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The Scoopp

 

पंचकूला में गैंगस्टरों से पुलिस की मुठभेड़, दो शूटर घायल होकर गिरफ्तार; SHO की जैकेट पर लगी गोली

पंचकूला में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले कथित गैंगस्टरों और पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस और क्राइम ब्रांच-2 की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए लॉरेंस बिश्नोई और अर्जू बिश्नोई गैंग से जुड़े बताए जा रहे दो शूटरों को गिरफ्तार किया है। मुठभेड़ के दौरान दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी हुई। आरोप है कि बदमाशों ने पुलिसकर्मियों को निशाना बनाकर फायरिंग की, जिसमें एक गोली थाना प्रभारी की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी। एक अन्य गोली सहायक उप-निरीक्षक के कान के बेहद करीब से निकल गई। गनीमत रही कि पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल नहीं हुए। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने दोनों आरोपियों के पैरों पर गोली चलाई, जिसके बाद वे मौके पर गिर पड़े और पुलिस टीम ने उन्हें पकड़ लिया। घटना के बाद दोनों घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने मौके से अवैध हथियार बरामद करने और मामले में संबंधित कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई करने की जानकारी दी है।

ताऊ देवी लाल स्टेडियम के पास हुई कार्रवाई

यह पूरा घटनाक्रम पंचकूला के सेक्टर-3 में ताऊ देवी लाल स्टेडियम के नजदीक सामने आया। पुलिस के मुताबिक, स्टेडियम से सेक्टर-21 की तरफ जाने वाले रास्ते पर यह कार्रवाई की गई। अधिकारियों को पहले गुप्त सूचना मिली थी कि दो संदिग्ध व्यक्ति इलाके में किसी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पंचकूला पुलिस और क्राइम ब्रांच-2 की टीम ने संबंधित मार्ग पर निगरानी बढ़ाई और नाकेबंदी कर दी। पुलिस का उद्देश्य संदिग्धों को रोककर उनकी पहचान करना और किसी संभावित वारदात को होने से पहले टालना था। इसी दौरान वहां से गुजर रहे दोनों संदिग्धों की गतिविधियों पर पुलिस की नजर पड़ी। पुलिस टीम को सामने देखकर आरोपियों ने रुकने के बजाय भागने की कोशिश की। इसके बाद घटनास्थल पर हालात तेजी से बदल गए और मामला गोलीबारी तक पहुंच गया।

पुलिस को देखकर भागे आरोपी, फिर शुरू हुई फायरिंग

प्राथमिकी में दर्ज विवरण के अनुसार, नाकेबंदी के दौरान दोनों संदिग्धों ने पुलिस की मौजूदगी देखी तो वे वहां से निकलने लगे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि दोनों ने अपने पास मौजूद अवैध हथियार निकाल लिए और पुलिस टीम की ओर गोलियां चला दीं। अचानक हुई फायरिंग के कारण मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को अपनी सुरक्षा के साथ-साथ अन्य लोगों की संभावित सुरक्षा का भी ध्यान रखना पड़ा। पुलिस ने सायरन बजाकर आरोपियों को चेतावनी दी और उन्हें हथियार डालकर आत्मसमर्पण करने के लिए कहा। इसके बावजूद बदमाशों ने कथित तौर पर फायरिंग जारी रखी। पुलिस के अनुसार, आरोपियों की ओर से चलाई गई तीन और गोलियां पुलिस टीम को निशाना बनाकर दागी गईं। इस घटनाक्रम ने मुठभेड़ को और गंभीर बना दिया। पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आरोपियों का इरादा पुलिसकर्मियों को नुकसान पहुंचाने का था। हालांकि, इस संबंध में प्राथमिकी में दर्ज आरोपों और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही पूरे घटनाक्रम की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी।

थाना प्रभारी की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी गोली

मुठभेड़ के दौरान सबसे गंभीर स्थिति उस समय पैदा हुई, जब आरोपियों की ओर से चलाई गई एक गोली थाना प्रभारी की बुलेटप्रूफ जैकेट पर जा लगी। जैकेट की वजह से थाना प्रभारी को गोली लगने से बचाव हुआ। इसी दौरान एक गोली पुलिस की सरकारी गाड़ी में भी लगी। इसके अतिरिक्त सहायक उप-निरीक्षक सुनील कुमार के कान के बेहद पास से एक गोली गुजर गई। इस घटना में पुलिसकर्मियों की जान को खतरा पैदा हो गया था, लेकिन उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वे गंभीर चोट से बच गए। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी में बुलेटप्रूफ जैकेट की भूमिका अहम रही, क्योंकि गोली सीधे शरीर पर लगने के बजाय सुरक्षा कवच पर लगी। मुठभेड़ में पुलिस वाहन को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस टीम ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जवाबी कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार, पुलिस ने पहले आरोपियों को चेतावनी देने और आत्मसमर्पण का अवसर देने का प्रयास किया था। जब फायरिंग नहीं रुकी, तब आत्मरक्षा में गोली चलाने का फैसला किया गया।

जवाबी गोलीबारी में दोनों शूटरों के पैरों में लगी गोली

पुलिस के अनुसार, लगातार फायरिंग के बीच टीम ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। इस दौरान दोनों संदिग्धों के पैरों को निशाना बनाया गया, जिससे वे घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें काबू में लेकर उनके पास मौजूद हथियारों को अपने कब्जे में लिया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद मौके पर मुठभेड़ समाप्त हुई और दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया। घायल होने के कारण उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां पुलिस की निगरानी में उनका उपचार कराया जा रहा है। घटनास्थल पर मौजूद पुलिस टीम ने स्थिति को सुरक्षित करने के बाद बरामद हथियारों और अन्य जरूरी साक्ष्यों को जांच के लिए अपने कब्जे में लिया। इस तरह संभावित आपराधिक वारदात की आशंका से शुरू हुई पुलिस कार्रवाई दो आरोपियों की गिरफ्तारी और हथियारों की बरामदगी तक पहुंच गई। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि दोनों आरोपी वहां किस उद्देश्य से पहुंचे थे और क्या वे किसी खास व्यक्ति या स्थान को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे।

अर्शदीप सिंह और जुगराज सिंह के रूप में हुई पहचान

पुलिस ने गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों की पहचान अर्शदीप सिंह और जुगराज सिंह के रूप में की है। शुरुआती पुलिस जानकारी में दोनों को लॉरेंस बिश्नोई और अर्जू बिश्नोई गैंग से जुड़ा शूटर बताया गया है। हालांकि, गैंग में उनकी कथित भूमिका, आपराधिक गतिविधियों और अन्य मामलों में संलिप्तता को लेकर जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं। पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि दोनों आरोपियों के पास हथियार कहां से आए और क्या उनके संपर्क में दूसरे लोग भी हैं। जांच के दौरान उनके मोबाइल फोन, संपर्कों और संभावित आपराधिक नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों किसी हालिया वारदात में सीधे तौर पर शामिल थे या किसी नई घटना को अंजाम देने की तैयारी कर रहे थे। इन सवालों के जवाब पुलिस की आगे की जांच से सामने आ सकते हैं।

हथियारों की बरामदगी के बाद जांच तेज

मुठभेड़ के बाद पुलिस ने घटनास्थल से अवैध हथियार बरामद किए हैं। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। जांच एजेंसियां अब गोलीबारी के पूरे घटनाक्रम, इस्तेमाल किए गए हथियारों और आरोपियों की कथित गतिविधियों से जुड़े सबूत जुटाएंगी। हथियारों की प्रकृति, उनकी वैधता और उनसे संबंधित अन्य जानकारियों की जांच मामले में अहम भूमिका निभा सकती है। इसके साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि आरोपियों के पास कितनी गोलियां थीं और मुठभेड़ के दौरान कितने राउंड फायर किए गए। इन पहलुओं की पुष्टि आधिकारिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी। पुलिसकर्मियों के बयान, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और प्राथमिकी में दर्ज विवरण भी जांच का हिस्सा होंगे।

गैंग के नेटवर्क और संभावित वारदात की दिशा में पड़ताल

इस मामले में पुलिस के सामने केवल दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहने के बजाय उनके कथित नेटवर्क की जानकारी जुटाने की चुनौती भी है। शुरुआती सूचना में दोनों के किसी आपराधिक वारदात की तैयारी में होने की आशंका जताई गई थी। ऐसे में जांच के दौरान यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि वे किस घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे थे और क्या उनके साथ कोई अन्य व्यक्ति भी जुड़ा था। पुलिस उनकी गतिविधियों की कड़ियां जोड़कर संभावित साजिश और संपर्कों के बारे में जानकारी जुटा सकती है। हालांकि, किसी अन्य वारदात या व्यक्ति से उनका संबंध होने की पुष्टि अभी उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी संभावित साजिश को अंतिम निष्कर्ष के तौर पर देखना उचित नहीं होगा।

पुलिस की कार्रवाई के बाद कई सवालों के जवाब मिलने बाकी

पंचकूला में हुई इस मुठभेड़ ने एक बार फिर संगठित अपराध से जुड़े संदिग्धों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को चर्चा में ला दिया है। इस घटना में थाना प्रभारी की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोली लगना और एएसआई के कान के पास से गोली गुजरना बताता है कि मुठभेड़ के दौरान पुलिसकर्मियों के सामने गंभीर खतरा पैदा हो गया था। दूसरी ओर, दोनों आरोपियों के घायल होने के बाद उनकी गिरफ्तारी और अस्पताल में उपचार की प्रक्रिया शुरू की गई। अब आगे की जांच में उनके कथित गैंग संबंधों, हथियारों के स्रोत और संभावित आपराधिक योजनाओं से जुड़ी जानकारी सामने आने की उम्मीद है। पुलिस की ओर से दर्ज मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत साक्ष्य जुटाए जाएंगे और आरोपों की जांच की जाएगी। फिलहाल इस घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू यह है कि पुलिस ने दो संदिग्ध शूटरों को गिरफ्तार किया है और मामले की जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगी।