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The Scoopp

 

जंतर-मंतर केस में नया मोड़: आशुतोष रंका और सौरव दास का मामला क्राइम ब्रांच के हवाले, आज कोर्ट में होगी पेशी

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रंका और सौरव दास से जुड़े जंतर-मंतर विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। इससे पहले दोनों नेताओं के कनॉट प्लेस से जुड़े मामले को भी क्राइम ब्रांच के पास भेजा गया था। अब जंतर-मंतर से संबंधित केस का जिम्मा भी इसी जांच एजेंसी के पास होगा। इस बीच, दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत की अवधि 21 अक्टूबर यानी आज समाप्त हो रही है। ऐसे में दोनों को अदालत में पेश किया जाएगा।

आशुतोष रंका और सौरव दास 14 अक्टूबर से तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन्हें जंतर-मंतर पर बिना अनुमति पहुंचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनकी हिरासत को लेकर कानूनी विवाद भी जारी है। दोनों नेताओं ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के उस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसके तहत उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई थी। याचिका में दावा किया गया है कि जमानतदार उपलब्ध कराने के बावजूद उन्हें रिहा नहीं किया गया, जिससे उनके अधिकार प्रभावित हुए हैं।

क्राइम ब्रांच को सौंपी गई दोनों घटनाओं की जांच

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आशुतोष रंका और सौरव दास के खिलाफ 13 अक्टूबर को कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर से संबंधित घटनाओं को लेकर दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं। इन मामलों में पहले कनॉट प्लेस से जुड़ी एफआईआर को क्राइम ब्रांच के पास भेजा गया। मंगलवार को इस केस के स्थानांतरण की जानकारी सामने आई थी। अब जंतर-मंतर से संबंधित मामले को भी इसी शाखा को सौंप दिया गया है।

दोनों मामलों को क्राइम ब्रांच के हवाले किए जाने के बाद जांच की जिम्मेदारी अब इस विशेष इकाई के पास है। हालांकि, केस ट्रांसफर होने का मतलब अपने आप में आरोप साबित होना नहीं है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और अदालत की प्रक्रिया के अनुसार होगी।

इस विवाद की शुरुआत उस समय हुई, जब CJP के नेताओं ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के बीच वहां पहुंचने की कोशिश की। पार्टी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध कर रही है। इसके साथ ही पार्टी की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई थी।

आज अदालत में पेश होंगे आशुतोष और सौरव

आशुतोष रंका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत को लेकर आज का दिन अहम माना जा रहा है। दोनों की पांच दिन की न्यायिक हिरासत 19 अक्टूबर को पूरी हो गई थी। इसके बाद हिरासत की अवधि बढ़ाकर 21 अक्टूबर तक कर दी गई थी। अब उन्हें अदालत में पेश किया जाना है, जहां उनकी हिरासत और जमानत से जुड़े सवालों पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

दोनों नेताओं ने हिरासत बढ़ाने के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। उनकी ओर से दलील दी गई है कि उन्होंने जमानत के लिए जरूरी जमानतदार पेश किए थे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें जेल में रखा गया। याचिका में इसे मौलिक अधिकारों से जुड़ा मामला बताया गया है।

विवाद विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के 19 अक्टूबर के आदेश से भी जुड़ा है। दोनों नेताओं के अनुसार, उस दिन उनके नए जमानतदारों को स्वीकार नहीं किया गया था। इसके अलावा, मजिस्ट्रेट ने उनसे यह स्पष्ट करने को कहा था कि उनके कारण शांति भंग होने की आशंका क्यों नहीं होनी चाहिए।

इस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर आज सुनवाई होनी है। ऐसे में हाईकोर्ट की कार्यवाही पर भी नजर रहेगी। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

10 अक्टूबर से शुरू हुआ विवाद, एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए गए थे नेता

CJP की ओर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का कार्यक्रम 10 अक्टूबर को रखा गया था। पार्टी SIR के विरोध और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रही थी। प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ आशुतोष रंका और सौरव दास भी दिल्ली पहुंचे थे।

पार्टी के कार्यक्रम वाले दिन सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पर पुलिस ने अभिजीत दीपके, आशुतोष रंका और सौरव दास को विमान से ही हिरासत में ले लिया था। इसके बाद तीनों को 11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट स्थित विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया।

अदालत की कार्यवाही के बाद तीनों को 50-50 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया गया था। हालांकि, यह रिहाई आगे के विवाद को समाप्त नहीं कर सकी। अगले कुछ दिनों में जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस से संबंधित घटनाओं के कारण मामला फिर चर्चा में आ गया।

13 अक्टूबर को आशुतोष रंका और सौरव दास तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे। उनके साथ कुछ अन्य प्रदर्शनकारी भी मौजूद थे। बताया गया कि निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से जंतर-मंतर को हटाए जाने के एक दिन बाद दोनों नेता वहां पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें और उनके साथ मौजूद प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

इसी घटनाक्रम से संबंधित मामले में दोनों नेताओं की गिरफ्तारी हुई और बाद में उनकी न्यायिक हिरासत को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी।

दीपके की गिरफ्तारी के बाद CJP ने निकाली तिरंगा रैली

आशुतोष और सौरव की हिरासत के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली आयोजित करने का आह्वान किया था। पार्टी का यह कार्यक्रम अपने नेताओं के समर्थन में आयोजित किया गया था।

रैली से पहले ही CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद 17 अक्टूबर को उन्हें 50 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर जमानत मिल गई। दीपके की रिहाई के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और आंदोलन की भूमिका को लेकर दिए गए उनके बयान भी चर्चा का विषय बन गए।

इस पूरे घटनाक्रम में तीनों नेताओं की गिरफ्तारी, जमानत और प्रदर्शन से संबंधित गतिविधियां लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। वहीं, आशुतोष और सौरव की हिरासत के मामले में अब हाईकोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण हो गई है।

आंदोलन के नेतृत्व पर दीपके के बयान से उठा विवाद

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने हाल ही में एक वीडियो जारी करके आंदोलन में अपनी भूमिका और आशुतोष रंका तथा सौरव दास के योगदान पर बात की थी। मंगलवार को जारी लगभग 16 मिनट के वीडियो में उन्होंने कहा था कि आंदोलन को आगे बढ़ाने में आशुतोष और सौरव की प्रमुख भूमिका रही है।

दीपके ने अपने बयान में कहा था कि वह खुद को इस आंदोलन का मुख्य नेता नहीं मानते थे और आशुतोष तथा सौरव के निर्देशों के अनुसार काम करते थे। उनके मुताबिक, दोनों उन्हें बताते थे कि अगले दिन कौन-सा काम करना है और किस स्थान पर जाना है। वह उनके बताए कार्यक्रम के अनुसार अपनी भूमिका निभाते थे।

इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने दीपके की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वह आंदोलन की जिम्मेदारी दूसरे नेताओं पर डालकर खुद को विवाद से अलग दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर की गई ये टिप्पणियां यूजर्स की प्रतिक्रियाएं थीं।

बयान को लेकर बढ़ती चर्चा के बीच दीपके ने देर रात एक और वीडियो जारी किया और अपनी बात स्पष्ट करने की कोशिश की।

दूसरे वीडियो में आशुतोष-सौरव की क्षमता की तारीफ

अपने दूसरे वीडियो में अभिजीत दीपके ने आशुतोष रंका और सौरव दास की तारीफ करते हुए कहा कि दोनों उनसे अधिक तेज और प्रतिभाशाली हैं। उन्होंने कहा कि संगठन में तानाशाही सोच के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए और अपने से बेहतर लोगों की क्षमताओं को स्वीकार करने में उन्हें किसी तरह की झिझक नहीं है।

दीपके के अनुसार, आशुतोष और सौरव फैसले लेने तथा परिस्थितियों को समझने के मामले में उनसे बेहतर हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संगठन में नेतृत्व को लेकर असुरक्षा महसूस करने के बजाय योग्य लोगों के योगदान को स्वीकार करना चाहिए।

इस तरह, पहले वीडियो में दोनों नेताओं को आंदोलन का प्रमुख चेहरा बताने और दूसरे वीडियो में उनके कौशल की सराहना करने के बाद दीपके ने अपने बयान का संदर्भ स्पष्ट किया। उनके इन बयानों को लेकर पार्टी और सोशल मीडिया पर चर्चा जारी है।

NEET पेपर लीक मामले में भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर चुकी है CJP

कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर-मंतर से जुड़ा यह पहला बड़ा प्रदर्शन नहीं है। इससे पहले पार्टी ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर भी दिल्ली में आंदोलन किया था। 20 जून से 25 जुलाई तक चले उस प्रदर्शन में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई गई थी।

पार्टी ने इस दौरान लगातार 36 दिनों तक प्रदर्शन किया। आंदोलन के समय एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर बैठे थे। इसके अलावा, 20 जुलाई को पार्टी की ओर से संसद तक मार्च निकालने का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था।

25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा प्रदर्शन समाप्त हो गया था। इसके बाद अक्टूबर में पार्टी ने SIR के विरोध और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर फिर आंदोलन शुरू किया।

फिलहाल आशुतोष रंका और सौरव दास से जुड़ा मामला पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बीच है। जंतर-मंतर केस को क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने, न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने और हाईकोर्ट में चुनौती पर सुनवाई के चलते यह मामला महत्वपूर्ण बना हुआ है। आज अदालत में होने वाली कार्यवाही से दोनों नेताओं की हिरासत और आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।