पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियां धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं। राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं और इसी के साथ कुछ पुराने राजनीतिक चेहरे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया भी इन्हीं नामों में शामिल हैं। पिछले करीब एक दशक से उनका राजनीतिक सफर कानूनी विवादों, जांच एजेंसियों की कार्रवाई और सियासी आरोप-प्रत्यारोप के बीच आगे बढ़ता रहा है। अब चुनाव से कुछ महीने पहले उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में दाखिल हुए नए पूरक आरोप पत्र ने पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
मजीठिया का मामला केवल एक नेता के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी ने उन्हें अकाली दल के खिलाफ अपने राजनीतिक हमलों का प्रमुख आधार बनाया है। 2017 में नशे के मुद्दे पर शुरू हुई राजनीतिक लड़ाई 2022 तक गिरफ्तारी और जेल पहुंचने की स्थिति में बदल गई। इसके बाद 2025 में आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आया और अब 2027 के चुनाव से पहले जांच एजेंसी ने एक और पूरक आरोप पत्र अदालत में पेश कर दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले चुनाव में मजीठिया एक बार फिर पंजाब की सियासत के प्रमुख मुद्दों में शामिल होंगे?
2017 में नशे के आरोपों से शुरू हुई राजनीतिक लड़ाई
बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ राजनीतिक विवाद को समझने के लिए 2017 के विधानसभा चुनावों के दौर में जाना जरूरी है। उस समय पंजाब में नशे की समस्या चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरी हुई थी। आम आदमी पार्टी ने तत्कालीन अकाली दल सरकार और उसके नेताओं पर इस समस्या को लेकर लगातार सवाल उठाए थे। पार्टी के निशाने पर मजीठिया भी थे। उन पर नशा तस्करी से जुड़े लोगों के साथ कथित संबंध होने के आरोप लगाए गए थे।
आम आदमी पार्टी के नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान मजीठिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और उन्हें जेल भेजने तक की बात कही थी। इस मुद्दे ने चुनावी माहौल में काफी चर्चा बटोरी। हालांकि, मजीठिया ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाया।
उन्होंने आम आदमी पार्टी के तत्कालीन प्रमुख अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। इस मामले में मार्च 2018 में केजरीवाल ने मजीठिया से माफी मांग ली थी। इसके बावजूद नशे से संबंधित आरोपों की जांच का सिलसिला समाप्त नहीं हुआ। राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ यह मामला कानूनी प्रक्रिया में भी आगे बढ़ता रहा।
2022 के चुनाव से पहले दर्ज हुई FIR, फिर जेल पहुंचे मजीठिया
2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले मजीठिया के खिलाफ चल रही जांच ने नया मोड़ ले लिया। 20 दिसंबर 2021 को मोहाली में उनके खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद उनकी मुश्किलें बढ़ने लगीं। उस समय पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता में थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मजीठिया को अदालत में आत्मसमर्पण करना पड़ा। उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद उन्होंने 24 फरवरी 2022 को मोहाली की विशेष अदालत में सरेंडर किया। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में पटियाला जेल भेज दिया गया।
इस घटनाक्रम का असर विधानसभा चुनावों के माहौल पर भी पड़ा। आम आदमी पार्टी ने इसे अपने पुराने आरोपों और चुनावी वादों से जोड़कर पेश किया। वहीं अकाली दल ने अपने नेता के खिलाफ हो रही कार्रवाई को राजनीतिक नजरिये से देखा। मजीठिया के लिए यह समय राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर चुनौतीपूर्ण रहा।
करीब साढ़े पांच महीने जेल में रहने के बाद 10 अगस्त 2022 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी। इसके बाद उन्हें जेल से बाहर आने का मौका मिला। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ मामले का समाप्त होना नहीं था। उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी रही।
राजनीतिक मोर्चे पर भी 2022 का चुनाव मजीठिया के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। उन्होंने अमृतसर पूर्वी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। इस सीट पर उनका मुकाबला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नवजोत सिंह सिद्धू से हुआ। चुनाव परिणाम में मजीठिया को हार का सामना करना पड़ा। इस तरह 2022 का विधानसभा चुनाव उनके लिए दोहरी चुनौती लेकर आया। एक तरफ कानूनी विवाद और दूसरी तरफ चुनावी हार।
AAP सरकार आने के बाद भी जारी रही जांच
2022 में पंजाब की सत्ता बदलने के बाद आम आदमी पार्टी की सरकार बनी। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में नई सरकार ने पिछली सरकारों के कार्यकाल से जुड़े कई मामलों को लेकर जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। मजीठिया के खिलाफ नशा तस्करी से संबंधित मामला भी जांच के दायरे में बना रहा।
हालांकि, इस दौरान उनके खिलाफ एक नया कानूनी मोर्चा भी खुल गया। इस बार मामला कथित आय से अधिक संपत्ति से जुड़ा था। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने मजीठिया की संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन और उनसे जुड़े विभिन्न कारोबारी खातों की जांच शुरू की।
25 जून 2025 को विजिलेंस ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में मजीठिया को गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसी का दावा था कि जांच के दौरान करीब 540 करोड़ रुपये के कथित अवैध धन का पता चला है। एजेंसी ने इस मामले में संपत्तियों और पैसों के लेन-देन से जुड़े कई पहलुओं की पड़ताल की।
इस कार्रवाई के बाद मजीठिया एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में आ गए। अकाली दल ने उनके खिलाफ कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया, जबकि सरकार और जांच एजेंसी की ओर से मामले को वित्तीय अनियमितताओं की जांच से जोड़कर देखा गया।
40 हजार पन्नों की चार्जशीट में संपत्तियों और लेन-देन का विवरण
आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ दस्तावेजों का आकार भी काफी बड़ा होता चला गया। 22 अगस्त 2025 को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने मोहाली की विशेष अदालत में करीब 40 हजार पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया।
इस आरोप पत्र में लगभग 700 करोड़ रुपये की संपत्तियों और कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित जानकारियों का विवरण शामिल किया गया था। जांच एजेंसी ने अपनी पड़ताल में अलग-अलग संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन और आर्थिक गतिविधियों को आधार बनाया।
इतने बड़े दस्तावेजी रिकॉर्ड के साथ मामला पंजाब के चर्चित राजनीतिक और कानूनी मामलों में शामिल हो गया। मजीठिया की ओर से लगातार आरोपों को खारिज किया जाता रहा। उनका कहना है कि सरकार राजनीतिक विरोध के चलते उन्हें निशाना बना रही है।
इस मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम 2 फरवरी 2026 को सामने आया, जब उच्चतम न्यायालय ने मजीठिया को जमानत दे दी। इससे उन्हें जेल से बाहर आने का रास्ता मिला। हालांकि, अदालत से जमानत मिलने के बाद भी आय से अधिक संपत्ति से जुड़े आरोपों पर अंतिम निर्णय नहीं आया। जांच और न्यायिक प्रक्रिया अपनी जगह जारी रही।
2027 के चुनाव से पहले फिर बढ़ी कानूनी मुश्किलें
अब पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ मजीठिया से जुड़ा मामला फिर सुर्खियों में है। 28 अक्टूबर 2026 को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति मामले में अदालत के सामने पूरक आरोप पत्र दाखिल किया। इस नए दस्तावेज में कथित तौर पर करीब 736 करोड़ रुपये की संपत्ति और वित्तीय लेन-देन का विवरण शामिल किया गया है।
जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए पूरक आरोप पत्र में कई तरह के वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठाए गए हैं। इसमें करीब 161 करोड़ रुपये के कथित बेहिसाब नकद जमा का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा लगभग 141 करोड़ रुपये के विदेशी लेन-देन को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
विजिलेंस के मुताबिक, विभिन्न कंपनियों के बैंक खातों में करीब 236 करोड़ रुपये की ऐसी जमा राशि का विवरण भी सामने आया है, जिसके स्रोत और वित्तीय प्रकृति को लेकर एजेंसी ने सवाल उठाए हैं। इन लेन-देन और संपत्तियों के आधार पर जांच एजेंसी ने अपनी जांच का दायरा आगे बढ़ाया है।
नए पूरक आरोप पत्र के बाद इस मामले से संबंधित दस्तावेजों की कुल संख्या भी काफी बढ़ गई है। बताया गया है कि अब तक दाखिल किए गए दस्तावेजों का आकार लगभग 52 से 53 हजार पन्नों तक पहुंच चुका है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विजिलेंस ब्यूरो ने मामले में कितने बड़े स्तर पर दस्तावेजी जांच की है।
हालांकि, जांच एजेंसी की ओर से लगाए गए आरोपों को अदालत का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। इन आरोपों की सत्यता और उनसे जुड़े तथ्यों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
मजीठिया का जवाब: राजनीतिक प्रतिशोध का लगाया आरोप
दूसरी ओर बिक्रम सिंह मजीठिया लगातार अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत बताते रहे हैं। उनका कहना है कि पंजाब सरकार राजनीतिक विरोध के कारण उन्हें निशाना बना रही है। उनके मुताबिक, चुनाव से पहले उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को तेज करना राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
अकाली दल भी इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक लड़ाई के रूप में पेश करता रहा है। पार्टी के लिए मजीठिया एक महत्वपूर्ण नेता हैं और उनके खिलाफ होने वाली कार्रवाई का असर पार्टी की राजनीतिक रणनीति पर भी पड़ सकता है।
यहां एक बात महत्वपूर्ण है कि मजीठिया के खिलाफ अलग-अलग समय पर सामने आए मामले कानूनी रूप से अपने-अपने स्तर पर चल रहे हैं। नशा तस्करी से संबंधित मामला और आय से अधिक संपत्ति की जांच अलग-अलग आरोपों और कानूनी पहलुओं से जुड़े हैं। इसलिए इन सभी घटनाओं को एक ही मामले का हिस्सा मानना सही नहीं होगा।
क्या 2027 में फिर चुनावी मुद्दा बनेंगे मजीठिया?
पंजाब की राजनीति में 2027 का विधानसभा चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण होने वाला है। आम आदमी पार्टी जहां अपनी सरकार के कामकाज के आधार पर जनता के बीच जाएगी, वहीं अकाली दल अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश करेगा। कांग्रेस और भाजपा भी चुनावी मुकाबले में अपनी जगह बनाने के लिए रणनीति तैयार कर रही हैं।
ऐसे माहौल में मजीठिया का नाम एक बार फिर चर्चा में आना स्वाभाविक है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने उनके खिलाफ लगे आरोपों को अकाली दल पर राजनीतिक हमला करने के लिए इस्तेमाल किया था। 2017 में नशे का मुद्दा प्रमुख था, जबकि 2022 में गिरफ्तारी और जेल जाने का घटनाक्रम भी चुनावी बहस का हिस्सा बना।
अब 2027 के चुनाव से पहले आय से अधिक संपत्ति मामले में दाखिल पूरक आरोप पत्र ने इस मुद्दे को फिर ताजा कर दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आम आदमी पार्टी इस मामले को चुनाव प्रचार में किस तरह उठाती है और अकाली दल इसका राजनीतिक जवाब कैसे देता है।
मजीठिया के लिए भी यह चुनाव आसान नहीं रहने वाला है। उन्हें एक तरफ अपनी राजनीतिक भूमिका बनाए रखनी होगी, वहीं दूसरी तरफ अदालत में चल रहे मामलों का सामना करना होगा। उनके खिलाफ लगे आरोपों पर अंतिम फैसला आना अभी बाकी है। ऐसे में पंजाब की राजनीति में उनकी आगे की भूमिका काफी हद तक आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
पिछले दस वर्षों का घटनाक्रम बताता है कि बिक्रम सिंह मजीठिया का नाम पंजाब की चुनावी राजनीति से अलग नहीं रहा है। हर चुनाव से पहले उनके खिलाफ पुराने आरोप और नई कानूनी कार्रवाई चर्चा का विषय बनती रही है। अब 2027 के चुनाव से पहले एक बार फिर वही स्थिति बनती दिखाई दे रही है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि मजीठिया को कानूनी मामलों में आगे क्या राहत मिलेगी, बल्कि यह भी है कि उनकी कानूनी लड़ाई आने वाले विधानसभा चुनाव में पंजाब के राजनीतिक समीकरणों को कितना प्रभावित करेगी।