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PM के हाथों शुरू हुई सड़क परियोजनाओं की 6 महीने होगी कड़ी निगरानी, NHAI ने बदले नियम

राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से जुड़ी परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला किया है। खासतौर पर उन परियोजनाओं को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनका उद्घाटन या लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों किया जाता है। अब ऐसी परियोजनाओं के सड़क पर यातायात शुरू होने के बाद शुरुआती छह महीनों तक नियमित और निर्धारित अंतराल पर निरीक्षण किया जाएगा।

NHAI की ओर से मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP में किए गए बदलाव का मकसद नई सड़क परियोजनाओं में शुरुआती दौर में सामने आने वाली कमियों को तुरंत पकड़ना और उनका समय रहते समाधान कराना है। नए प्रावधानों के मुताबिक परियोजना शुरू होने के बाद पहले तीन महीनों को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। इस दौरान संबंधित सड़क खंड का हर सप्ताह निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद अगले तीन महीनों तक हर पंद्रह दिन में जांच की व्यवस्था रहेगी।

छोटी कमी भी अब नजरअंदाज नहीं होगी

नई व्यवस्था के तहत केवल सड़क की ऊपरी सतह को ही जांच के दायरे में नहीं रखा गया है। निरीक्षण के दौरान सड़क की राइडिंग क्वालिटी, पेवमेंट की स्थिति, जल निकासी की व्यवस्था, सड़क सुरक्षा से जुड़े इंतजाम और तटबंध की ढाल समेत कई पहलुओं को देखा जाएगा।

इसके लिए कंसेसनेयर की ओर से नियुक्त संबंधित परियोजना प्रबंधक और अथॉरिटी इंजीनियर या इंडिपेंडेंट इंजीनियर की टीम के लीडर को संयुक्त रूप से निरीक्षण करना होगा। यानी निर्माण या संचालन से जुड़ी एजेंसी और निगरानी करने वाली टीम दोनों मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि परियोजना का प्रदर्शन तय मानकों के अनुरूप है।

NHAI का मानना है कि नई सड़क परियोजनाओं में शुरुआती महीनों के दौरान सामने आने वाली खामियों को समय रहते ठीक किया जाना जरूरी है। अगर किसी खराबी को शुरुआती स्तर पर ही पहचान लिया जाए तो उसे बड़े नुकसान में बदलने से पहले नियंत्रित किया जा सकता है।

पेट्रोलिंग वाहनों की भी बढ़ेगी भूमिका

नई SOP में राजमार्गों की नियमित पेट्रोलिंग को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। सड़क पर यातायात शुरू होने के बाद रूट पेट्रोलिंग वाहन लगातार निगरानी करते हुए संबंधित मार्ग पर गश्त करेंगे। इस दौरान यदि सड़क पर कोई खराबी, टूट-फूट या संभावित समस्या दिखाई देती है तो उसे दर्ज किया जाएगा।

खास बात यह है कि अब केवल समस्या की सूचना देना ही पर्याप्त नहीं होगा। सामने आई कमी या संभावित क्षति को जियो-टैग किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट रूप से पता लगाया जा सकेगा कि खराबी सड़क के किस स्थान पर है। इसके बाद परियोजना निदेशक, कंसेसनेयर और अथॉरिटी इंजीनियर या इंडिपेंडेंट इंजीनियर को इसकी जानकारी दी जाएगी।

संबंधित प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट की जिम्मेदारी होगी कि चिन्हित समस्या के समाधान की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। यानी नई व्यवस्था में समस्या की पहचान से लेकर उसके सुधार तक जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया गया है।

प्रधानमंत्री से जुड़ी परियोजनाओं पर क्यों बढ़ा फोकस?

किसी बड़े एक्सप्रेसवे या राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण पूरा होने के बाद उसके उद्घाटन को आमतौर पर बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया जाता है। खासकर जब किसी परियोजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री के हाथों होता है तो उस परियोजना की सार्वजनिक चर्चा और राजनीतिक महत्व दोनों बढ़ जाते हैं।

ऐसे में यदि यातायात शुरू होने के कुछ ही समय बाद सड़क पर दरार, जल निकासी की समस्या या निर्माण संबंधी कोई दूसरी कमी दिखाई देती है तो वह सामान्य तकनीकी समस्या तक सीमित नहीं रहती। सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर भी इसको लेकर चर्चा शुरू हो जाती है।

हाल के कुछ मामलों के बाद NHAI ने इस पहलू को गंभीरता से लिया है। इस वर्ष अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया था। इसके कुछ हिस्सों में लगभग तीन महीने के भीतर दरारें सामने आने की खबरें आईं। इसके अलावा गंगा एक्सप्रेसवे समेत कुछ अन्य परियोजनाओं में सामने आई कमियों को लेकर भी चर्चा हुई।

इन घटनाओं ने निर्माण की गुणवत्ता और उद्घाटन के बाद निगरानी की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। राजनीतिक दलों की ओर से भी इन मामलों पर प्रतिक्रिया दी गई। इसके बाद NHAI ने SOP में अतिरिक्त प्रावधान शामिल करते हुए उद्घाटन के बाद परियोजनाओं की निगरानी को ज्यादा व्यवस्थित करने का फैसला किया है।

पहले से थी SOP, लेकिन निगरानी का अलग प्रावधान नहीं

NHAI की परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास से संबंधित दिशा-निर्देश पहले से मौजूद हैं। प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण को लेकर भी एक निर्धारित SOP तैयार की गई थी।

NHAI के पोर्टल पर उपलब्ध सर्कुलर के अनुसार प्रधानमंत्री के हाथों परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास से संबंधित SOP पांच अप्रैल 2023 को तैयार की गई थी। समय के साथ इसमें आवश्यक बदलाव किए गए। इसके बाद अक्टूबर 2023 के अलावा वर्ष 2024 और 2025 में भी दिशा-निर्देशों में संशोधन किए गए।

हालांकि पहले जारी किए गए इन निर्देशों में उद्घाटन के बाद परियोजना की छह महीने तक विशेष निगरानी का स्पष्ट प्रावधान नहीं था। अब नए दिशा-निर्देशों में इस पहलू को प्रमुखता दी गई है।

NHAI ने बदलाव के पीछे हालिया उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रमों से मिले अनुभवों को आधार बताया है। नए निर्देशों में यह संकेत दिया गया है कि पिछले आयोजनों के दौरान सामने आई परिस्थितियों और उनसे मिली सीख के आधार पर अतिरिक्त प्रावधान जोड़े गए हैं।

पहले तीन महीने सबसे अहम

नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शुरुआती तीन महीनों की साप्ताहिक निगरानी है। इसका मतलब यह है कि सड़क पर यातायात शुरू होने के बाद संबंधित अधिकारी और विशेषज्ञ हर सप्ताह परियोजना का निरीक्षण करेंगे।

इस अवधि में सड़क की सतह पर किसी भी तरह की असामान्यता, दरार, खराब राइडिंग क्वालिटी, जलभराव या ड्रेनेज से जुड़ी समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा। सड़क सुरक्षा से जुड़े उपकरण और अन्य आवश्यक प्रतिष्ठानों की स्थिति भी जांची जाएगी।

इसके बाद चौथे से छठे महीने तक निरीक्षण की आवृत्ति हर पंद्रह दिन होगी। इस तरह परियोजना के संचालन के शुरुआती छह महीनों में लगातार निगरानी बनी रहेगी।

यह व्यवस्था खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई सड़क के वास्तविक प्रदर्शन का पता उस समय चलता है जब उस पर नियमित यातायात शुरू होता है। निर्माण पूरा होने और सड़क के उद्घाटन से पहले सभी स्थितियों का वास्तविक आकलन संभव नहीं होता।

बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए स्वतंत्र ऑडिट का विकल्प

NHAI ने केवल उद्घाटन के बाद निगरानी बढ़ाने की बात नहीं कही है, बल्कि कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट का रास्ता भी सुझाया है।

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार उद्घाटन के लिए चिन्हित महत्वपूर्ण परियोजनाओं और कॉरिडोर की स्वतंत्र जांच कराई जा सकती है। इनमें ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, हाई-स्पीड कॉरिडोर और अन्य विशिष्ट परियोजनाएं शामिल हो सकती हैं।

इसके अलावा 2,500 करोड़ रुपये से अधिक की कुल पूंजीगत लागत वाली परियोजनाओं के लिए भी स्वतंत्र ऑडिट का विकल्प रखा गया है। इसका उद्देश्य यह देखना होगा कि यातायात शुरू होने के बाद सड़क किस तरह का प्रदर्शन करेगी और किन संभावित परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

IIT और NIT जैसे संस्थानों से जांच कराने का सुझाव

स्वतंत्र ऑडिट के लिए प्रतिष्ठित तीसरे पक्ष की संस्थाओं की मदद लेने का सुझाव दिया गया है। इसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जैसे तकनीकी संस्थानों को शामिल किया जा सकता है।

ऐसी जांच में संभावित यातायात भार, जल निकासी और अन्य तकनीकी पहलुओं का अध्ययन किया जा सकता है। इससे परियोजना के संचालन में आने वाली संभावित समस्याओं का पहले ही आकलन करने में मदद मिल सकती है।

विशेष रूप से बड़े एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर पर यातायात का दबाव अधिक होता है। ऐसे में सड़क की डिजाइन, निर्माण गुणवत्ता, ड्रेनेज और सुरक्षा व्यवस्था का वास्तविक परिस्थितियों में प्रदर्शन महत्वपूर्ण हो जाता है।

जिम्मेदारी तय करने पर जोर

नई SOP का एक अहम पहलू यह भी है कि समस्या सामने आने के बाद सूचना और सुधार की जिम्मेदारी अलग-अलग स्तरों पर तय की गई है। पेट्रोलिंग के दौरान किसी कमी की पहचान होने पर उसे जियो-टैग करके संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी जाएगी।

इसके बाद प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट को यह सुनिश्चित करना होगा कि आवश्यक सुधार समय पर पूरा हो। इस व्यवस्था से किसी समस्या के सामने आने के बाद जिम्मेदारी एक विभाग से दूसरे विभाग पर डालने की संभावना कम करने की कोशिश की गई है।

कुल मिलाकर NHAI का नया कदम उद्घाटन के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। अब प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटित परियोजनाओं के लिए शुरुआती छह महीने केवल संचालन की अवधि नहीं होंगे, बल्कि नियमित तकनीकी निरीक्षण और त्वरित सुधार का चरण भी होंगे। इससे उम्मीद है कि नई परियोजनाओं में शुरुआती स्तर पर सामने आने वाली कमियों को समय रहते दूर किया जा सकेगा और बड़े एक्सप्रेसवे व हाईवे की गुणवत्ता को लेकर भरोसा मजबूत होगा।