मानसा में नशा विरोधी अभियान से जुड़े कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसी की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ परिवार के सदस्यों, घायलों और आसपास के दुकानदारों से पूछताछ की है। फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल और आरोपी अश्वनी कुमार के मेडिकल स्टोर से नमूने भी एकत्र किए हैं। दूसरी ओर, मामले में पुलिस और संबंधित विभागों की भूमिका पर उठ रहे सवालों के बीच डीएसपी हरजिंदर सिंह गिल तथा ड्रग इंस्पेक्टर नरेश कुमार को निलंबित कर दिया गया है।
झोटा की हत्या के नौ दिन बाद भी उनका अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। परिवार और इंसाफ कमेटी ने अपनी मांगों पर कार्रवाई होने तक शव का अंतिम संस्कार नहीं करने का फैसला बरकरार रखा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे और पंजाब के डीजीपी की बर्खास्तगी की मांग पर सरकार तथा प्रदर्शनकारियों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में सीबीआई की जांच के साथ-साथ परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन भी जारी है।
सीबीआई ने दर्ज की अलग एफआईआर, कई पहलुओं की होगी जांच
सीबीआई ने मानसा के थाना सिटी-2 से मामले से संबंधित मूल एफआईआर और दूसरे दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर अलग से एफआईआर दर्ज की है। जांच एजेंसी ने मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को मामले में नामजद किया है। जांच की जिम्मेदारी वरिष्ठ डीआईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व वाली टीम को सौंपी गई है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103(1) के तहत हत्या, धारा 109 के तहत हत्या के प्रयास, धारा 118(1) के तहत खतरनाक हथियार से चोट पहुंचाने, धारा 61(2) के तहत आपराधिक साजिश और धारा 3(5) के तहत साझा मंशा से संबंधित प्रावधान लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त शस्त्र अधिनियम, 1959 की धाराएं 25 और 27 भी शामिल की गई हैं।
जांच के दौरान सीबीआई हत्या की परिस्थितियों, आरोपियों के आपसी संपर्क, संभावित साजिश और नशे की कथित बिक्री से जुड़े आरोपों की पड़ताल करेगी। इस काम में ड्रग कंट्रोल, फॉरेंसिक और जीएसटी विभाग के अधिकारियों की सहायता लिए जाने की बात भी सामने आई है।
घटनास्थल का स्वरूप बदलने से सबूत जुटाना बड़ी चुनौती
इस मामले में सीबीआई के सामने सबसे बड़ी मुश्किल घटनास्थल की वास्तविक स्थिति का पता लगाना है। 13 अक्तूबर को मानसा में एक मेडिकल स्टोर पर गोलीबारी के दौरान परविंदर सिंह झोटा की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने कथित मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार की दुकान में आग लगा दी। बाद में इस दुकान को गिरा दिया गया।
इस घटनाक्रम के कारण घटनास्थल का मूल स्वरूप बदल चुका है। जांच एजेंसी को अब उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों, वीडियो फुटेज, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक नमूनों के आधार पर वारदात की कड़ियां जोड़नी होंगी। घटनास्थल पर गोलीबारी के समय कौन-कौन मौजूद था, विवाद किस परिस्थिति में बढ़ा और आरोपियों की भूमिका क्या रही, इन सवालों के जवाब जुटाना जांच का अहम हिस्सा होगा।
सूत्रों के अनुसार, घटना का लाइव वीडियो भी जांच एजेंसी के कब्जे में लिया गया है। इस वीडियो की मदद से घटनाक्रम का क्रम समझने और गवाहों के बयानों से उसका मिलान करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आने तक किसी भी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम राय बनाना उचित नहीं होगा।
दुकान गिराए जाने को लेकर भी विवाद गहरा गया है। झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर का आरोप है कि परिवार ने आरोपी की दुकान को गिराने की मांग नहीं की थी। उनका कहना है कि दुकान गिराए जाने से मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नुकसान पहुंचा हो सकता है। यह भी जांच का विषय है कि दुकान गिराने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया और इससे उपलब्ध सबूतों पर क्या प्रभाव पड़ा।
परिवार और घायलों के बयान दर्ज, कॉल डिटेल भी खंगाली जा रही
सीबीआई की टीम ने बुधवार को झोटा के घर पहुंचकर उनके पिता भीम सिंह, पत्नी मनप्रीत कौर और परिवार के दूसरे सदस्यों से पूछताछ की। घटना में घायल हुए लोगों के बयान भी दर्ज किए गए। इसके अलावा घटनास्थल के आसपास मौजूद दुकानदारों और राहगीरों से जानकारी जुटाई गई, ताकि गोलीबारी से पहले और बाद की परिस्थितियों को समझा जा सके।
जांच अधिकारियों ने आरोपी अश्वनी कुमार के हथियार लाइसेंस, मेडिकल स्टोर के लाइसेंस और अन्य दस्तावेजों की भी पड़ताल शुरू की है। उसकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है, जिससे घटना से पहले और बाद में किए गए फोन कॉल के बारे में जानकारी मिल सके। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वारदात से पहले आरोपियों के बीच कोई बातचीत हुई थी या नहीं और क्या किसी अन्य व्यक्ति से भी उनका संपर्क था।
झोटा की ओर से कथित तौर पर नशे की बिक्री में शामिल केमिस्टों के खिलाफ जुटाई गई जानकारी और सबूत भी जांच एजेंसी ने अपने कब्जे में लिए हैं। इन तथ्यों का मिलान दूसरे साक्ष्यों के साथ किया जाएगा। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि हत्या के पीछे वास्तविक कारण क्या था और क्या इस घटना में मुख्य आरोपी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका रही है।
डीएसपी और ड्रग इंस्पेक्टर निलंबित, विभागीय भूमिका पर उठे सवाल
हत्याकांड के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मामले में पहले एसएचओ के निलंबन के बाद अब डीएसपी हरजिंदर सिंह गिल और ड्रग इंस्पेक्टर नरेश कुमार पर भी कार्रवाई की गई है। इन अधिकारियों के निलंबन को लेकर सामने आए घटनाक्रम के बीच संबंधित विभागों की जिम्मेदारी और कथित लापरवाही की जांच की मांग तेज हो गई है।
परिवार और आंदोलनकारियों की ओर से निलंबित अधिकारियों की संपत्ति की विजिलेंस जांच कराने की मांग भी उठाई गई है। बुधवार शाम गृह सचिव अपनीत कौर रिआत की अगुवाई में गृह विभाग, जिला प्रशासन और इंसाफ कमेटी के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई। बैठक में डीसी नवजोत कौर, कंवलजीत कौर बराड़ और डीआईजी हरजीत सिंह सहित संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में विभिन्न मांगों पर चर्चा की गई।
बैठक के दौरान घायलों का इलाज सरकारी खर्च पर कराने और प्रत्येक घायल को पांच लाख रुपये मुआवजा देने के संबंध में आश्वासन दिया गया। इसके अलावा निलंबित अधिकारियों की संपत्ति की विजिलेंस जांच, सील किए गए मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस रद्द करने और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
हालांकि, इन आश्वासनों के बावजूद आंदोलन पूरी तरह समाप्त होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। मुख्यमंत्री के इस्तीफे और डीजीपी की बर्खास्तगी की मांग पर सहमति नहीं बन पाई है। परिवार का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
पीजीआई चंडीगढ़ में विशेषज्ञ डॉक्टरों का पैनल करेगा पोस्टमार्टम
परविंदर सिंह झोटा के शव का पोस्टमार्टम चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) में विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैनल से कराने की बात कही गई है। मौत से संबंधित शुरुआती मजिस्ट्रेटी जांच की कार्रवाई भी चंडीगढ़ में कराए जाने की जानकारी सामने आई है।
लेकिन परिवार ने अभी तक पोस्टमार्टम के लिए अंतिम सहमति नहीं दी है। मनप्रीत कौर का कहना है कि यह निर्णय केवल परिवार के सदस्यों तक सीमित नहीं है। धरने में शामिल लोग और इंसाफ कमेटी भी न्याय की मांग को लेकर लगातार साथ खड़े हैं। इसलिए वह पोस्टमार्टम के विषय पर कोई फैसला लेने से पहले आंदोलनकारियों और कमेटी के सदस्यों की राय लेना चाहती हैं।
परिवार का कहना है कि यदि इंसाफ कमेटी और धरने में शामिल लोगों की सहमति बनती है, तभी वे पोस्टमार्टम के लिए आगे बढ़ेंगे। इसी कारण हत्या के नौ दिन बीतने के बाद भी शव का अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है।
परिवार ने झोटा के पुराने पुलिस मामलों की भी सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई है। प्रशासन की ओर से इस विषय पर आश्वासन दिए जाने की बात कही गई है। परिवार चाहता है कि पिछली घटनाओं और शिकायतों की भी निष्पक्ष जांच हो, ताकि किसी संभावित संबंध को नजरअंदाज न किया जाए।
आरोपी के संपर्कों और पुराने विवादों की भी पड़ताल
मामले में मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार के संपर्कों और आसपास के कुछ मेडिकल स्टोर संचालकों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के हवाले से कुछ ऐसे लोगों के भूमिगत होने की जानकारी सामने आई है, जिनके इस मामले से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े होने का संदेह जताया जा रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है और जांच एजेंसी की ओर से किसी निष्कर्ष की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2023 की एक घटना को लेकर कथित तौर पर कुछ लोग अश्वनी कुमार को ताने देते थे और वह इससे मानसिक तनाव में रहता था। इस पहलू का वर्तमान हत्याकांड से कोई संबंध है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। सीबीआई पुराने विवादों, संभावित कारणों और संबंधित व्यक्तियों के संपर्कों की जांच करके ही इस बारे में स्थिति स्पष्ट कर सकेगी।
अमित शाह की मुलाकात के बाद जांच में आई तेजी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के झोटा के परिवार से मिलने के करीब आठ घंटे बाद सीबीआई की टीम मानसा पहुंची थी। इसके बाद जांच अधिकारियों ने रिकॉर्ड जुटाने, परिवार के बयान दर्ज करने और घटनास्थल की जांच करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। परिवार को उम्मीद है कि केंद्रीय एजेंसी की जांच से मामले की सच्चाई सामने आएगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
प्रशासन की ओर से ख्याला में ट्रॉमा सेंटर बनाने अथवा नेहरू कॉलेज स्टेडियम का नाम झोटा के नाम पर रखने जैसे प्रस्तावों पर भी आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई है। पोस्टमार्टम, घायलों के मुआवजे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने जैसे मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा रहे।
फिलहाल इस पूरे मामले में दो मोर्चों पर घटनाक्रम आगे बढ़ रहा है। एक ओर सीबीआई उपलब्ध साक्ष्यों, फॉरेंसिक नमूनों, वीडियो और गवाहों के बयानों के आधार पर हत्या की गुत्थी सुलझाने में जुटी है। दूसरी ओर झोटा का परिवार और इंसाफ कमेटी अपनी मांगों को लेकर धरने पर कायम हैं। अब सबकी नजर जांच के अगले चरण, अधिकारियों की जवाबदेही और परिवार की पोस्टमार्टम संबंधी सहमति पर टिकी है।