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The Scoopp

 

भारत-नेपाल सीमा पर बड़ा एक्शन: अमेरिकी नागरिक संग ‘वारिस पंजाब दे’ का फरार आतंकी गिरफ्तार, घुसपैठ की बड़ी साजिश नाकाम

सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर अपनी मुस्तैदी का लोहा मनवाते हुए भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम दिया है। सशस्त्र सीमा बल यानी एसएसबी और स्थानीय सिविल पुलिस की संयुक्त टीम ने इंडो-नेपाल बॉर्डर पर स्थित रूपईडीहा इलाके से प्रतिबंधित संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ से जुड़े एक मोस्ट वांटेड आतंकी को धर दबोचा है। इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने एक अमेरिकी नागरिक को भी हिरासत में लिया है, जो इस अवैध घुसपैठ में मुख्य आरोपी के साथ साझीदार बना हुआ था। इसके साथ ही, इन दोनों को नेपाल के रास्ते सुरक्षित भारत की सीमा में प्रवेश कराने और उन्हें संरक्षण देने वाले तीन स्थानीय मददगारों को भी पुलिस ने शिकंजे में ले लिया है। इस पूरी कार्रवाई ने एक बार फिर सीमाई इलाकों की सुरक्षा और देशविरोधी तत्वों की गतिविधियों को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं खुफिया एजेंसियों की सक्रियता ने एक बड़ा आतंकी षड्यंत्र विफल कर दिया है।

अजनाला कांड का मुख्य आरोपी और नेपाल में छिपने की कहानी

घटना के विवरण के अनुसार, गिरफ्तार किया गया मुख्य संदिग्ध विक्रमजीत सिंह वही शख्स है जो साल 2023 से कानून की पकड़ से दूर फरार चल रहा था। आपको याद होगा कि वर्ष 2023 में पंजाब के अमृतसर जिले के अंतर्गत आने वाले अजनाला थाने पर अमृतपाल सिंह के समर्थकों ने किस प्रकार का खूनी और हिंसक तांडव मचाया था। अपने एक साथी लवप्रीत सिंह उर्फ ‘तूफान’ को पुलिस की गिरफ्त से जबरन छुड़ाने के लिए भीड़ ने थाने पर हमला बोल दिया था। उस हिंसक झड़प में भारी संख्या में पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद पुलिस प्रशासन पर बने भारी दबाव के चलते लवप्रीत सिंह को छोड़ना पड़ा था। उसी पूरे घटनाक्रम और बवाल के दौरान विक्रमजीत सिंह पुलिस के रडार पर आया और उस पर हत्या के प्रयास (धारा 307) समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए। घटना के तुरंत बाद वह भूमिगत हो गया और किसी तरह फर्जी दस्तावेजों के सहारे नेपाल भाग निकला था। पिछले दो-तीन सालों से वह नेपाल की गुप्त शरणस्थलियों में छिपकर अपनी पहचान छिपा रहा था, लेकिन भारतीय खुफिया तंत्र और स्थानीय पुलिस की पैनी नजरों से वह ज्यादा दिनों तक बच नहीं सका।

जाली दस्तावेजों और मददगारों का जाल

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, नेपाल में लंबे समय तक फरारी काटने के बाद विक्रमजीत सिंह ने भारत लौटने की योजना बनाई थी। चूंकि उसके खिलाफ देश के कई थानों में गंभीर वारंट लंबित थे और पुलिस उसकी तलाश में चप्पे-चप्पे पर नजर रख रही थी, इसलिए भारत में प्रवेश करना उसके लिए आसान नहीं था। नेपाल से अवैध रूप से भारतीय सीमा में घुसने के लिए उसने स्थानीय स्तर पर कुछ दलालों और सहयोगियों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया था। रूपईडीहा बॉर्डर के रास्ते उसे भारत में प्रवेश दिलाने के लिए जिन स्थानीय लोगों ने उसकी मदद की, उनमें सुरेश पाठक, दिलीप उपाध्याय और एक वाहन चालक राहुल कुमार का नाम सामने आया है। इन स्थानीय मददगारों ने न केवल उसे सीमा पार कराने की योजना बनाई, बल्कि [Aadhaar Redacted] जैसे जाली और कूटरचित कागजातों के सहारे उसे भारतीय पहचान दिलाने की भी कोशिश की ताकि सुरक्षा जांच के दौरान उसे आसानी से निकाला जा सके। हालांकि, नेपाल सीमा पर तैनात खुफिया इकाइयों को इस संदिग्ध मूवमेंट की भनक पहले ही लग चुकी थी, और जैसे ही इन लोगों ने बॉर्डर पार करने का दुस्साहस किया, सुरक्षाबलों ने जाल बिछाकर सबको दबोच लिया।

अमेरिका से जुड़ा तार और अमेरिकी नागरिक की गिरफ्तारी का सच

इस ऑपरेशन का सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू इसमें एक अमेरिकी नागरिक की संलिप्तता है। पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, विक्रमजीत सिंह के साथ जो दूसरा संदिग्ध पकड़ा गया है, वह मनवीर सिंह है, जो मूल रूप से अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य का रहने वाला है। पूछताछ के दौरान यह सामने आया है कि विक्रमजीत सिंह पिछले कुछ समय से कानून के शिकंजे से तंग आ चुका था और पंजाब में उसके वकीलों ने उसे सलाह दी थी कि वह अब और अधिक समय तक न भागे, बल्कि वापस लौटकर अदालत के सामने आत्मसमर्पण (सरेन्डर) कर दे। वकीलों की इसी कानूनी सलाह के बाद उसने भारत लौटने का जोखिम उठाया था। उसके साथ गिरफ्तार हुआ मनवीर सिंह भी किसी पुराने मामले का सामना कर रहा था और वह अपनी पत्नी के साथ पंजाब की यात्रा पर आ रहा था। हालांकि, जब इस पूरे मामले की कड़ियां खंगाली गईं, तो पुलिस ने स्पष्ट किया कि मनवीर सिंह की पत्नी, जो मूल रूप से अमेरिकी नागरिक है, उसके पास तमाम वैध यात्रा दस्तावेज, पासपोर्ट और वीजा मौजूद थे। कानूनी और वैध कागजात पाए जाने के कारण उसकी पत्नी को इस कार्रवाई के दायरे से बाहर रखते हुए सुरक्षित छोड़ दिया गया, जबकि मनवीर सिंह और विक्रमजीत सिंह की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।

खुफिया तंत्र की मुस्तैदी और पंजाब पुलिस को त्वरित सूचना

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। पुलिस अधीक्षक ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि विक्रमजीत सिंह जैसे शातिर और वांछित आतंकी के नेपाल सीमा से पकड़े जाने की आधिकारिक सूचना तत्काल प्रभाव से पंजाब पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय खुफिया एजेंसियों को साझा कर दी गई है। पंजाब पुलिस की एक विशेष टीम अब इस बात की पड़ताल करने में जुटी है कि इस नेटवर्क की जड़ें और कहां-कहां फैली हुई हैं। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि नेपाल में विक्रमजीत को पनाह देने वाले स्थानीय लोग कौन थे, उसे फंडिंग कहां से हो रही थी और उसके अन्य स्लीपर सेल या सहयोगी भारत में किस-किस जगह एक्टिव हैं। पुलिस उन तमाम फर्जी दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच कर रही है जिनका इस्तेमाल बॉर्डर पार करने के लिए किया गया था। इस सफल ऑपरेशन के बाद सीमा सुरक्षा बलों ने भारत-नेपाल बॉर्डर पर चेकिंग अभियान और अधिक सख्त कर दिया है ताकि भविष्य में इस तरह की अवैध घुसपैठ और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को पूरी तरह से रोका जा सके।