विदेश में लंबे समय तक छिपकर कानून से बचने की कोशिश कर रहे कुख्यात गैंगस्टर जोबनजीत सिंह उर्फ जोबन बिल्ला को आखिरकार भारत वापस लाने में पंजाब पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महीनों तक चली कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया के बाद उसे इंडोनेशिया से डिपोर्ट कर भारत लाया गया। उसके भारत पहुंचते ही सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं और पंजाब पुलिस ने उसे अपनी हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से कई पुराने आपराधिक मामलों की गुत्थियां सुलझने के साथ-साथ विदेश से संचालित होने वाले गैंग नेटवर्क के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
रविवार को इंडोनेशिया से डिपोर्ट किए जाने के बाद जोबन बिल्ला को मोहाली स्थित शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लाया गया। एयरपोर्ट पर पहले से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद अमृतसर पुलिस ने उसे आधिकारिक रूप से अपनी हिरासत में ले लिया। इसके बाद कड़ी सुरक्षा के बीच उसे अमृतसर रवाना किया गया, जहां उससे विस्तृत पूछताछ की जाएगी।
बताया जा रहा है कि एयरपोर्ट परिसर में पुलिस और विशेष सुरक्षा बलों की पर्याप्त तैनाती की गई थी। गैंगस्टर को एयरपोर्ट से बाहर लाते समय उसके चेहरे को काले कपड़े से ढक दिया गया ताकि उसकी पहचान सार्वजनिक रूप से उजागर न हो और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो। पूरे ऑपरेशन के दौरान पुलिस अधिकारियों ने अतिरिक्त सतर्कता बरती और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप की संभावना को पूरी तरह समाप्त रखने का प्रयास किया।
पंजाब पुलिस के अनुसार जोबन बिल्ला लंबे समय से विदेश में रहकर गिरफ्तारी से बचता आ रहा था। उसके खिलाफ राज्य के विभिन्न पुलिस थानों में कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें चार हत्या के मामले, हत्या के प्रयास, मादक पदार्थों से जुड़े अपराध, एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे और आर्म्स एक्ट से संबंधित आरोप शामिल हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि उसके खिलाफ दर्ज मामलों की गंभीरता को देखते हुए उसे भारत वापस लाना बेहद आवश्यक था।
अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई किसी एक एजेंसी के प्रयासों का परिणाम नहीं बल्कि कई संस्थाओं के संयुक्त अभियान का हिस्सा थी। पिछले करीब छह महीनों से पंजाब पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ), ओएफटीईसी पंजाब और विभिन्न केंद्रीय एजेंसियां लगातार उसके ठिकानों और गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थीं। तकनीकी निगरानी, खुफिया जानकारी और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय के जरिए उसकी लोकेशन का पता लगाया गया और उसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर इंडोनेशिया से डिपोर्ट कराने की कार्रवाई सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
जांच अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे अभियान में आधुनिक तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विभिन्न डिजिटल माध्यमों, संचार गतिविधियों और खुफिया सूचनाओं का विश्लेषण कर उसके मूवमेंट की जानकारी जुटाई गई। इसके बाद संबंधित देशों की एजेंसियों के सहयोग से आवश्यक दस्तावेजी और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं, जिससे उसे भारत वापस लाने का रास्ता साफ हुआ।
पुलिस का मानना है कि विदेश में रहने के बावजूद जोबन बिल्ला पूरी तरह निष्क्रिय नहीं था। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि वह विदेश से ही अपने सहयोगियों के संपर्क में बना हुआ था और गैंग की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। अब पूछताछ के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि वह किन-किन लोगों के माध्यम से अपना नेटवर्क संचालित कर रहा था और किन आपराधिक घटनाओं में उसकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका रही।
जांच एजेंसियों की नजर अब केवल उसके पुराने मामलों तक सीमित नहीं रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि उसके विदेशी संपर्कों की भी गहन पड़ताल की जाएगी। यह जानने की कोशिश होगी कि विदेश में रहते हुए उसने किन लोगों से संबंध बनाए, किन देशों में उसका नेटवर्क सक्रिय था और क्या किसी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोह के साथ उसका संपर्क था। यदि ऐसे कोई तथ्य सामने आते हैं तो जांच का दायरा और भी व्यापक किया जाएगा।
इसके साथ ही पुलिस उसके आर्थिक स्रोतों की भी जांच करेगी। अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय तक विदेश में रहने और आपराधिक नेटवर्क संचालित करने के लिए आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। इसलिए यह पता लगाया जाएगा कि उसे धन कहां से मिलता था, किन माध्यमों से लेन-देन होता था और क्या इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे। वित्तीय लेन-देन की जांच से कई नए सुराग मिलने की संभावना जताई जा रही है।
पुलिस की पूछताछ में उसके फरार साथियों के बारे में भी जानकारी जुटाई जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि उसके खुलासों के आधार पर कई अन्य आरोपियों तक पहुंच बनाई जा सकती है। यदि वह अपने नेटवर्क और सहयोगियों के बारे में जानकारी देता है तो इससे संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को और मजबूती मिलेगी।
सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसियां उसके मोबाइल संपर्कों, डिजिटल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच कर सकती हैं। इन माध्यमों से यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि विदेश में रहते हुए वह किस प्रकार अपने सहयोगियों से जुड़ा रहा और किन तरीकों से निर्देश देता था। तकनीकी साक्ष्यों को भी जांच का अहम हिस्सा बनाया जाएगा।
पंजाब पुलिस का कहना है कि राज्य में संगठित अपराध और गैंगस्टर संस्कृति पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पिछले कुछ समय में कई वांछित अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और विदेशों में छिपे आरोपियों को भी भारत लाने के प्रयास जारी हैं। अधिकारियों के अनुसार यदि कोई अपराधी विदेश भागकर कानून से बचने की कोशिश करता है तो भी उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहती है और उचित समय आने पर उसे न्याय के दायरे में लाया जाता है।
इस मामले में भी पुलिस का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के कारण यह कार्रवाई संभव हो सकी। भविष्य में भी ऐसे अभियानों को जारी रखा जाएगा ताकि विदेशों में छिपे अन्य वांछित अपराधियों को भी गिरफ्तार कर भारत लाया जा सके। पुलिस का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से अपराधियों में यह संदेश जाएगा कि कानून से लंबे समय तक बच पाना संभव नहीं है।
फिलहाल जोबन बिल्ला पुलिस हिरासत में है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियां उसके बयान, तकनीकी साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध जानकारियों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगी। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस पूछताछ से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आएंगी, जिनके आधार पर संगठित अपराध से जुड़े अन्य मामलों में भी प्रगति हो सकती है। वहीं पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि राज्य में अपराध के खिलाफ अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा और कानून से बचने की कोशिश करने वाले हर आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई का सामना करना होगा।