भारतीय सिनेमा में जब भी बड़े बजट की फिल्मों और ऐतिहासिक कहानियों को पर्दे पर उतारने वाले निर्देशकों की बात होती है, तो नितेश तिवारी का नाम जरूर सामने आता है। उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए साबित किया है कि दर्शकों के दिलों तक पहुंचने के लिए सिर्फ बड़े सितारे और शानदार दृश्य ही काफी नहीं होते, बल्कि कहानी में भावनाओं और वास्तविकता का होना भी बेहद जरूरी है। बच्चों की दुनिया से लेकर पहलवानों के संघर्ष और युवाओं की दोस्ती तक, नितेश तिवारी ने अलग-अलग विषयों को अपनी फिल्मों का हिस्सा बनाया है। अब वह भारतीय संस्कृति की सबसे प्रतिष्ठित कथाओं में से एक रामायण को बड़े पर्दे पर पेश करने की तैयारी में जुटे हैं।
फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही काफी उत्सुकता है। इसकी वजह सिर्फ इसका विशाल स्तर और पौराणिक कहानी नहीं, बल्कि इससे जुड़े बड़े सितारे और फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी भी हैं। रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में नजर आएंगे, जबकि साई पल्लवी माता सीता का किरदार निभा रही हैं। नमित मल्होत्रा और यश इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट से बतौर निर्माता जुड़े हैं। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि आखिर नितेश तिवारी कौन हैं और उन्होंने अपने करियर में ऐसा क्या किया है, जिसकी वजह से उन्हें इस बड़े प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है?
‘रामायण’ से पहले छह फिल्मों का अनुभव
नितेश तिवारी के करियर की खास बात यह है कि उन्होंने बहुत ज्यादा फिल्में बनाने के बजाय अलग-अलग कहानियों और विषयों पर काम किया है। उनके निर्देशन में बनी फिल्मों की संख्या छह बताई जाती है और ‘रामायण’ उनके करियर की सातवीं फिल्म है। हालांकि, उनकी फिल्मोग्राफी में संख्या से ज्यादा महत्व उन कहानियों का है, जिन्होंने दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।
नितेश तिवारी ने ‘चिल्लर पार्टी’, ‘भूतनाथ रिटर्न्स’, ‘दंगल’, ‘छिछोरे’ और ‘बवाल’ जैसी फिल्मों के जरिए अपनी निर्देशन क्षमता दिखाई है। इन फिल्मों की कहानियां एक-दूसरे से काफी अलग रही हैं। कहीं बच्चों की मासूमियत और उनकी दुनिया दिखाई गई, तो कहीं खेल के मैदान में संघर्ष, कॉलेज की जिंदगी और रिश्तों की जटिलताओं को पर्दे पर उतारा गया।
यही विविधता उन्हें दूसरे निर्देशकों से अलग बनाती है। उन्होंने अपने करियर में किसी एक शैली तक खुद को सीमित नहीं रखा। उनकी फिल्मों में मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश और भावनात्मक जुड़ाव भी देखने को मिलता है। अब ‘रामायण’ के जरिए वह एक ऐसी कहानी पर काम कर रहे हैं, जिसका भारतीय समाज और संस्कृति में विशेष स्थान है।
मध्य प्रदेश से निकलकर फिल्मी दुनिया तक पहुंचे
नितेश तिवारी का फिल्मी सफर अचानक शुरू नहीं हुआ था। उनका शुरुआती जीवन और पढ़ाई फिल्म निर्माण से अलग क्षेत्र में रहा। वह मध्य प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने रचनात्मक दुनिया में अपनी पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए।
फिल्मों में आने से पहले उन्होंने विज्ञापन जगत में भी काम किया। यहां उन्हें कहानियों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने, सीमित समय में दर्शकों का ध्यान खींचने और किसी विचार को दिलचस्प अंदाज में पेश करने का अनुभव मिला। यह अनुभव आगे चलकर उनके फिल्मी करियर में उपयोगी साबित हुआ।
विज्ञापनों की दुनिया में काम करने के दौरान उन्होंने सीखा कि किसी भी कहानी को दर्शकों तक पहुंचाने के लिए उसकी प्रस्तुति कितनी महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, बड़े पर्दे पर काम करना एक अलग चुनौती थी। यहां किरदारों को विकसित करने, कहानी को आगे बढ़ाने और दर्शकों को शुरुआत से अंत तक जोड़े रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
नितेश तिवारी ने इसी चुनौती को स्वीकार किया और धीरे-धीरे फिल्म निर्देशन की ओर अपना कदम बढ़ाया। उनकी पहली फिल्म ने ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला दी।
‘चिल्लर पार्टी’ से शुरू हुई निर्देशन की पहचान
साल 2011 में रिलीज हुई फिल्म ‘चिल्लर पार्टी’ नितेश तिवारी के निर्देशन करियर का अहम पड़ाव बनी। बच्चों की जिंदगी और उनकी दोस्ती पर आधारित इस फिल्म ने मनोरंजन के साथ सामाजिक मुद्दे को भी सामने रखा। फिल्म की कहानी में बच्चों का एक समूह अपने आसपास होने वाली घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाता है।
इस फिल्म की खासियत यह थी कि बच्चों को केवल हास्य या मनोरंजन का साधन बनाकर नहीं दिखाया गया, बल्कि उनकी सोच, साहस और एकजुटता को भी महत्व दिया गया। कहानी ने यह संदेश दिया कि उम्र छोटी होने के बावजूद बच्चे समाज में बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं।
फिल्म के निर्माण से सलमान खान भी जुड़े थे। ‘चिल्लर पार्टी’ को दर्शकों और समीक्षकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली। इस फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में भी सम्मानित किया गया। इसे सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, जबकि इसकी पटकथा को भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ।
इस शुरुआती सफलता ने नितेश तिवारी को एक ऐसे फिल्मकार के रूप में पहचान दिलाई, जो बच्चों की दुनिया को संवेदनशीलता और समझदारी के साथ पर्दे पर उतार सकते हैं। पहली ही फिल्म से उन्हें यह साबित करने का अवसर मिला कि उनकी दिलचस्पी केवल व्यावसायिक मनोरंजन तक सीमित नहीं है।
‘भूतनाथ रिटर्न्स’ में दिखाई निर्देशन की दूसरी झलक
‘चिल्लर पार्टी’ के बाद नितेश तिवारी ने साल 2014 में ‘भूतनाथ रिटर्न्स’ का निर्देशन किया। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में थे। यह फिल्म लोकप्रिय किरदार भूतनाथ की कहानी को आगे बढ़ाती है, लेकिन इसके विषय में सामाजिक और राजनीतिक व्यंग्य का पहलू भी शामिल था।
फिल्म की कहानी के माध्यम से मतदान, नागरिक जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक व्यवस्था जैसे मुद्दों को मनोरंजक अंदाज में प्रस्तुत किया गया। इस प्रोजेक्ट ने नितेश तिवारी को एक अलग तरह की कहानी पर काम करने का मौका दिया।
पहली फिल्म में बच्चों की दोस्ती और सामाजिक बदलाव का विषय था, जबकि दूसरी फिल्म में हास्य के जरिए गंभीर सवाल उठाए गए। इन दोनों फिल्मों के बीच का अंतर दिखाता है कि नितेश तिवारी अपनी कहानियों के लिए अलग-अलग रास्ते चुनने से नहीं हिचकते थे।
हालांकि, उनके करियर में सबसे बड़ा बदलाव इसके बाद आया। साल 2016 में रिलीज हुई ‘दंगल’ ने उन्हें भारतीय सिनेमा के चर्चित निर्देशकों की कतार में पहुंचा दिया।
‘दंगल’ ने दुनियाभर में बनाया कमाई का रिकॉर्ड
नितेश तिवारी के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में आमिर खान अभिनीत ‘दंगल’ का नाम सबसे ऊपर आता है। साल 2016 में रिलीज हुई इस फिल्म ने भारतीय बॉक्स ऑफिस के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी असाधारण प्रदर्शन किया। फिल्म की दुनियाभर की कमाई 2,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है, जिसमें चीन के बाजार का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
‘दंगल’ की कहानी हरियाणा के पहलवान महावीर सिंह फोगाट और उनकी बेटियों गीता तथा बबीता फोगाट के जीवन से प्रेरित थी। फिल्म में दिखाया गया कि किस तरह एक पिता अपनी बेटियों को कुश्ती के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए सामाजिक धारणाओं और मुश्किल परिस्थितियों का सामना करता है।
फिल्म का विषय केवल खेल तक सीमित नहीं था। इसमें बेटियों की शिक्षा, महिलाओं की क्षमता, परिवार की उम्मीदों और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए किए जाने वाले संघर्ष को भी प्रमुखता से दिखाया गया।
आमिर खान ने महावीर सिंह फोगाट का किरदार निभाने के लिए अपने शारीरिक रूप में काफी बदलाव किया था। वहीं, फातिमा सना शेख और सान्या मल्होत्रा ने गीता और बबीता के किरदारों को पर्दे पर जीवंत किया।
फिल्म की सफलता के पीछे इसकी कहानी, कलाकारों का अभिनय, संगीत और निर्देशन सभी का योगदान था। नितेश तिवारी ने खेल के दृश्यों के साथ परिवार के भावनात्मक पहलुओं को इस तरह जोड़ा कि दर्शक कहानी से जुड़ सके।
‘दंगल’ की अंतरराष्ट्रीय सफलता ने यह भी दिखाया कि स्थानीय परिवेश में स्थापित कहानी दुनिया के अलग-अलग देशों के दर्शकों को प्रभावित कर सकती है। चीन में फिल्म की लोकप्रियता ने इसकी कमाई को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। इसके बाद नितेश तिवारी का नाम बड़े पैमाने पर फिल्में बनाने में सक्षम निर्देशकों के बीच गिना जाने लगा।
‘छिछोरे’ से राष्ट्रीय पुरस्कार तक का सफर
‘दंगल’ के बाद नितेश तिवारी ने साल 2019 में ‘छिछोरे’ का निर्देशन किया। सुशांत सिंह राजपूत, श्रद्धा कपूर और अन्य कलाकारों से सजी यह फिल्म कॉलेज की जिंदगी, दोस्ती, असफलता और मानसिक दबाव जैसे विषयों पर आधारित थी।
फिल्म में कॉलेज के दिनों की यादों के साथ यह महत्वपूर्ण संदेश दिया गया कि जीवन में असफल होना किसी व्यक्ति को नाकाम नहीं बनाता। परीक्षा या प्रतियोगिता में मिलने वाली हार जिंदगी का अंतिम फैसला नहीं होती। यह संदेश खास तौर पर युवाओं के लिए महत्वपूर्ण था।
‘छिछोरे’ को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा प्रदर्शन किया। इसे सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इस उपलब्धि ने नितेश तिवारी की प्रतिष्ठा को और मजबूत किया।
इसके बाद उन्होंने वरुण धवन और जाह्नवी कपूर अभिनीत ‘बवाल’ का निर्देशन किया, जो साल 2023 में रिलीज हुई। इस फिल्म में रिश्तों, व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और ऐतिहासिक त्रासदी से जुड़े पहलुओं को एक अलग अंदाज में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई।
इन फिल्मों से साफ हुआ कि नितेश तिवारी ऐसी कहानियों में दिलचस्पी रखते हैं, जिनमें मनोरंजन के साथ कोई विचार या भावनात्मक पहलू भी मौजूद हो।
पत्नी अश्विनी अय्यर तिवारी भी हैं फिल्म निर्देशक
नितेश तिवारी की निजी जिंदगी का एक दिलचस्प पहलू यह है कि उनकी पत्नी अश्विनी अय्यर तिवारी भी फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने भी हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई है।
अश्विनी अय्यर तिवारी की फिल्मों में ‘निल बट्टे सन्नाटा’, ‘बरेली की बर्फी’ और ‘पंगा’ जैसी फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों में महिलाओं के जीवन, परिवार, रिश्तों और व्यक्तिगत सपनों को प्रमुखता दी गई।
‘निल बट्टे सन्नाटा’ में एक मां और उसकी बेटी की कहानी के जरिए शिक्षा तथा महत्वाकांक्षाओं का विषय उठाया गया। वहीं, ‘बरेली की बर्फी’ ने छोटे शहर की जिंदगी और रिश्तों को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किया। ‘पंगा’ में एक महिला कबड्डी खिलाड़ी के दोबारा खेल में वापसी करने के संघर्ष को दिखाया गया।
इस तरह दोनों पति-पत्नी फिल्म निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं और अलग-अलग विषयों के जरिए दर्शकों तक अपनी कहानियां पहुंचाते रहे हैं।
‘रामायण’ क्यों है नितेश तिवारी के लिए बड़ी चुनौती?
नितेश तिवारी के सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक ‘रामायण’ है। इसकी वजह यह है कि रामायण केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, सांस्कृतिक विरासत और भावनाओं से जुड़ा विषय है।
फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता की भूमिका में नजर आएंगी। इस प्रोजेक्ट से यश भी जुड़े हैं, जबकि नमित मल्होत्रा इसके निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है और दर्शकों को इससे काफी उम्मीदें हैं।
नितेश तिवारी के सामने सबसे महत्वपूर्ण काम इस प्राचीन कथा को आधुनिक सिनेमाई तकनीक के साथ प्रस्तुत करना है, जबकि इसके मूल भाव और सांस्कृतिक महत्व का सम्मान भी बनाए रखना है। दर्शक भव्य दृश्य, प्रभावशाली कलाकार और शानदार तकनीक देखना चाहेंगे, लेकिन उनके लिए कहानी की भावनात्मक विश्वसनीयता भी उतनी ही जरूरी होगी।
‘दंगल’ जैसी फिल्म से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने वाले नितेश तिवारी के पास बड़े प्रोजेक्ट को संभालने का अनुभव जरूर है। हालांकि, ‘रामायण’ का पैमाना और उससे जुड़ी अपेक्षाएं बिल्कुल अलग हैं।
अब देखना दिलचस्प होगा कि बच्चों की छोटी-सी दुनिया से शुरुआत करने वाला यह निर्देशक भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित पौराणिक कहानियों में से एक को किस अंदाज में पर्दे पर उतारता है। ‘रामायण’ नितेश तिवारी के करियर की सातवीं फिल्म है, लेकिन इसके साथ उनका नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नए अध्याय से जुड़ सकता है।