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देशभर में बारिश का कहर: केंद्र ने 7 राज्यों को जारी किए ₹2,117 करोड़, असम-ओडिशा से गुजरात तक राहत और बचाव अभियान तेज

देश के कई हिस्सों में इस समय मानसून राहत नहीं बल्कि बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। कहीं बादल फटने की घटनाओं ने तबाही मचाई है तो कहीं लगातार हो रही बारिश से नदियां उफान पर हैं। कई राज्यों में बाढ़, भूस्खलन और सड़क संपर्क टूटने से सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) के तहत सात राज्यों के लिए कुल 2,117 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की है। इस राशि का उद्देश्य राहत, पुनर्वास और बचाव कार्यों को तेज करना है।

इस सहायता का लाभ हिमाचल प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, गुजरात, महाराष्ट्र और ओडिशा को मिलेगा। लगातार बदलते मौसम और भारी वर्षा ने इन राज्यों में प्रशासन की चुनौती बढ़ा दी है।

जम्मू-कश्मीर में बादल फटने के बाद हालात बिगड़े

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के छात्रू क्षेत्र में शुक्रवार देर रात बादल फटने की घटना ने भारी नुकसान पहुंचाया। पहाड़ी से आए मलबे और बड़े पत्थरों ने कई मकानों और दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। कई वाहन भी मलबे में दब गए। इस घटना के कारण किश्तवाड़-अनंतनाग राष्ट्रीय राजमार्ग कुछ समय तक पूरी तरह बंद रहा।

भारी बारिश और सड़क बंद होने से अमरनाथ यात्रा भी प्रभावित हुई। वहीं जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने के कारण हजारों यात्री फंस गए। यात्रियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए रेलवे ने तीन विशेष ट्रेनों का संचालन किया, जिनकी मदद से करीब 2,200 लोगों को निकाला गया।

असम में सरकार ने राहत पैकेज का किया ऐलान

असम इस बार की बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल है। शिवसागर और चराईदेव जिले सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए कई अहम फैसलों की घोषणा की है।

राज्य सरकार ने बताया है कि दोनों जिलों के लोगों को एक वर्ष के लिए भूमि कर से राहत दी जाएगी। इसके अलावा जिन घरेलू उपभोक्ताओं की मासिक बिजली खपत 300 यूनिट से कम है, उनके जुलाई महीने के बिजली बिल भी माफ किए जाएंगे। यह कर राहत एक अप्रैल से प्रभावी मानी जाएगी।

बाढ़ से प्रभावित परिवारों के मकानों की मरम्मत के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 15 हजार रुपये की अंतरिम सहायता दी जाएगी। यह राशि तीन से पांच अगस्त के बीच वितरित की जाएगी। जिन लोगों के घर अभी रहने योग्य नहीं हैं, उन्हें 10 अगस्त को अतिरिक्त 10 हजार रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे।

आंगनवाड़ी केंद्रों को भी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में प्रत्येक क्षतिग्रस्त केंद्र की मरम्मत के लिए 2 से 2.5 लाख रुपये की सहायता देने का निर्णय लिया गया है।

सरकारी सहायता के पात्र परिवारों में शिवसागर के लगभग 55 हजार, चराईदेव के 20 हजार, जोरहाट के 7 हजार तथा गोलाघाट के करीब 3 हजार परिवार शामिल किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने दो अगस्त से लगातार तीन दिनों तक सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों का दौरा करने का कार्यक्रम भी बनाया है ताकि राहत कार्यों की समीक्षा की जा सके।

बीमा दावों को लेकर केंद्र का विशेष निर्देश

असम में भारी नुकसान को देखते हुए केंद्र सरकार ने बीमा कंपनियों को भी निर्देश जारी किए हैं कि प्रभावित जिलों में दावों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए।

बीमा कंपनियों ने प्रक्रिया को आसान बनाने का भरोसा दिया है। दावे के लिए आवश्यक दस्तावेजों की संख्या कम की जाएगी और सरल आवेदन फॉर्म लागू किया जाएगा। जीवन बीमा मामलों में यदि किसी मृतक का नाम सरकारी सूची में दर्ज है तो उसी आधार पर दावा स्वीकार किया जाएगा। ऐसे मामलों में मृत्यु प्रमाण पत्र की अनिवार्यता नहीं रखी जाएगी, जिससे पीड़ित परिवारों को राहत मिल सके।

केरल में भूस्खलन ने बढ़ाई चिंता

दक्षिण भारत का केरल भी लगातार बारिश से गंभीर संकट का सामना कर रहा है। कई इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं, जिनमें अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है जबकि छह अन्य लोगों की तलाश जारी है।

प्रशासन ने राज्यभर में 65 राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां 1,465 से अधिक लोगों को सुरक्षित ठहराया गया है। भारतीय मौसम विभाग ने राज्य के 12 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। खराब मौसम को देखते हुए दो अगस्त को आयोजित होने वाली राज्य पात्रता परीक्षा भी स्थगित कर दी गई।

हिमाचल प्रदेश में लगातार गिर रहे पहाड़

हिमाचल प्रदेश में बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का सिलसिला जारी है। कुमारसैन इलाके में पहाड़ी खिसकने से एक मकान क्षतिग्रस्त हो गया। वहीं धर्मशाला के पास हुए एक अन्य भूस्खलन में दो युवक घायल हो गए। इनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।

लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी सड़कों पर यात्रा करना जोखिम भरा बना हुआ है और प्रशासन लोगों से सावधानी बरतने की अपील कर रहा है।

मणिपुर और असम में नदियां बनीं खतरा

पूर्वोत्तर राज्यों में भी मानसून का असर बेहद गंभीर दिखाई दे रहा है। मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में लानवा नदी में आई बाढ़ के दौरान एक व्यक्ति बह गया।

असम में स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। अब तक बाढ़ से 82 लोगों की जान जा चुकी है जबकि लगभग 1.93 लाख लोग किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए हैं। कई गांवों का संपर्क टूट गया है और राहत एजेंसियां लगातार बचाव कार्यों में लगी हुई हैं।

गुजरात में हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया

गुजरात के दक्षिणी और मध्य हिस्सों में लगातार तेज बारिश जारी है। कई जिलों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर 27 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

राज्य की आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।

ओडिशा में महानदी का जलस्तर बढ़ा

ओडिशा में लगातार वर्षा के कारण महानदी समेत कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। स्थिति को देखते हुए हीराकुंड बांध के 22 गेट खोल दिए गए हैं।

बाढ़ का असर राज्य के करीब आठ लाख लोगों पर पड़ा है। दस जिलों में अलर्ट जारी किया गया है और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शनिवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हवाई सर्वेक्षण कर प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। उन्होंने भद्रक, जाजपुर, बालासोर, मयूरभंज और क्योंझर जिलों का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि इन इलाकों में धीरे-धीरे पानी उतरने लगा है और अगले दो दिनों में हालात और बेहतर होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि जैसे ही बाढ़ का पानी कम होगा, पुनर्वास और पुनर्निर्माण का काम प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाएगा।

अधिकारियों को 72 घंटे में सर्वे का निर्देश

मुख्यमंत्री माझी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जहां-जहां से पानी उतर जाए, वहां 72 घंटे के भीतर नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाए ताकि प्रभावित लोगों को समय पर सहायता मिल सके।

इस वर्ष की बाढ़ से राज्य के 20 तटीय जिले प्रभावित हुए हैं। उत्तरी ओडिशा में सालंदी, ब्राह्मणी, बैतरणी, जलाका और बूढ़ाबलंग नदियों में आई बाढ़ से 1,300 से अधिक मकानों को नुकसान पहुंचा है।

विशेष राहत आयुक्त ने बताया कि महानदी के निचले क्षेत्र के 10 जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इसके अलावा अंगुल, बौध, संबलपुर, सुबर्णपुर और नयागढ़ जिलों में भी प्रशासन को विशेष सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

राहत और बचाव अभियान लगातार जारी

ओडिशा सरकार ने राहत कार्यों को तेज करने के लिए राज्य आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) की 17 टीमें, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की सात टीमें और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग की 129 टीमों को मैदान में उतारा है।

राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 26 लाख रुपये की तत्काल स्वीकृति भी प्रदान की है। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, भोजन, चिकित्सा सहायता और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम लगातार जारी है।

देशभर में मानसून के इस दौर ने साफ कर दिया है कि कई राज्यों के सामने अभी भी चुनौती बनी हुई है। मौसम विभाग लगातार निगरानी कर रहा है, जबकि केंद्र और राज्य सरकारें राहत एवं पुनर्वास कार्यों को तेज करने में जुटी हैं ताकि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिल सके।

फोटो- एएनआई