अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में इस समय भूचाल आया हुआ है, और इसका केंद्र बिंदु बना हुआ है पश्चिम एशिया का वह सुलगता हुआ रणक्षेत्र, जहाँ अमेरिका और ईरान के बीच सीधी और भीषण तनातनी चल रही है। इस गर्मागर्म माहौल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से दुनिया की महाशक्तियों को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले अंदाज में दो टूक चेतावनियां जारी कर दी हैं। ट्रंप ने इस बार सीधे तौर पर ड्रैगन यानी चीन और रूस के व्लादिमीर पुतिन को निशाने पर लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कड़े शब्दों में यह साफ कर दिया है कि यदि बीजिंग या मॉस्को ने संकट के इस दौर में तेहरान की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया, तो इसके नतीजे वैश्विक स्तर पर बहुत खतरनाक और इन दोनों देशों के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है जब पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सैन्य टकराव पर टिकी हुई हैं। जानकारों का मानना है कि व्हाइट हाउस के मुखिया के इन तीखे तेवरों से पहले से ही पटरियों से उतरे अमेरिका-रूस और अमेरिका-चीन के द्विपक्षीय संबंधों में खटास और अधिक गहरी हो सकती है।
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का विस्फोटक बयान: चीन और रूस की कसमों का किया जिक्र
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ का रुख करते हुए अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में एक के बाद एक कई पोस्ट साझा किए। इन पोस्ट्स में उन्होंने दावा किया कि उनकी हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ कूटनीतिक चर्चाएं हुई थीं। ट्रंप ने दावा किया कि इन मुलाकातों और वार्ताओं के दौरान दोनों शीर्ष नेताओं ने उन्हें वचन दिया था कि वे ईरान को किसी भी प्रकार के घातक हथियार या सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति नहीं करेंगे।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि बीजिंग में हुई बैठकों के दौरान चीनी राष्ट्रपति ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आश्वस्त किया था कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को किसी भी सूरत में हथियार मुहैया नहीं कराए जाएंगे। इतना ही नहीं, ट्रंप के अनुसार शी जिनपिंग ने चीनी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और कंपनियों की ओर से भी यह भरोसा दिलाया था कि वे तेहरान की सैन्य मदद से दूर रहेंगी।
ठीक इसी प्रकार का दावा उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के संदर्भ में भी किया। ट्रंप ने लिखा कि पुतिन ने भी उनसे यही वादा किया है कि रूस की तरफ से ईरान को हथियारों की कोई बिक्री नहीं की जाएगी। हालांकि, इसी सांस में अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोनों देशों को कड़ी चेतावनी देते हुए जोड़ा कि यदि उनके ये वादे झूठे साबित हुए या जमीनी हकीकत इसके उलट पाई गई, तो यह कदम रूस और चीन दोनों के लिए ही “बेहद बुरा” साबित होगा। ट्रंप ने कहा कि इस तरह का कोई भी कदम उठाना उनके अपने राष्ट्रीय हितों के भी पूरी तरह खिलाफ होगा और अमेरिका इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा।
क्या वाकई रूस और चीन दे रहे हैं ईरान का साथ?
जैसे-जैसे पश्चिम एशिया में अमेरिकी सेनाओं के हमले तेज होते जा रहे हैं, अंतरराष्ट्रीय मीडिया और खुफिया रिपोर्ट्स में यह दावे लगातार किए जा रहे हैं कि परोक्ष रूप से रूस और चीन से तेहरान को कूटनीतिक, तकनीकी या खुफिया स्तर पर कुछ सहायता मिल रही है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर दोनों ही देशों ने ऐसी किसी भी सैन्य मदद से लगातार इनकार किया है।
डोनाल्ड ट्रंप की ताज़ा टिप्पणी ठीक इन्हीं अंदरूनी रिपोर्ट्स और रणनीतिक अटकलों के जवाब में आई है। ट्रंप ने भले ही यह कहा है कि फिलहाल उन्हें ऐसा नहीं लगता कि बीजिंग या मॉस्को इस मौजूदा संघर्ष में सीधे तौर पर कूद पड़े हैं, लेकिन उनकी यह चेतावनी एक साफ संकेत है कि पेंटागन इस बात पर पैनी नज़र बनाए हुए है कि ईरान के गुप्त मददगार कौन-कौन हैं। यदि आने वाले दिनों में ऐसा कोई भी ठोस सबूत अमेरिकी खुफिया तंत्र के हाथ लगता है, तो ट्रंप प्रशासन द्वारा रूस और चीन पर आर्थिक प्रतिबंधों या अन्य कठोर कार्रवाइयों का चाबुक चलाया जा सकता है।
तेहरान के लिए भी ट्रंप ने बिछाया जाल: या तो समझौता करो या फिर पूर्ण विनाश झेलो
रूस और चीन को लपेटने के साथ-साथ अमेरिकी राष्ट्रपति ने सीधे तौर पर ईरान के हुक्मरानों को भी अपनी सैन्य ताकत का खौफ दिखाया है। ट्रंप ने एक इंटरव्यू या बयान के दौरान स्पष्ट किया कि ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत के दरवाजे अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। उनके मुताबिक, तेहरान के प्रतिनिधि भी इस दिशा में कुछ गंभीरता दिखाते हुए नजर आ रहे हैं और कूटनीतिक चैनलों के जरिए संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं।
लेकिन इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि व्हाइट हाउस केवल बातों पर निर्भर रहने वाला नहीं है। उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा कि अमेरिकी सेना किसी भी बड़ी से बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए पूरी तरह से तैयार और मुस्तैद बैठी है। यदि दोनों पक्षों के बीच चल रही यह बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुँचती है और विफल हो जाती है, तो अमेरिकी सेना ईरान पर ऐसे भीषण और विध्वंसक हमले करेगी जिनकी कल्पना तेहरान ने कभी नहीं की होगी।
ट्रंप द्वारा रखे गए युद्ध के दो खौफनाक विकल्प
ईरान संकट को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सामने अपनी रणनीति के दो स्पष्ट रास्ते रखे हैं। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के ईरान को इन विकल्पों के बारे में सोचने के लिए कह दिया है:
- पहला विकल्प – सैन्य कार्रवाई का विस्तार और सर्वनाश: ट्रंप ने कहा कि पहला रास्ता विशुद्ध रूप से सैन्य विकल्प है। इसके तहत अमेरिका या तो अपनी मौजूदा सैन्य गतिशीलता को ऐसे ही बनाए रख सकता है या फिर इस जंग की तीव्रता को कई गुना बढ़ा सकता है। राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि यदि यह रास्ता चुना गया, तो ईरान की हर एक चीज, उसका बुनियादी ढांचा, उसकी सैन्य चौकियां और उसका सिस्टम पूरी तरह से नेस्तनाबूद और खत्म कर दिया जाएगा।
- दूसरा विकल्प – विवेकपूर्ण डील या समझौता: ट्रंप ने ईरान के सामने दूसरा रास्ता एक व्यावहारिक और समझदारी भरी रणनीति के रूप में रखा है। उन्होंने सुझाव दिया कि ईरान के लिए सबसे बुद्धिमानी भरा कदम यही होगा कि वे जिद छोड़कर अमेरिका के साथ एक ठोस और स्वीकार्य समझौते की मेज पर आएं और डील पक्की करें।
कूटनीतिक रिश्तों में आ सकता है बड़ा भूचाल
विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की यह खुली और आक्रामक धमकियां रूस और चीन के अहंकार को ठेस पहुँचा सकती हैं। व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग जैसे वैश्विक दिग्गजों को इस प्रकार सार्वजनिक मंचों पर चेतावनियां देना अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े भूचाल का संकेत है। पहले से ही यूक्रेन युद्ध और ताइवान के मुद्दों को लेकर अमेरिका के साथ रूस और चीन के संबंध बेहद निचले स्तर पर चल रहे हैं।
अब ट्रंप द्वारा ईरान के मामले में इस प्रकार की बयानबाजी करना बीजिंग और मॉस्को के राजनेताओं को गहराई से नाराज कर सकता है। यह देखना बेहद दिलचस्प और चिंताजनक होगा कि क्या चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति पुतिन ट्रंप की इस धमकी के जवाब में कोई आक्रामक कूटनीतिक या आर्थिक पलटवार करते हैं, या फिर वे पर्दे के पीछे से अपनी रणनीति में कोई बदलाव लाते हैं। फिलहाल, इस बयान के बाद वैश्विक राजनीति का तापमान और अधिक बढ़ गया है और दुनिया एक नए संभावित संघर्ष के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है।