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PoK चुनाव के बीच बवाल: सेना पर उठे सवाल, कई संगठनों ने किया बहिष्कार का ऐलान

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के पहले चरण की मतदान प्रक्रिया सोमवार को शुरू हो गई। मीरपुर डिवीजन की 13 विधानसभा सीटों पर लाखों मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि मतदान ऐसे समय में हो रहा है जब पूरे क्षेत्र में राजनीतिक तनाव और विरोध प्रदर्शनों का माहौल बना हुआ है। कई स्थानीय संगठनों और विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष न बताते हुए इसका बहिष्कार करने की घोषणा की है। उनका आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया पर पाकिस्तानी सेना का प्रभाव है और वास्तविक जनमत को सामने आने का अवसर नहीं दिया जा रहा।

इस चरण के चुनाव में मीरपुर, कोटली और भीमबर जिलों की कुल 13 सीटों पर मतदान कराया जा रहा है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार इन सीटों पर लगभग 14 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चयन करेंगे। मतदान शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए प्रशासन ने हजारों मतदान केंद्र स्थापित किए हैं और सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। मतदान से पहले सभी आवश्यक चुनावी सामग्री संबंधित जिलों तक पहुंचा दी गई थी ताकि प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सके।

मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन ने पूरे मीरपुर डिवीजन में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करना है। प्रशासन ने दावा किया है कि चुनाव पूरी पारदर्शिता और कानून के दायरे में कराए जा रहे हैं तथा मतदान केंद्रों पर सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं।

हालांकि प्रशासन के इन दावों के समानांतर विरोध की आवाजें भी लगातार तेज होती जा रही हैं। कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि चुनावी माहौल स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं है। उनका आरोप है कि पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियों में हस्तक्षेप करती रही हैं, जिससे चुनावों की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि चुनावी प्रक्रिया पर बाहरी दबाव रहेगा तो जनता की वास्तविक इच्छा कभी सामने नहीं आ पाएगी।

इस चुनावी चरण में पाकिस्तान की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां भी मैदान में हैं। इनमें पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N), पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) और इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी (IPP) शामिल हैं। विभिन्न दलों के उम्मीदवार मतदाताओं तक पहुंचने और समर्थन जुटाने में लगे रहे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 13 सीटों के लिए करीब 300 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

सबसे अधिक मुकाबला कोटली जिले में देखने को मिल रहा है, जहां छह विधानसभा सीटों के लिए 135 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं मीरपुर और भीमबर जिलों की सात सीटों पर भी कड़ी टक्कर मानी जा रही है। इन दोनों जिलों में लाखों मतदाता चुनाव परिणाम तय करेंगे, इसलिए राजनीतिक दलों ने यहां अपने प्रचार अभियान पर विशेष ध्यान दिया था।

चुनाव से पहले और मतदान के दिन भी कई स्थानों पर प्रदर्शन जारी रहे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि चुनाव पहले से तय परिणामों की ओर बढ़ रहे हैं और आम जनता की राय को महत्व नहीं दिया जा रहा। कई जगहों पर पाकिस्तान की सेना के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि जब तक राजनीतिक प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र नहीं होगी, तब तक लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती।

अवामी एक्शन कमेटी सहित कुछ संगठनों ने चुनाव के बहिष्कार का खुला आह्वान किया है। संगठन का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में मतदान का कोई अर्थ नहीं रह जाता क्योंकि उनके अनुसार पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है। उन्होंने लोगों से मतदान केंद्रों से दूरी बनाए रखने और चुनावी नतीजों का विरोध करने की अपील की। संगठन का दावा है कि जनता की वास्तविक आकांक्षाओं को इस चुनाव के माध्यम से अभिव्यक्ति नहीं मिल रही है।

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में वर्षों से चुनावी प्रक्रिया पर सेना का प्रभाव बना हुआ है। उनका कहना है कि प्रशासनिक संस्थाओं और सुरक्षा तंत्र पर प्रभाव के कारण राजनीतिक प्रतिस्पर्धा समान स्तर पर नहीं हो पाती। इसी वजह से कई दल चुनावी नतीजों पर पहले से ही सवाल उठाते रहे हैं। उनका मानना है कि लोकतंत्र तभी मजबूत हो सकता है जब सभी दलों को समान अवसर और स्वतंत्र वातावरण मिले।

दूसरी ओर पाकिस्तानी प्रशासन इन आरोपों को खारिज करता रहा है। अधिकारियों का कहना है कि चुनाव पूरी तरह संवैधानिक प्रावधानों और कानून के अनुसार कराए जा रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि सभी उम्मीदवारों को समान अवसर उपलब्ध कराए गए हैं और मतदान प्रक्रिया की निगरानी भी निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है। उनका कहना है कि चुनाव को प्रभावित करने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा।

इसके बावजूद क्षेत्र का राजनीतिक माहौल काफी संवेदनशील बना हुआ है। कई इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासन ने लोगों से शांतिपूर्ण ढंग से मतदान करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि कहीं भी हिंसा या अशांति फैलाने की कोशिश की गई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के नतीजे केवल विधानसभा की सीटों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि क्षेत्र की भविष्य की राजनीति और प्रशासनिक दिशा पर भी असर डाल सकते हैं। हालांकि विपक्षी दलों और विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि यदि चुनावी प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठते रहे तो परिणामों की स्वीकार्यता भी प्रभावित हो सकती है। उनका मानना है कि जनता का विश्वास जीतने के लिए पारदर्शिता और निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण है।

मीरपुर डिवीजन में जारी मतदान और उसके साथ चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने एक बार फिर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की राजनीतिक स्थिति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जहां प्रशासन शांतिपूर्ण और नियमों के तहत चुनाव संपन्न कराने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कई संगठन और विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। ऐसे में अब सभी की निगाहें मतदान प्रतिशत, चुनाव परिणामों और उसके बाद क्षेत्र में बनने वाले राजनीतिक माहौल पर टिकी हुई हैं।