मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर बढ़ा राजनीतिक टकराव, राहुल गांधी समेत 11 नेताओं ने मांगा स्वतंत्र ऑडिट; दिल्ली में मार्च के बाद पुलिस ने दर्ज कीं दो FIR
मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर केंद्र की चुनावी व्यवस्था और विपक्षी दलों के बीच चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव समेत 11 विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। हालांकि, याचिका दाखिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने उसमें लगभग 14 खामियां दर्ज की हैं। इन कमियों में जरूरी दस्तावेजों की अस्पष्ट प्रतियां, कुछ पन्नों का गायब होना, याचिकाकर्ताओं की सहमति से जुड़े दस्तावेजों का अभाव और निर्धारित कोर्ट फीस से कम राशि जमा करना शामिल है। इस घटनाक्रम ने SIR को लेकर जारी राजनीतिक बहस में एक नया मोड़ जोड़ दिया है।
याचिका में क्या-क्या कमियां बताई गईं?
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने याचिका प्रस्तुत करने वाले वकील को दस्तावेजों में मौजूद खामियों को दूर करने के लिए कहा है। रजिस्ट्री ने विशेष रूप से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट और पढ़ने योग्य प्रति उपलब्ध कराने की मांग की है। बताया गया है कि दस्तावेजों में शामिल आईडी कार्ड की कॉपी पर्याप्त रूप से साफ नहीं थी, जिसके कारण उसकी जानकारी पढ़ने में परेशानी हो रही थी।
इसके अलावा, याचिका पर हस्ताक्षर करने वाले पक्षों की सहमति से संबंधित औपचारिकताओं पर भी सवाल उठे हैं। जानकारी के मुताबिक, 11 याचिकाकर्ताओं में से नौ ने याचिका दायर करने के लिए अपनी लिखित सहमति नहीं दी थी। अदालत में सामूहिक रूप से याचिका दाखिल करते समय संबंधित पक्षों के जरूरी दस्तावेज और सहमति की औपचारिकताएं पूरी करना महत्वपूर्ण होता है। रजिस्ट्री ने इन्हीं प्रक्रियागत पहलुओं की ओर ध्यान दिलाया है।
दस्तावेजों की गुणवत्ता को लेकर भी आपत्ति सामने आई है। याचिका के साथ लगाए गए कुछ कागजात के पन्ने स्पष्ट नहीं हैं, जबकि कुछ पन्ने दस्तावेजों से गायब बताए गए हैं। इसके साथ ही कोर्ट फीस के रूप में निर्धारित रकम से 220 रुपये कम जमा किए जाने की बात भी सामने आई है। इन सभी कमियों को दूर करने के बाद ही याचिका की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में आसानी होगी। हालांकि, रजिस्ट्री की ओर से खामियां बताना अपने आप में याचिका के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं है। यह मुख्य रूप से दाखिल दस्तावेजों और जरूरी प्रक्रियाओं से जुड़ा मामला है।
चुनाव आयोग के खिलाफ उठाए गए सवाल
12 अक्टूबर को दायर इस याचिका में भारत निर्वाचन आयोग के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को भी पक्षकार बनाया गया है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और सूची में बदलाव किए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। विपक्ष चाहता है कि इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े।
याचिका में केवल आरोपों की जांच की मांग नहीं की गई है, बल्कि एक स्वतंत्र व्यवस्था के जरिए पूरे पुनरीक्षण की समीक्षा कराने का प्रस्ताव भी रखा गया है। विपक्ष का मानना है कि मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया की बुनियाद है। इसलिए इसके निर्माण, संशोधन और नाम हटाने से संबंधित फैसलों में पारदर्शिता आवश्यक है। हालांकि, SIR के संबंध में लगाए गए आरोपों और उनके समर्थन में प्रस्तुत किए गए तथ्यों पर न्यायिक निष्कर्ष आना अभी बाकी है।
रिटायर्ड जज की अगुवाई में समिति बनाने की मांग
विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही समिति में तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित नागरिकों को शामिल करने की मांग भी की गई है, ताकि जांच केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित न रहे और तकनीकी पहलुओं का भी निष्पक्ष आकलन किया जा सके।
याचिका के मुताबिक, प्रस्तावित समिति को एक निश्चित समयसीमा के भीतर अपना काम पूरा करना चाहिए। उसे SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों और किए गए अन्य बदलावों का स्वतंत्र ऑडिट करना होगा। विपक्ष की मांग है कि इस प्रक्रिया में यह जांचा जाए कि नाम हटाने के फैसले किस आधार पर लिए गए और कहीं पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से तो नहीं हटाए गए।
इस मांग के पीछे विपक्ष का तर्क है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गलती का असर सीधे लोकतांत्रिक अधिकारों पर पड़ सकता है। इसलिए सूची में किए गए बदलावों की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। अब इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और याचिका की औपचारिकताओं को पूरा करने पर नजर रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के बाद दिल्ली पुलिस ने दर्ज कीं दो FIR
SIR और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर विपक्ष का विरोध केवल अदालत में याचिका दाखिल करने तक सीमित नहीं रहा। सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने के मामले में दिल्ली पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इनमें से एक मामला बाराखंभा रोड थाने और दूसरा तिलक मार्ग थाने में दर्ज किया गया है।
राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेता सोमवार को मार्च करते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। विपक्ष इस प्रदर्शन के जरिए चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताओं को सामने लाना चाहता था। हालांकि, मार्च से संबंधित पुलिस कार्रवाई ने इस राजनीतिक विवाद को एक और दिशा दे दी है। एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आने के बाद अब विरोध-प्रदर्शन और उसके दौरान हुई गतिविधियां भी चर्चा का हिस्सा बन गई हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी तरफ, इस मामले में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं अपने-अपने स्तर पर आगे बढ़ रही हैं। एफआईआर दर्ज होने का अर्थ अपने आप में आरोपों की पुष्टि नहीं है। मामले में आगे की कार्रवाई और संबंधित तथ्यों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचने का फैसला
विपक्ष की मौजूदा रणनीति को समझने के लिए पिछले कुछ दिनों की घटनाओं पर नजर डालना जरूरी है। 10 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने मतदाता सूची और कथित वोट चोरी से जुड़े मुद्दों को लेकर संसद से राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च किया था। इस दौरान राहुल गांधी, ममता बनर्जी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। अन्य सांसदों ने विजय चौक पर प्रदर्शन किया।
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा था कि देश में वोट चोरी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया था कि विपक्ष इस मामले को आगे भी उठाएगा और जरूरत पड़ने पर न्यायपालिका का रुख करेगा। इसी क्रम में उन्होंने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही थी। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने याचिका दाखिल करने और अदालत के सामने अपना पक्ष रखने की तैयारी की।
इस तरह राष्ट्रपति को ज्ञापन देने के बाद विपक्ष ने न्यायिक रास्ता अपनाने का फैसला किया। अब उसकी मांग है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच हो और कथित अनियमितताओं से जुड़े सवालों का जवाब मिले।
CJI से मिलने की मांग पर भी नहीं बनी बात
11 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। विपक्षी नेताओं ने इस विषय पर मुलाकात के लिए समय मांगा था। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने 12 अक्टूबर की शाम अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपने की इच्छा भी जताई थी।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विपक्षी सांसदों को मिलने का समय देने से इनकार कर दिया। जवाबी पत्र में उन्हें इस मुद्दे पर अदालत में याचिका दाखिल करने का रास्ता अपनाने के लिए कहा गया। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इस घटनाक्रम से स्पष्ट हुआ कि विपक्ष चुनाव आयोग से जुड़े अपने आरोपों को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उठाना चाहता है, जबकि मुख्य न्यायाधीश ने मामले को अदालत के निर्धारित तरीके से आगे बढ़ाने का संकेत दिया।
CJI सूर्यकांत ने प्रदर्शन को बताया अलग मुद्दा
12 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन और उससे जुड़ी पाबंदियों पर पूछे गए सवालों के जवाब में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि दिल्ली में हो रहा प्रदर्शन उनका मुद्दा नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। आम नागरिक हों या निर्वाचित जनप्रतिनिधि, वे अपनी शिकायतों और मांगों को लेकर अदालत में याचिका दायर कर सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने ये बातें विज्ञान भवन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान कहीं। उन्होंने विचाराधीन मामलों पर अदालत के बाहर चर्चा करने के संबंध में न्यायिक मर्यादा का भी उल्लेख किया। उनके बयान को विपक्ष की उस मांग के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ कार्रवाई और SIR की जांच के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी।
राहुल गांधी के आवास पर विपक्षी नेताओं की अगली बैठक
इस बीच, विपक्ष ने आगे की रणनीति बनाने के लिए बैठक की तैयारी भी की है। राहुल गांधी ने मंगलवार शाम अपने सुनहरी बाग रोड स्थित आवास पर विपक्षी सांसदों, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और छात्र संगठनों को चाय पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। इस बैठक को ‘हाई टी’ का नाम दिया गया है।
बैठक में कथित वोट चोरी के खिलाफ साझा विरोध-प्रदर्शन की रूपरेखा पर विचार होने की संभावना है। साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों की आगे की रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है। विपक्षी सांसदों की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी मंगलवार दोपहर प्रस्तावित है, जिसमें इस मुद्दे पर उनका रुख सामने आने की उम्मीद है।
फिलहाल, SIR को लेकर विपक्ष की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई दोनों जारी हैं। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका की प्रक्रियागत कमियों को दूर करने का सवाल है, तो दूसरी ओर विपक्ष चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आंदोलन की रणनीति तैयार कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि याचिका में बताई गई कमियां कब तक दूर होती हैं, अदालत इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है और विपक्ष अपने विरोध को किस दिशा में ले जाता है।