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नौतपा आज से शुरू: क्यों जरूरी मानी जाती है इसकी तपिश? जानिए इन 9 दिनों का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

ज्येष्ठ महीने में पड़ने वाला नौतपा इस बार 25 मई से शुरू हो गया है। सोमवार दोपहर 3:44 बजे सूर्य देव ने रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश किया, जिसके साथ ही नौ दिनों तक चलने वाले नौतपा की शुरुआत मानी गई। पंचांग के अनुसार सूर्य 8 जून तक रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे, लेकिन शुरुआती 9 दिनों यानी 25 मई से 2 जून तक का समय नौतपा कहलाता है।

इस साल नौतपा कई मायनों में खास माना जा रहा है, क्योंकि यह अधिकमास के दौरान पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक ऐसा संयोग बहुत कम देखने को मिलता है। वहीं नौतपा के दौरान दो मंगलवार आने से भीषण गर्मी और तेज लू चलने के संकेत बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि तापमान 48 से 50 डिग्री तक पहुंच सकता है।

हालांकि नौतपा का नाम सुनते ही लोग घबराने लगते हैं, लेकिन शास्त्रों और परंपराओं में इसे प्रकृति के लिए बेहद जरूरी माना गया है। मान्यता है कि अगर इन दिनों धरती पर्याप्त नहीं तपे, तो फसलों और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ सकता है।

पुरानी कहावत में भी नौतपा की अहमियत बताई गई है—

“दो मूसा, दो कातरा, दो तीड़ी, दो ताय।
दो की बादी जल हरै, दो विश्वर दो वाय।।”

इसका अर्थ यह बताया जाता है कि नौतपा के दौरान तेज गर्मी और लू कई हानिकारक तत्वों को नियंत्रित करती है। शुरुआती दिनों में गर्मी न पड़े तो चूहों की संख्या बढ़ सकती है। इसके बाद फसल खराब करने वाले कीट पनपने लगते हैं। आगे चलकर टिड्डियों के अंडे नष्ट नहीं होते और बीमारियां फैलाने वाले जीवाणु भी जीवित रह जाते हैं। वहीं सांप-बिच्छुओं की संख्या बढ़ने और तेज आंधियों से फसलों को नुकसान होने की आशंका भी बढ़ जाती है।

ज्योतिष और लोक मान्यताओं में नौतपा को धरती की शुद्धि और संतुलन का समय माना गया है। इसलिए विशेषज्ञ लोगों को घबराने की बजाय सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। इस दौरान धूप से बचाव, पर्याप्त पानी और शरीर को ठंडा रखने वाली चीजों का सेवन जरूरी माना जाता है।

(Photo : AI Generated)