अलग रखते हुए उसके परिणाम का इंतजार किया जाना चाहिए।

इस बीच संगरूर के घराचों गांव में भी सीबीआई की कार्रवाई चर्चा का विषय बनी रही। राजबीर सिंह घुम्मन के पैतृक गांव में तलाशी के दौरान कुछ लोगों द्वारा ढोल बजाकर कार्रवाई का स्वागत किए जाने का दावा सामने आया। अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया ने सोशल मीडिया पर इससे संबंधित दावा किया और कहा कि सीबीआई अधिकारियों की गाड़ियों पर गुलाब के फूल भी बरसाए गए। हालांकि, इस दावे से जुड़ी परिस्थितियों और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि जांच एजेंसी की ओर से नहीं की गई है।

अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सीबीआई की तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों से जांच किस दिशा में जाती है। क्या इनमें सरकारी फैसलों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के कथित आदान-प्रदान, अधिकारियों पर प्रभाव डालने या आर्थिक लेन-देन के संबंध में कोई ठोस सामग्री मिलती है, यह आगे की जांच से स्पष्ट होगा।

फिलहाल मुख्यमंत्री कार्यालय पर हुई कार्रवाई ने पंजाब की राजनीति में एक नया मोर्चा खोल दिया है। एक तरफ जांच एजेंसी भ्रष्टाचार के आरोपों की पड़ताल कर रही है, वहीं आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रही है। दूसरी ओर विपक्ष इसे कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच का मौका मान रहा है। हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही इस जांच के दौरान सीबीआई की अगली रिपोर्ट और तलाशी में जब्त सामग्री से यह तय होगा कि आरोपों में कितनी वास्तविकता है और मामले की जिम्मेदारी आखिर किन लोगों तक पहुंचती है।