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Navratri Day 2: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मिलता है तप और ज्ञान का वरदान, जानिए शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र

चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन देवी दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की आराधना की जाती है। यह दिन विशेष रूप से तप, संयम और आत्मबल को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन से माता की पूजा करते हैं, उन्हें मनचाहा फल और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

इस बार नवरात्रि का दूसरा दिन बेहद शुभ संयोग लेकर आया है। पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है, जो सुबह 6:25 बजे से रात 2:27 बजे तक रहेगा। इन शुभ योगों में किए गए कार्य सफलता दिलाने वाले माने जाते हैं, जबकि राहुकाल में किसी भी नए कार्य से बचना चाहिए।

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप साधना और त्याग का प्रतीक है। उनके नाम में ‘ब्रह्म’ का अर्थ तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ उसका पालन करने वाली से है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था, इसलिए यह स्वरूप अत्यंत प्रेरणादायक माना जाता है।

पूजा की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने से करनी चाहिए। इसके बाद शांत मन से माता का ध्यान करते हुए उन्हें चंदन, फूल, अक्षत, रोली और धूप अर्पित करें। देवी को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से स्नान कराना भी शुभ माना जाता है। पूजा के अंत में पान, सुपारी और लौंग अर्पित करने की परंपरा है। इस दिन मां को शक्कर या गुड़ का भोग लगाना विशेष फलदायी माना गया है। ऐसा करने से लंबी आयु और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

मंत्र जाप का भी इस दिन खास महत्व होता है। “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः” मंत्र का जाप करने से मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। साथ ही ध्यान मंत्र का उच्चारण करने से साधक को आध्यात्मिक लाभ मिलता है। आरती करते समय कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। देवी की आरती 14 बार उतारी जाती है—4 बार चरणों से, 2 बार नाभि से, 1 बार मुख से और 7 बार पूरे शरीर से। आरती की बत्तियां हमेशा विषम संख्या (1, 5 या 7) में ही होनी चाहिए।

इस प्रकार नवरात्रि का दूसरा दिन भक्तों के लिए साधना, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का विशेष अवसर होता है।