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इंग्लैंड के सामने बिखरी टीम इंडिया, टी-20 इतिहास की सबसे शर्मनाक हार; 76 रन पर सिमटी भारतीय पारी

इंग्लैंड के खिलाफ ट्रेंट ब्रिज, नॉटिंघम में खेले गए तीसरे टी-20 मुकाबले में भारतीय टीम को ऐसी हार का सामना करना पड़ा, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। मेजबान टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट खोकर 201 रन बनाए। जवाब में भारतीय बल्लेबाजी पूरी तरह लड़खड़ा गई और पूरी टीम केवल 76 रन बनाकर ऑलआउट हो गई। इंग्लैंड ने यह मुकाबला 125 रन के विशाल अंतर से अपने नाम किया। रनों के लिहाज से यह भारतीय टीम की टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक की सबसे बड़ी हार बन गई।

भारतीय बल्लेबाज शुरुआत से ही दबाव में दिखाई दिए। तेज गेंदबाजों और स्पिनरों के सामने किसी भी बल्लेबाज ने लंबी पारी नहीं खेली। लगातार विकेट गिरने से टीम कभी भी मुकाबले में वापसी नहीं कर सकी और देखते ही देखते पूरी पारी सस्ते में समाप्त हो गई। इस हार के साथ भारत ने कई ऐसे रिकॉर्ड अपने नाम किए, जिन्हें कोई भी टीम याद नहीं रखना चाहेगी।

भारत का 76 रन का स्कोर टी-20 अंतरराष्ट्रीय इतिहास में उसका दूसरा सबसे कम स्कोर भी बन गया। इससे पहले भारतीय टीम 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न में केवल 74 रन पर ऑलआउट हुई थी। इतने साल बाद टीम एक बार फिर बेहद कम स्कोर पर सिमट गई, जिसने बल्लेबाजी क्रम की कमजोरियों को उजागर कर दिया।

यह मुकाबला भारतीय टीम के लिए इसलिए भी निराशाजनक रहा क्योंकि लगातार पांचवें मैच में भी उसे जीत नहीं मिल सकी। टी-20 क्रिकेट में यह पहली बार है जब भारत बिना कोई जीत दर्ज किए लगातार पांच मुकाबले हार गया। इससे पहले टीम का सबसे खराब दौर लगातार चार हार का रहा था। इस हार ने टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों दोनों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

दूसरी ओर इंग्लैंड की बल्लेबाजी बेहद आक्रामक रही। टीम ने सात विकेट के नुकसान पर 201 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया। भारत के खिलाफ यह चौथी बार है जब इंग्लैंड ने टी-20 अंतरराष्ट्रीय में 200 या उससे अधिक रन बनाए हैं। इतना ही नहीं, यह भारत के खिलाफ इंग्लैंड का तीसरा सबसे बड़ा टी-20 स्कोर भी बन गया। इससे पहले इसी वर्ष मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ 246 रन का विशाल स्कोर बनाया था।

भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने इस मुकाबले में टॉस जीतकर एक अलग रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली। उन्होंने लगातार पांचवीं बार टी-20 अंतरराष्ट्रीय में टॉस अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने रोहित शर्मा की बराबरी कर ली। हालांकि भारतीय कप्तानों में लगातार सबसे अधिक सात टॉस जीतने का रिकॉर्ड अब भी महेंद्र सिंह धोनी के नाम दर्ज है, जिन्होंने वर्ष 2010 से 2012 के बीच यह कारनामा किया था।

इस मुकाबले का एक खास आकर्षण पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की मौजूदगी भी रही। 7 जुलाई को अपना जन्मदिन मना रहे धोनी ट्रेंट ब्रिज स्टेडियम में मैच देखने पहुंचे थे। काले रंग का कोट और ब्लैक सनग्लास पहनकर पहुंचे धोनी को जैसे ही स्टेडियम की बड़ी स्क्रीन पर दिखाया गया, पूरे मैदान में मौजूद दर्शकों ने जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया। फैंस ने अपने पसंदीदा खिलाड़ी के जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएं दीं और स्टेडियम का माहौल उत्साह से भर गया।

मैच में भारतीय टीम के युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। पिछले मुकाबले की तरह इस मैच में भी उनका बल्ला शांत रहा। इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर ने उन्हें केवल 13 रन के निजी स्कोर पर पवेलियन भेज दिया। तीसरे ओवर की चौथी गेंद पर वैभव ने पुल शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद उनके ग्लव्स से लगकर विकेटकीपर जोस बटलर के हाथों में चली गई। बटलर ने आसान कैच लपक लिया और भारत को शुरुआती बड़ा झटका लगा। दिलचस्प बात यह रही कि इंडियन प्रीमियर लीग में वैभव सूर्यवंशी और जोफ्रा आर्चर दोनों राजस्थान रॉयल्स की ओर से एक साथ खेल चुके हैं।

भारतीय टीम को इस मुकाबले में एक सकारात्मक क्षण भी मिला। युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की पहली ही गेंद पर विकेट हासिल कर सभी का ध्यान खींचा। पावरप्ले के अंतिम ओवर में उन्होंने शानदार यॉर्कर फेंकी, जिस पर इंग्लैंड के कप्तान जोस बटलर बोल्ड हो गए। गेंद पहले बल्ले से टकराई और फिर सीधे स्टंप्स में जा लगी। बटलर ने आउट होने से पहले 21 गेंदों में 36 रन बनाए थे। पहली ही गेंद पर विकेट लेना किसी भी गेंदबाज के लिए बेहद खास उपलब्धि मानी जाती है और प्रिंस यादव ने इसे यादगार बना दिया।

भारतीय बल्लेबाज तिलक वर्मा का आउट होना भी चर्चा का विषय बन गया। आठवें ओवर की पहली गेंद पर उन्होंने बड़ा शॉट खेलने के इरादे से क्रीज छोड़ दी। गेंदबाज विल जैक्स की गेंद को विकेटकीपर जोस बटलर ने पकड़कर स्टंप्स उड़ा दिए। शुरुआत में ऐसा लगा कि गेंद उनके हाथ से निकल गई थी और बल्लेबाज बच सकते हैं। हालांकि थर्ड अंपायर ने रिप्ले देखने के बाद पाया कि स्टंप्स टूटने के समय गेंद बटलर की उंगलियों के संपर्क में थी। इसके बाद तिलक वर्मा को आउट करार दिया गया। यह फैसला देखने के बाद सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा हुई।

इंग्लैंड के गेंदबाजों ने पूरे मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का कोई मौका नहीं दिया। नई गेंद से लगातार दबाव बनाया गया और बीच के ओवरों में स्पिनरों ने भी रन गति पर पूरी तरह नियंत्रण रखा। भारतीय बल्लेबाज एक बड़ी साझेदारी भी नहीं बना सके, जिसका सीधा असर स्कोरबोर्ड पर दिखाई दिया। विकेटों का सिलसिला लगातार जारी रहा और पूरी टीम निर्धारित 20 ओवर भी नहीं खेल सकी।

इंग्लैंड की ओर से बल्लेबाजों ने पहले मजबूत नींव रखी और बाद में निचले क्रम के खिलाड़ियों ने तेजी से रन जोड़कर स्कोर 200 के पार पहुंचाया। भारतीय गेंदबाजों ने बीच-बीच में विकेट जरूर निकाले, लेकिन रन रोकने में सफल नहीं रहे। यही कारण रहा कि भारत के सामने 202 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य खड़ा हो गया।

इस मुकाबले के बाद भारतीय टीम को अपनी बल्लेबाजी रणनीति पर गंभीरता से विचार करना होगा। लगातार पांच हार और टी-20 इतिहास की सबसे बड़ी पराजय यह संकेत देती है कि टीम को संयोजन, बल्लेबाजी क्रम और मानसिक मजबूती पर काम करने की जरूरत है। वहीं इंग्लैंड ने इस जीत के साथ अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन किया और दिखा दिया कि घरेलू परिस्थितियों में वह कितनी खतरनाक टीम साबित हो सकती है।

ट्रेंट ब्रिज का यह मुकाबला भारतीय क्रिकेट के लिए कई कड़वी यादें छोड़ गया। एक ओर टीम ने टी-20 इतिहास की सबसे बड़ी हार झेली, दूसरी ओर दूसरा सबसे कम स्कोर बनाने का रिकॉर्ड भी दर्ज हो गया। हालांकि प्रिंस यादव का शानदार डेब्यू मोमेंट और महेंद्र सिंह धोनी की स्टेडियम में मौजूदगी जैसी कुछ सकारात्मक बातें भी इस मैच की यादों का हिस्सा रहीं। अब भारतीय टीम की नजर अगले मुकाबलों में वापसी कर इस खराब दौर को खत्म करने पर होगी।