पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। जांच के बीच मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन बुधवार को चंडीगढ़ स्थित CBI कार्यालय में पूछताछ के लिए नहीं पहुंचे। उन्हें दोपहर 2:30 बजे एजेंसी के सामने पेश होने के लिए कहा गया था, लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बताया गया कि घुमन को समन विधिवत प्राप्त नहीं हुआ था। इसी दौरान मामले से जुड़ी 251 पन्नों की FIR सार्वजनिक होने को लेकर घुमन ने विशेष CBI अदालत का दरवाजा खटखटाया। दूसरी ओर, CBI ने देर शाम कथित बिचौलिये नितिन गोहल के खरड़ स्थित फ्लैट में दोबारा तलाशी ली। एजेंसी की यह कार्रवाई मुख्य रूप से दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले संभावित सबूतों की पड़ताल से जुड़ी बताई जा रही है।
इस पूरे मामले की शुरुआत पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 5 अक्टूबर के आदेश से हुई, जिसके बाद CBI ने भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की जांच अपने हाथ में लेते हुए FIR दर्ज की। इसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने पंजाब और चंडीगढ़ में कई स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। CBI की FIR में राजबीर सिंह घुमन के अलावा नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और आरएस नागरा के नाम शामिल हैं। इनके अलावा कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों का भी उल्लेख किया गया है। FIR में लगाए गए आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं और इनका न्यायिक रूप से अंतिम निर्धारण होना बाकी है।
251 पन्नों की FIR में कई तरह के मामलों का उल्लेख
CBI की विस्तृत FIR में कथित तौर पर सरकारी कामकाज में प्रभाव के इस्तेमाल से जुड़े कई पहलुओं का जिक्र किया गया है। इसमें अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग, विभागीय नियमों में संभावित बदलाव, नीतिगत निर्णय, टेंडर की शर्तें, लाइसेंस से जुड़े मामले, जमीन और संपत्ति से संबंधित विवाद तथा प्रशासनिक मंजूरियों जैसे विषय शामिल हैं। FIR में यह भी उल्लेख है कि कुछ मामलों में आर्थिक लाभ के बदले सरकारी फैसलों और प्रक्रियाओं को प्रभावित करने का कथित प्रयास किया गया।
जांच एजेंसी ने कथित तौर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से मिले दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को भी अपनी जांच का हिस्सा बनाया है। FIR में ED की ओर से पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई सामग्री का उल्लेख किया गया है। इसी सामग्री में सामने आई कथित WhatsApp चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक बातचीत को भी जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। CBI अब इन डिजिटल संवादों के जरिए अलग-अलग लोगों के बीच संपर्क, सरकारी फैसलों और कथित आर्थिक लेन-देन के बीच संबंधों की जांच कर रही है।
नितिन गोहल के फ्लैट पर फिर पहुंची CBI टीम
जांच के इसी सिलसिले में बुधवार रात करीब आठ बजे CBI की टीम खरड़ के वेस्टर्न टावर स्थित नितिन गोहल के फ्लैट पर दोबारा पहुंची। कई घंटे तक चली इस तलाशी के दौरान दस्तावेजों और डिजिटल सामग्री की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी की दिलचस्पी उन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और रिकॉर्ड में बताई जा रही है, जिनसे कथित संपर्कों, लेन-देन या सरकारी मामलों में हस्तक्षेप से संबंधित जानकारी मिल सकती है।
इससे पहले CBI ने मंगलवार को भी कई स्थानों पर तलाशी ली थी। तलाशी अभियान के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन, दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त किए जाने की बात सामने आई थी। अब इन उपकरणों से हासिल डेटा को जांच टीम तकनीकी तरीके से खंगाल रही है। इसमें संदेशों, संपर्कों, फाइलों और दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड को संबंधित आरोपों से जोड़कर देखा जा रहा है।
पूछताछ के लिए नहीं पहुंचे घुमन
CBI ने राजबीर सिंह घुमन को बुधवार दोपहर 2:30 बजे चंडीगढ़ कार्यालय में पेश होने के लिए कहा था। हालांकि, वह वहां नहीं पहुंचे। मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने कहा कि उन्हें समन औपचारिक रूप से प्राप्त नहीं हुआ था। इसी आधार पर घुमन की ओर से पूछताछ में शामिल न होने की बात सामने आई।
घुमन के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर अब कानूनी मोर्चे पर भी विवाद शुरू हो गया है। उनका कहना है कि CBI ने FIR को सार्वजनिक रूप से अपलोड करने से छूट मांगी थी और अदालत ने यह राहत दे दी थी। इसके बावजूद 251 पन्नों का दस्तावेज मीडिया और सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध हो गया। घुमन की ओर से अदालत में इसी मुद्दे को उठाते हुए जांच एजेंसी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है।
FIR लीक होने के आरोप पर CBI से मांगा जवाब
विशेष CBI अदालत में दाखिल अर्जी में घुमन के वकील ने कहा कि जांच की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए CBI ने FIR ऑनलाइन अपलोड नहीं करने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने एजेंसी की मांग स्वीकार भी की थी। इसके बाद भी FIR की प्रति सार्वजनिक होने पर घुमन की ओर से सवाल उठाए गए हैं।
उनकी याचिका में यह भी मांग की गई है कि FIR सार्वजनिक होने तक की पूरी प्रक्रिया और उससे जुड़े रिकॉर्ड अदालत के सामने रखे जाएं। घुमन के वकील ने इसे अदालत के आदेश की अवहेलना बताया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मामले पर सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने CBI को नोटिस जारी करते हुए 12 अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
जांच में WhatsApp चैट और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड अहम
इस मामले में डिजिटल साक्ष्य जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक FIR में ED की जांच के दौरान सामने आई कई WhatsApp चैट का उल्लेख है। इन बातचीत में कथित तौर पर ट्रांसफर-पोस्टिंग और आर्थिक लेन-देन से संबंधित बातें होने का दावा किया गया है। CBI इन चैट की वास्तविकता, संदर्भ और उसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान सहित कई पहलुओं की जांच कर रही है।
एजेंसी का फोकस केवल किसी एक दस्तावेज या बातचीत पर नहीं है, बल्कि अलग-अलग स्रोतों से मिले रिकॉर्ड को आपस में मिलाकर देखने पर है। तलाशी के दौरान मिले डिजिटल उपकरणों, ED से प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक सामग्री और FIR में दर्ज आरोपों के बीच संभावित कड़ियों की जांच की जा रही है। इस प्रक्रिया से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित तौर पर किन लोगों के बीच संपर्क था और क्या किसी सरकारी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए कोई समन्वय किया गया था।
मामले में छह प्रमुख नाम, कई आरोपों की जांच
CBI की FIR में नामजद छह लोगों में राजबीर सिंह घुमन, नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और आरएस नागरा शामिल हैं। FIR में 2023 से 2026 के बीच कथित गतिविधियों का उल्लेख किया गया है। एजेंसी ने आरोपों को आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार से जुड़े प्रावधानों के तहत दर्ज किया है।
FIR के अनुसार, जांच का दायरा केवल ट्रांसफर-पोस्टिंग तक सीमित नहीं है। नीतिगत फैसलों, विभागीय नियमों, टेंडर, लाइसेंस, जमीन से जुड़े मामलों, संपत्ति विवादों और अन्य प्रशासनिक मंजूरियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। दस्तावेज में कथित आर्थिक लाभ के बदले प्रभाव इस्तेमाल किए जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। रिपोर्टों में नितिन गोहल से 20.98 लाख रुपये नकद बरामद होने का भी उल्लेख है। हालांकि, इन सभी आरोपों की पुष्टि जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में होनी है।
पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पंजाब सरकार ने CBI जांच के निर्देश देने वाले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर को उपलब्ध सामग्री के आधार पर CBI को FIR दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है।
इस वजह से अब एक तरफ CBI की जांच आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर जांच के आधार और हाईकोर्ट के आदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी चुनौती भी जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालतों की कार्यवाही और CBI की जांच, दोनों ही इस मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
CM मान का दावा- तलाशी में कुछ आपत्तिजनक नहीं मिला
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने CBI की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि कई घंटे तक चली तलाशी के बावजूद एजेंसी को ऐसा कुछ नहीं मिला जिसे लेकर आपत्तिजनक माना जा सके। मान ने यह भी कहा कि CBI को सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए कि तलाशी के दौरान आखिर क्या बरामद हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी माहौल से पहले केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई के जरिए विपक्षी नेताओं और उनके करीबियों को परेशान किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी सरकार किसी भी जांच से पीछे नहीं हटेगी और जांच का सामना करेगी।
इस मामले में CBI और मुख्यमंत्री कार्यालय के पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के साथ कानूनी लड़ाई भी आगे बढ़ रही है। एक तरफ जांच एजेंसी डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है, वहीं घुमन FIR सार्वजनिक होने और प्रक्रिया से जुड़े सवाल अदालत में उठा रहे हैं।
घुमन के घर पर कार्रवाई के दौरान फूल बरसाने का मामला भी चर्चा में
CBI की कार्रवाई के दौरान संगरूर के गांव घराचों में एक अलग घटनाक्रम भी सामने आया। घुमन के आवास पर टीम के पहुंचने के समय कुछ विपक्षी नेताओं और समर्थकों की ओर से CBI की गाड़ी पर फूल बरसाए जाने की बात सामने आई। पुलिस ने बाद में कुछ लोगों को हिरासत में लिया।
इसी दौरान भवानीगढ़ थाने के SHO यशपाल शर्मा को निलंबित किए जाने की खबर भी सामने आई। हालांकि, भवानीगढ़ के DSP सतनाम सिंह ने स्पष्ट किया कि SHO का निलंबन पुराने मामले में ड्यूटी से जुड़ी लापरवाही के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश से हुआ है। पुलिस के मुताबिक इस कार्रवाई को CBI टीम पर फूल बरसाने की घटना से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। इस तरह पुलिस ने दोनों घटनाओं को अलग-अलग बताया है।
फिलहाल पंजाब में यह मामला जांच, अदालत और राजनीति—तीनों स्तरों पर आगे बढ़ रहा है। CBI के सामने अब जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों का विश्लेषण करने की चुनौती है, जबकि घुमन की ओर से FIR सार्वजनिक होने की प्रक्रिया पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है। 12 अक्टूबर को CBI के जवाब और आगे की अदालत की कार्यवाही से इस विवाद के कानूनी पक्ष पर कुछ और स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। इस बीच, FIR में लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं और किसी भी आरोपी की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत के अंतिम निर्णय के बाद ही तय होगी।