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The Scoopp

 

नीट परीक्षा विवाद पर फिर होगी निर्णायक बातचीत, शिक्षा सुधारों के बीच मंत्री के इस्तीफे की मांग बनी सबसे बड़ी अड़चन

नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और आंदोलन कर रहे संगठन सीजेपी (काकरोच जनता पार्टी) के बीच जारी बातचीत अभी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है। शुक्रवार को नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में दोनों पक्षों के बीच लगभग दो घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई, लेकिन किसी साझा सहमति का ऐलान नहीं किया गया। अब शनिवार को एक और दौर की बैठक प्रस्तावित है, जिसे इस पूरे विवाद के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार और आंदोलनकारी संगठन के बीच कई बिंदुओं पर चर्चा सकारात्मक दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि आंदोलनकारियों द्वारा रखी गई तीन प्रमुख मांगों में से दो पर केंद्र सरकार ने सहमति जताने के संकेत दिए हैं। हालांकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग अभी भी सबसे बड़ा विवादित विषय बनी हुई है। आंदोलनकारी इस मांग को अपने आंदोलन का अहम हिस्सा बता रहे हैं, जबकि सरकार इसे स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रही।

शुक्रवार को हुई वार्ता में सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह शामिल हुए। वहीं सीजेपी का प्रतिनिधित्व संगठन के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने किया। दोनों पक्षों के बीच यह लगातार तीसरी औपचारिक बैठक थी। बैठक समाप्त होने के बाद दोनों पक्षों ने सार्वजनिक रूप से संयमित बयान दिए और आगे की बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई।

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और युवाओं की चिंताओं को लेकर गंभीर चर्चा हुई है। उन्होंने बताया कि सरकार सभी सुझावों पर विचार कर रही है और अगले दौर की बातचीत में शेष मुद्दों पर भी समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। अब सबकी नजर शनिवार दोपहर होने वाली अगली बैठक पर टिकी हुई है, जहां लंबे समय से चल रहे इस गतिरोध को समाप्त करने की कोशिश होगी।

इधर सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई बड़े फैसलों की तैयारी तेज कर दी है। नीट पेपर लीक जैसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के उद्देश्य से सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित तरीकों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सरकार का मानना है कि मौजूदा कानून को और अधिक कठोर बनाकर परीक्षा माफिया पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है।

सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संशोधित विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी। संभावना है कि आगामी संसदीय कार्यवाही के दौरान इसे संसद में पेश किया जाएगा। नए प्रावधानों के लागू होने के बाद पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा में धोखाधड़ी जैसे मामलों में पहले की तुलना में कहीं अधिक कड़ी सजा का प्रावधान होगा।

प्रस्तावित संशोधन के तहत दोषियों के लिए न्यूनतम सजा पांच वर्ष तक की जा सकती है, जबकि गंभीर मामलों में दस वर्ष तक की जेल और दस करोड़ रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि कड़े दंड का उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना और परीक्षा प्रक्रिया में विश्वास बहाल करना है।

केवल कानून को सख्त बनाने तक ही सरकार सीमित नहीं रहना चाहती। जानकारी के अनुसार पेपर लीक जैसे मामलों की त्वरित जांच के लिए विशेष जांच तंत्र विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही ऐसे मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन की भी तैयारी की जा रही है ताकि दोषियों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया का लाभ न मिल सके और कम समय में सजा सुनिश्चित की जा सके।

प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई शुरू हो चुकी है। उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को उनके पद से हटाए जाने का फैसला इसी दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का संदेश साफ है कि परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार की लापरवाही या जवाबदेही की कमी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

नीट विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी युवाओं से सीधे संवाद करने का प्रयास किया। शुक्रवार देर रात उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर छात्रों और युवाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि परीक्षा सुधारों को लेकर युवाओं से मिले सुझाव और प्रतिक्रियाएं सरकार के लिए महत्वपूर्ण हैं तथा इन पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में युवाओं से सकारात्मक भागीदारी बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज और युवाओं की सहभागिता से ही संभव है। उनके अनुसार सरकार का लक्ष्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है जिस पर हर अभ्यर्थी बिना किसी संदेह के भरोसा कर सके।

प्रधानमंत्री के हालिया वीडियो संदेश को सोशल मीडिया पर भी व्यापक प्रतिक्रिया मिली। बड़ी संख्या में लोगों ने इसे देखा और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर अपनी राय साझा की। सरकार इसे युवाओं के साथ संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देख रही है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) में भी बड़े पैमाने पर प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं। जांच के दौरान संदिग्ध भूमिका पाए जाने के बाद 47 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया गया है। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि इन अधिकारियों के खिलाफ आगे की जांच भी जारी है और आवश्यक होने पर आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है।

बताया जा रहा है कि हटाए गए अधिकारियों में बड़ी संख्या संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों की थी। सरकार अब एजेंसी की कार्यप्रणाली को पूरी तरह नए ढांचे में ढालने की योजना पर काम कर रही है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम हो सके।

एनटीए के पुनर्गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के आधार पर संगठन में नई नियुक्तियों की तैयारी चल रही है। यूपीएससी के माध्यम से महाप्रबंधक स्तर के 16 युवा पेशेवरों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। सरकार का उद्देश्य अनुभवी और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना है जो राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं का संचालन अधिक प्रभावी तरीके से कर सके।

इसके अलावा परीक्षा प्रणाली को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए कई अन्य सुधारों की रूपरेखा भी तैयार की गई है। इनमें देशभर में समर्पित परीक्षा केंद्रों का निर्माण, स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति, उन्नत साइबर सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षित परीक्षा सॉफ्टवेयर का विकास प्रमुख रूप से शामिल हैं। कैबिनेट स्तर पर ऐसे लगभग 25 सुधारों की पहचान की गई है, जिन पर एक महीने के भीतर काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये सभी सुधार समयबद्ध तरीके से लागू किए जाते हैं तो प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि केवल कानून और प्रशासनिक बदलाव पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि तकनीकी निगरानी, जवाबदेही और नियमित ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं को भी समान रूप से मजबूत करना होगा।

दूसरी ओर आंदोलनकारी संगठन का कहना है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होती और उनकी सभी मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त करने पर विचार नहीं किया जाएगा। संगठन के नेताओं का दावा है कि लाखों छात्रों का भविष्य इस मुद्दे से जुड़ा हुआ है और इसलिए वे किसी भी अधूरे समाधान को स्वीकार नहीं करेंगे।

अब सभी की निगाहें शनिवार को होने वाली अगली वार्ता पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि यदि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कोई नया रास्ता निकलता है या दोनों पक्ष किसी वैकल्पिक समाधान पर सहमत होते हैं, तो लंबे समय से जारी यह विवाद समाप्त हो सकता है। वहीं यदि इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनती है तो आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना बनी रहेगी।

फिलहाल सरकार परीक्षा सुधारों और सख्त कानूनों के माध्यम से छात्रों का भरोसा वापस जीतने की कोशिश कर रही है, जबकि आंदोलनकारी जवाबदेही तय होने तक अपनी मांगों पर अडिग हैं। ऐसे में आगामी बैठक इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।