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PoK में 9 जून को बड़े बंद की तैयारी, पाकिस्तान सरकार के खिलाफ उबाल; इंटरनेट सेवाएं रोकी गईं

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में राजनीतिक और सामाजिक असंतोष एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने अपनी 38 सूत्रीय मांगों को लेकर 9 जून को व्यापक बंद और विरोध कार्यक्रम की घोषणा की है। इस ऐलान के बाद पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बन गया है और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

मुजफ्फराबाद समझौते को लेकर बढ़ी नाराजगी

स्थानीय संगठनों का आरोप है कि पिछले वर्ष अक्टूबर में हुए मुजफ्फराबाद समझौते की कई महत्वपूर्ण शर्तें अब तक लागू नहीं की गई हैं। लोगों का कहना है कि स्वायत्तता से जुड़े मुद्दों, शरणार्थी सीटों और प्रशासनिक सुधारों पर पाकिस्तान सरकार ने अपने वादे पूरे नहीं किए, जिससे जनता में असंतोष बढ़ा है।

JAAC ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

कमेटी ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। संगठन ने शटर डाउन हड़ताल, चक्का जाम, लंबा मार्च और अनिश्चितकालीन धरने जैसे कदम उठाने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यह संघर्ष क्षेत्र के लोगों के अधिकारों और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए किया जा रहा है।

बंद से पहले ही शुरू हुए विरोध प्रदर्शन

9 जून के प्रस्तावित बंद से पहले ही PoK के कई इलाकों में प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं। रिपोर्टों के अनुसार, रावलकोट क्षेत्र में एक प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। इस दौरान JAAC के एक वरिष्ठ सदस्य शाहजैब हबीब की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं।

सुरक्षा बढ़ी, इंटरनेट और संचार सेवाओं पर रोक

बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रशासन ने कई इलाकों में इंटरनेट और दूरसंचार सेवाएं बंद कर दी हैं। साथ ही मुजफ्फराबाद समेत प्रमुख शहरों में अतिरिक्त पुलिस बल और रेंजर्स की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

JAAC पर लगा प्रतिबंध

पाकिस्तानी प्रशासन ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया है। अधिकारियों का आरोप है कि यह संगठन सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है और लोगों में असुरक्षा तथा तनाव का माहौल पैदा कर रहा है। हालांकि JAAC इन आरोपों को खारिज करते हुए सरकार पर आंदोलन को दबाने का आरोप लगा रही है।

38 सूत्रीय चार्टर में क्या हैं प्रमुख मांगें?

कमेटी द्वारा जारी मांगपत्र में महंगाई नियंत्रण, आटे पर सब्सिडी की बहाली, विवादित करों को वापस लेने, सरकारी अधिकारियों को मिलने वाली विशेष सुविधाएं समाप्त करने और पाकिस्तान की संघीय नौकरियों में कश्मीरियों के लिए आरक्षण जैसी मांगें शामिल हैं। इसके अलावा व्यापारियों को राहत पैकेज, टोल प्लाजा हटाने, छात्रों के लिए हॉस्टल निर्माण और स्थानीय संसाधनों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए हैं।

लंबे आंदोलन के लिए लोगों को तैयार रहने की अपील

JAAC ने लोगों से आवश्यक सामान पहले से जमा करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन लंबा चल सकता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों के समाधान तक क्षेत्र में किसी भी राजनीतिक चुनावी गतिविधि को अनुमति नहीं दी जाएगी।

अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हस्तक्षेप की मांग

संगठन के नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संस्थाओं से PoK की स्थिति पर ध्यान देने की अपील की है। उनका आरोप है कि पिछले कई महीनों से शांतिपूर्ण आंदोलन को बल प्रयोग, गिरफ्तारियों और संचार प्रतिबंधों के जरिए दबाने की कोशिश की जा रही है, जिससे क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।