अंबाला के ऐतिहासिक गुरुद्वारा पंजोखरा साहिब में गुरुवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब इंटरनेशनल एंटी-खालिस्तानी टेररिस्ट फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरसिमरन सिंह मंड और उनके बेटे के साथ कथित तौर पर मारपीट की घटना सामने आई। विवाद इतना बढ़ गया कि मौके पर मौजूद पुलिस और सीआईडी के कर्मचारियों को भी स्थिति संभालने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। घटनाक्रम के दौरान गुरसिमरन सिंह मंड, उनके बेटे भवजोत सिंह और तीन पुलिसकर्मियों सहित कुल छह लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
घटना के बाद पुलिस ने गुरुद्वारा परिसर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को खंगाला जा रहा है।
गुरुद्वारे में पहुंचने के बाद शुरू हुआ विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरसिमरन सिंह मंड अपने बेटे भवजोत सिंह के साथ गुरुद्वारा पंजोखरा साहिब में माथा टेकने पहुंचे थे। मंड के मुताबिक, जैसे ही वह गुरुद्वारा परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार की ओर बढ़े, वहां मौजूद कुछ निहंगों ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद उनके और वहां मौजूद लोगों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।
मंड का दावा है कि शुरुआती बहस कुछ ही देर में विवाद में बदल गई। उनके अनुसार, वहां मौजूद लोगों ने उनके साथ कथित तौर पर डंडों और तेजधार हथियारों से हमला कर दिया। स्थिति बिगड़ने के बाद उन्होंने वहां से निकलने की कोशिश की, लेकिन मामला परिसर के बाहर तक पहुंच गया।
मंड के आरोप के मुताबिक, बाहर निकलने के दौरान भी कुछ लोगों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया। इसके बाद वाहन के साथ कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई और उनके साथ मारपीट भी की गई। घटना के दौरान उनका बेटा भवजोत सिंह भी घायल हो गया।
कान पकड़वाकर माफी मांगने का भी आरोप
गुरसिमरन सिंह मंड ने घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कथित हमलावरों ने उनके साथ बदसलूकी करने के अलावा उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की कोशिश की। मंड का आरोप है कि उन्हें कान पकड़ने और माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कथित तौर पर उनसे देश विरोधी नारे लगवाए गए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ था और किन लोगों की इसमें भूमिका रही।
पुलिस फिलहाल सभी पक्षों से जानकारी जुटाने में लगी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जाएगी।
पुलिस और सीआईडी के जवान भी हुए घायल
घटना में केवल मंड और उनके बेटे के घायल होने की बात नहीं है। तनावपूर्ण स्थिति को संभालने पहुंचे पुलिस और सीआईडी के कर्मचारियों को भी चोटें आई हैं। जानकारी के अनुसार, पंजोखरा थाना में तैनात सब-इंस्पेक्टर कुलबीर सिंह, सीआईडी के सब-इंस्पेक्टर राकेश और एएसआई चरणा सिंह भी घायल हुए हैं।
इसके अलावा घटनास्थल पर मची अफरा-तफरी के दौरान एक एक्टिवा सवार व्यक्ति के भी चोटिल होने की जानकारी सामने आई है। इस तरह पूरे घटनाक्रम में कुल छह लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है।
घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस घटना के दौरान मौजूद लोगों की भूमिका और चोटों से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड को भी जांच का हिस्सा बना सकती है।
मंड को मिली हुई है वाई-प्लस सुरक्षा
गुरसिमरन सिंह मंड को वाई-प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त होने की बात कही गई है। घटना के समय उनके साथ सुरक्षा कर्मी भी मौजूद थे। इसके बावजूद कथित तौर पर विवाद बढ़ने के बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर होती नजर आई।
बताया जा रहा है कि मंड के सुरक्षा कर्मियों को भी मौके पर विरोध का सामना करना पड़ा। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोग मंड के करीब कैसे पहुंचे और विवाद किस तरह हिंसक स्थिति में बदला।
सुरक्षा से जुड़े इस पहलू को भी जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि किसी संरक्षित व्यक्ति के साथ सार्वजनिक स्थान पर इस तरह का विवाद होना सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
गाड़ी में तोड़फोड़ का आरोप
मंड की ओर से उनकी कार में तोड़फोड़ किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। उनके अनुसार, जब उन्होंने वहां से निकलने का प्रयास किया तो कुछ लोगों ने वाहन को घेर लिया। इसके बाद कथित तौर पर गाड़ी पर हमला किया गया और उसे नुकसान पहुंचाया गया।
पुलिस अब वाहन की स्थिति और मौके पर मौजूद वीडियो फुटेज के आधार पर इस दावे की जांच कर सकती है। यदि तोड़फोड़ की पुष्टि होती है तो इसमें शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
घटना के बाद मौके पर काफी देर तक तनाव का माहौल बना रहा। पुलिस ने स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त बल की तैनाती की और लोगों को शांत कराने का प्रयास किया।
सीसीटीवी फुटेज से सामने आ सकती है पूरी तस्वीर
पुलिस जांच में सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को अहम माना जा रहा है। गुरुद्वारा परिसर और आसपास लगे कैमरों से घटना से पहले और बाद की गतिविधियों की जानकारी मिल सकती है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विवाद की शुरुआत किस बात से हुई और इसके बाद घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा।
इसके अलावा पुलिस प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज कर सकती है। मौके पर मौजूद लोगों से यह जानकारी जुटाई जा रही है कि सबसे पहले किसके बीच विवाद हुआ, किसने हमला किया और भीड़ किस तरह वहां एकत्र हुई।
घटना से संबंधित मोबाइल वीडियो या अन्य रिकॉर्डिंग भी जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकती हैं। पुलिस इन सभी तथ्यों को आपस में मिलाकर घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने लाने की कोशिश कर रही है।
वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी पंजोखरा साहिब पहुंचे। अधिकारियों ने मौके का जायजा लिया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। संवेदनशीलता को देखते हुए गुरुद्वारा परिसर तथा आसपास के इलाकों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई है।
अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। किसी भी तरह की अफवाह या दोबारा तनाव की स्थिति पैदा न हो, इसके लिए क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई गई है।
पुलिस की ओर से लोगों से भी अपील की जा सकती है कि वे बिना पुष्टि के किसी तरह की जानकारी या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा न करें। जांच प्रभावित न हो, इसके लिए आधिकारिक तथ्यों का इंतजार करने की बात कही जा रही है।
घटना के हर पहलू की जांच
पुलिस के सामने इस मामले में कई सवाल हैं। विवाद की वास्तविक शुरुआत कैसे हुई? क्या मंड और उनके बेटे को पहले रोका गया था? क्या उनके साथ मारपीट हुई? वाहन में किसने तोड़फोड़ की? मौके पर मौजूद पुलिस और सीआईडी कर्मचारियों को चोट कैसे लगी? और मंड द्वारा लगाए गए देश विरोधी नारे लगवाने तथा कान पकड़वाकर माफी मांगने के आरोपों में कितनी सच्चाई है—इन सभी बिंदुओं की जांच की जानी है।
जांच एजेंसियां उपलब्ध वीडियो, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों को आधार बनाकर घटनाक्रम को समझने का प्रयास करेंगी। साथ ही घायलों के मेडिकल रिकॉर्ड से भी घटना की परिस्थितियों के बारे में जानकारी मिल सकती है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जांच के आधार पर जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल किसी भी पक्ष के आरोप को अंतिम तथ्य मानकर कार्रवाई करने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पर जोर दिया जा रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई
घटना के बाद पंजोखरा साहिब और आसपास के क्षेत्र में पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है। प्रशासन की कोशिश है कि धार्मिक स्थल पर दोबारा किसी तरह का विवाद या तनाव न हो। पुलिस संवेदनशील स्थानों पर नजर बनाए हुए है।
इस पूरे घटनाक्रम ने गुरुद्वारा परिसर की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, घटना की पूरी तस्वीर पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के सामने आने के बाद ही साफ हो पाएगी।
फिलहाल गुरसिमरन सिंह मंड की ओर से लगाए गए मारपीट, गाड़ी में तोड़फोड़, जबरन नारे लगवाने और कान पकड़वाकर माफी मांगने जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
पंजोखरा साहिब जैसे ऐतिहासिक धार्मिक स्थल पर हुई इस घटना के मद्देनजर प्रशासन की ओर से शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। अब जांच रिपोर्ट और सामने आने वाले सबूतों के आधार पर ही आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी।