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पंजाब के 50 वार्डों की चुनावी प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर रद्द, अब न्यायिक निगरानी में होगा दोबारा मतदान

पंजाब के स्थानीय निकाय चुनाव से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 50 वार्डों में हुए चुनाव को रद्द करते हुए नए सिरे से मतदान कराने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले से पटियाला और मोगा जिले के उन वार्डों में दोबारा चुनाव का रास्ता साफ हो गया है, जहां चुनाव प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने, चुनाव मैदान से बाहर करने और अन्य गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि इन सभी 50 वार्डों में पूरी चुनाव प्रक्रिया छह सप्ताह के भीतर पूरी की जानी होगी। खास बात यह है कि इस बार होने वाली चुनावी प्रक्रिया सामान्य प्रशासनिक निगरानी में नहीं, बल्कि न्यायिक निगरानी के विशेष इंतजाम के तहत कराई जाएगी। अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से एक सप्ताह के भीतर एक मॉनिटरिंग कमेटी गठित करने को कहा है, जिसकी अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश 28 सितंबर को पारित किया गया था, जिसे 7 अक्टूबर को सार्वजनिक किया गया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। पीठ ने अदालत द्वारा नियुक्त तथ्य-जांच आयोग की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद संबंधित 50 वार्डों के चुनाव को प्रभावित यानी वेटीटेड मानते हुए दोबारा चुनाव कराने का निर्देश दिया। अदालत के सामने पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करने पर राज्य की ओर से कोई आपत्ति नहीं होने की बात कही। इसके बाद शीर्ष अदालत ने आयोग के निष्कर्षों को स्वीकार करते हुए नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दिया।

इस पूरे मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता में एक तथ्य-जांच आयोग गठित किया था। आयोग को दिसंबर 2024 में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान सामने आई शिकायतों की पड़ताल करनी थी। जांच के दौरान आयोग ने दावों, हलफनामों, सरकारी जवाबों, सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग, तस्वीरों, मतदाता रिकॉर्ड और चुनाव तथा पुलिस अधिकारियों सहित अलग-अलग पक्षों के बयानों का अध्ययन किया। रिपोर्ट में नामांकन प्रक्रिया के दौरान व्यापक स्तर पर रुकावट डाले जाने की बात सामने आई। आयोग के अनुसार कुछ मामलों में नामांकन पत्र छीने जाने, फाड़े जाने या नष्ट किए जाने तथा उम्मीदवारों को धमकाने, हिरासत में लेने या उनके साथ मारपीट किए जाने जैसे आरोपों के समर्थन में सामग्री मिली।

आयोग की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कुल 50 वार्डों को नए चुनाव के लिए चिन्हित किया। इनमें 28 वार्ड पटियाला नगर निगम के हैं, जबकि मोगा जिले के धर्मकोट और बाघापुराना नगर निकायों के 22 वार्ड शामिल हैं। बाघापुराना नगर परिषद के सभी 15 वार्डों का चुनाव रद्द किया गया है। वहीं धर्मकोट नगर परिषद के सात वार्डों में दोबारा चुनाव होगा। इस तरह मोगा जिले के दोनों स्थानीय निकायों में कुल 22 वार्ड सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दायरे में आए हैं।

पटियाला की बात करें तो नगर निगम के वार्ड नंबर 1, 4, 6, 12, 14, 16, 22, 26, 28, 32, 33, 34, 36, 37, 38, 40, 41, 43, 44, 45, 46, 48, 50, 51, 52, 53, 55 और 57 में चुनाव फिर से कराया जाएगा। आयोग की जांच में अलग-अलग वार्डों में अलग-अलग प्रकार की अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। कुछ वार्डों में विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने की बात सामने आई, जबकि कुछ मामलों में उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से कथित तौर पर जबरन बाहर किए जाने की बात कही गई। वार्ड 34 के मामले में भी एक उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करने से रोके जाने का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया।

आयोग ने पटियाला के 13 वार्डों में यह निष्कर्ष दर्ज किया कि विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया था। इन वार्डों में 1, 12, 32, 33, 36, 41, 43, 44, 45, 48, 50, 51 और 52 शामिल हैं। इसके अलावा 14 अन्य वार्डों में कुछ विशेष विपक्षी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से कथित तौर पर जबरन बाहर किए जाने की बात सामने आई, हालांकि आयोग यह निर्धारित नहीं कर सका कि यदि वे उम्मीदवार चुनाव लड़ते तो परिणाम बदलता या नहीं। इन वार्डों में 4, 6, 14, 16, 22, 26, 28, 37, 38, 40, 46, 53, 55 और 57 शामिल हैं।

मामला केवल नामांकन प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा। आयोग ने पटियाला के वार्ड 15 और 58 में फर्जी या एक से अधिक बार मतदान तथा डराने-धमकाने से संबंधित गंभीर सामग्री मिलने की भी बात कही थी। हालांकि इन अनियमितताओं के कारण चुनाव परिणाम निश्चित रूप से प्रभावित हुए या नहीं, इसे लेकर आयोग ने अलग निष्कर्ष दर्ज किया। दूसरी ओर वार्ड 7, 18 और 19 से संबंधित कुछ आरोप पर्याप्त प्रमाण के अभाव में साबित नहीं हो सके। इसके बावजूद आयोग ने कुल 50 वार्डों के चुनाव को प्रभावित मानते हुए दोबारा चुनाव की सिफारिश की, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

धर्मकोट नगर परिषद के जिन सात वार्डों में फिर से चुनाव होना है, उनमें वार्ड नंबर 1, 2, 3, 4, 7, 9 और 13 शामिल हैं। आयोग ने इन क्षेत्रों में नामांकन प्रक्रिया से जुड़ी गंभीर शिकायतों की जांच की थी। रिपोर्ट में जबरन नामांकन रोकने, उम्मीदवारों पर दबाव डालकर नामांकन वापस कराने या नामांकन को गलत तरीके से खारिज करने जैसी परिस्थितियों का उल्लेख किया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब इन वार्डों में भी पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू होगी।

बाघापुराना का मामला इन सभी निकायों में सबसे व्यापक है, क्योंकि वहां नगर परिषद के सभी 15 वार्डों का चुनाव दोबारा कराया जाना है। आयोग ने यहां विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से व्यवस्थित तरीके से रोकने से संबंधित निष्कर्ष दर्ज किए थे। इसके चलते पूरे निकाय की चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित माना गया। अब बाघापुराना के सभी 15 वार्डों में नई चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी और उम्मीदवारों को फिर से नामांकन का अवसर मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बार दोबारा होने वाले चुनाव को लेकर कई अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी तय किए हैं। अदालत ने कहा है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एक सप्ताह के भीतर सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में मॉनिटरिंग कमेटी गठित करें। इस कमेटी के गठन के बाद ही नए चुनाव का कार्यक्रम जारी किया जाएगा। इसके अलावा हाईकोर्ट के वरिष्ठ बार सदस्यों में से दो या तीन लोगों को पर्यवेक्षक के तौर पर नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है। नामांकन दाखिल करने से लेकर उनकी जांच, चुनाव चिह्न आवंटन और मतदान तक की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी इन पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में कराई जाएगी। रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाएगा और मॉनिटरिंग कमेटी को सौंपा जाएगा।

अदालत ने पंजाब सरकार को भी चुनावी व्यवस्था को लेकर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। नामांकन शुरू होने से पहले सरकार को प्रत्येक वार्ड में चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की सूची मॉनिटरिंग कमेटी को देनी होगी। इसके साथ ही डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस यानी डीएसपी और उससे ऊपर के पद के पुलिस अधिकारियों की तैनाती की जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी। यदि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी व्यक्ति या अधिकारी पर हस्तक्षेप अथवा रुकावट डालने की शिकायत आती है, तो उसे मॉनिटरिंग कमेटी के समक्ष रखा जा सकेगा। कमेटी शिकायत की जांच करेगी और आरोप सही पाए जाने पर रिपोर्ट हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेज सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि केवल मतदान और मतगणना पूरी हो जाने के बाद परिणाम घोषित नहीं किए जाएंगे। पूरी चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद मॉनिटरिंग कमेटी को अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पेश करनी होगी। इसके आधार पर मुख्य न्यायाधीश को संतुष्ट होना होगा कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हुए हैं। इसके बाद ही परिणामों की घोषणा की जा सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन मामलों की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए दिए गए ये निर्देश भविष्य के उपचुनावों के लिए सामान्य मिसाल नहीं माने जाएंगे।

यह विवाद पंजाब में दिसंबर 2024 में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के बाद सामने आया था। विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि कुछ उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया और चुनावी प्रक्रिया में दबाव तथा बाधा पैदा की गई। याचिकाओं में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी से जुड़े लोगों, पुलिसकर्मियों और अन्य व्यक्तियों पर भी आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों की न्यायिक जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बाद में तथ्य-जांच आयोग गठित किया। आयोग की विस्तृत पड़ताल के बाद अब शीर्ष अदालत ने 50 वार्डों में चुनाव फिर से कराने का फैसला दिया है।

इस मामले को लेकर भाजपा ने भी चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे और मामला पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तथा बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। भाजपा की ओर से आरोप लगाया गया था कि विपक्षी उम्मीदवारों के नामांकन पत्र छीनने या फाड़ने और उन्हें चुनाव मैदान में उतरने से रोकने जैसी घटनाएं हुईं। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा आदेश का आधार राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि अदालत द्वारा नियुक्त तथ्य-जांच आयोग की रिपोर्ट और उसके निष्कर्ष हैं। अदालत ने उसी रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए 50 वार्डों के चुनाव को रद्द कर नए सिरे से मतदान कराने का निर्देश दिया है।

अब अगला चरण हाईकोर्ट की निगरानी समिति के गठन से शुरू होगा। समिति बनने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम जारी होगा और उसके बाद नामांकन से लेकर परिणाम तक पूरी प्रक्रिया निर्धारित निगरानी व्यवस्था में आगे बढ़ेगी। छह सप्ताह की समयसीमा के भीतर 50 वार्डों में चुनाव पूरा करना होगा। इस आदेश के साथ सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि जिन वार्डों में पिछली चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठे थे, वहां दोबारा होने वाला मतदान अधिक पारदर्शी व्यवस्था और निगरानी के बीच संपन्न हो।