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पंजाब चुनाव में वारिस पंजाब दे की नई रणनीति: पांच सीटों पर उम्मीदवार घोषित, दो प्रत्याशी जेल में बंद

पंजाब की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल लगातार तेज हो रही है। इसी कड़ी में अमृतपाल सिंह से जुड़े अकाली दल (वारिस पंजाब दे) ने चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाते हुए पांच और विधानसभा सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया है। पार्टी की ओर से घोषित उम्मीदवारों में दो ऐसे नाम भी शामिल हैं, जो इस समय जेल में बंद हैं और उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी एनएसए के तहत कार्रवाई की गई है। इस फैसले के बाद पार्टी की चुनावी रणनीति और उसके राजनीतिक मुद्दों को लेकर चर्चा और बढ़ गई है।

अमृतसर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने इन पांच उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक किए। पार्टी ने अजनाला विधानसभा सीट से दलजीत सिंह कलसी को मैदान में उतारने का फैसला किया है। वहीं मोगा विधानसभा क्षेत्र से गुरमीत सिंह बुक्कनवाला को प्रत्याशी बनाया गया है। दोनों उम्मीदवारों के खिलाफ एनएसए के तहत मामला दर्ज है और दोनों फिलहाल जेल में हैं। इसके बावजूद पार्टी ने उन्हें विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाकर अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट करने की कोशिश की है।

इन दो सीटों के अलावा तीन अन्य विधानसभा क्षेत्रों के लिए भी पार्टी ने अपने उम्मीदवार तय कर दिए हैं। गिल विधानसभा सीट से दर्शन सिंह शिवालिक को चुनाव मैदान में उतारा गया है। कपूरथला विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी जगजीत सिंह बाबा जग्गा को दी गई है, जबकि कोटकपूरा सीट से रछपाल सिंह पार्टी के प्रत्याशी होंगे। इस तरह पांच नए नामों के साथ पार्टी ने पंजाब के अलग-अलग इलाकों में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया है।

पार्टी के इस ताजा ऐलान को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि पार्टी उन मुद्दों और परिवारों को चुनावी राजनीति के केंद्र में लाने की कोशिश कर रही है, जिनका संबंध सिख पंथक राजनीति और पंजाब के संवेदनशील राजनीतिक इतिहास से रहा है। उम्मीदवारों के चयन से भी पार्टी की प्राथमिकताओं का संकेत मिलता है।

पहले ही एक सीट पर घोषित हो चुका है उम्मीदवार

वारिस पंजाब दे इससे पहले भी विधानसभा चुनाव के लिए एक प्रत्याशी की घोषणा कर चुका है। पार्टी ने बस्सी पठाना विधानसभा सीट से सतवंत सिंह को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया था। सतवंत सिंह का नाम इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि वह केहर सिंह के बेटे हैं। केहर सिंह पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगा था और उन्हें इस मामले में दोषी ठहराया गया था।

सतवंत सिंह को टिकट देने के फैसले के साथ ही पार्टी ने यह संकेत दिया था कि वह ऐसे परिवारों को राजनीतिक मंच देने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिन्हें वह अपने नजरिए से कौम और पंथ के लिए योगदान देने वाला मानती है। अब पांच और उम्मीदवारों की घोषणा के बाद पार्टी की इसी रणनीति को और विस्तार मिलता दिखाई दे रहा है।

उम्मीदवारों के ऐलान के दौरान तरसेम सिंह ने भी पार्टी की प्राथमिकताओं पर बात की। उन्होंने कहा कि चुनाव में ऐसे परिवारों को आगे लाने पर जोर दिया जा रहा है, जिन्होंने कौम के लिए कुछ करने का प्रयास किया है। पार्टी के इस रुख से साफ है कि वह केवल पारंपरिक चुनावी मुद्दों के बजाय पंथक पहचान और सिख अधिकारों से जुड़े विषयों को भी अपने अभियान का अहम हिस्सा बनाना चाहती है।

अमृतपाल सिंह को पहले ही बनाया जा चुका है मुख्यमंत्री पद का चेहरा

वारिस पंजाब दे ने करीब चार महीने पहले अमृतपाल सिंह को 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया था। यह घोषणा ऐसे समय में हुई थी जब अमृतपाल सिंह जेल में बंद हैं। पार्टी का दावा है कि उनकी राजनीतिक सक्रियता जेल से ही जारी रहेगी और आने वाले विधानसभा चुनाव में भी वह जेल में रहते हुए चुनाव लड़ सकते हैं।

अमृतपाल सिंह इस समय असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जेल में रहते हुए खडूर साहिब संसदीय सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें जीत मिली और वह लोकसभा पहुंचने में सफल रहे। हालांकि जेल में बंद होने के कारण वह संसद की नियमित कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले पाए हैं।

लोकसभा चुनाव में जेल से चुनाव लड़कर जीत हासिल करने के बाद अमृतपाल सिंह की राजनीतिक स्थिति पंजाब में अलग तरह से उभरी। अब उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव में भी इसी तरह की राजनीतिक रणनीति को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में अमृतपाल सिंह का नाम सामने रखने के बाद पार्टी लगातार अपने संभावित उम्मीदवारों की सूची बढ़ा रही है।

जेल में बंद दो नेताओं को टिकट क्यों अहम?

अजनाला से दलजीत सिंह कलसी और मोगा से गुरमीत सिंह बुक्कनवाला को उम्मीदवार बनाए जाने का फैसला इस घोषणा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। दोनों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई हुई है और वे वर्तमान में जेल में हैं। ऐसे में उनकी उम्मीदवारी केवल चुनावी टिकट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे पार्टी के राजनीतिक संदेश से जोड़कर भी देखा जा सकता है।

पार्टी की ओर से पंथक मुद्दों, सिख अधिकारों और युवाओं से संबंधित विषयों को चुनावी बहस में प्रमुखता देने की बात कही जा रही है। ऐसे में जेल में बंद व्यक्तियों को उम्मीदवार बनाना पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वह अपने समर्थकों के बीच इन मुद्दों को अधिक प्रभावी ढंग से उठाना चाहती है।

हालांकि चुनाव लड़ने के लिए किसी व्यक्ति की कानूनी पात्रता और नामांकन की स्थिति संबंधित चुनावी एवं कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर करती है। इसलिए अंतिम तौर पर उम्मीदवारों की स्थिति नामांकन के समय लागू नियमों और संबंधित मामलों की कानूनी स्थिति से भी जुड़ी होगी।

पांच सीटों पर पार्टी की नई तस्वीर

पार्टी ने जिन पांच सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं, उनमें पंजाब के अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व दिखाई देता है। अजनाला और कोटकपूरा जैसे क्षेत्रों से लेकर मोगा, गिल और कपूरथला तक पार्टी ने अपना आधार बढ़ाने की कोशिश की है। यह संकेत देता है कि संगठन केवल किसी एक इलाके तक सीमित रहने के बजाय राज्य के अलग-अलग हिस्सों में चुनावी नेटवर्क खड़ा करना चाहता है।

अजनाला से दलजीत सिंह कलसी और मोगा से गुरमीत सिंह बुक्कनवाला को टिकट दिया गया है। गिल से दर्शन सिंह शिवालिक, कपूरथला से जगजीत सिंह बाबा जग्गा और कोटकपूरा से रछपाल सिंह पर पार्टी ने भरोसा जताया है। इससे पहले बस्सी पठाना से सतवंत सिंह का नाम सामने आ चुका है।

यदि पार्टी आने वाले महीनों में इसी गति से उम्मीदवारों की घोषणा करती है, तो चुनाव से काफी पहले उसका संभावित संगठनात्मक ढांचा स्पष्ट होने लगेगा। इससे कार्यकर्ताओं को अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में तैयारी शुरू करने का अवसर भी मिलेगा।

पंजाब की सियासत में पंथक मुद्दों पर जोर

पंजाब की राजनीति में पंथक मुद्दों की अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वारिस पंजाब दे भी अपने राजनीतिक अभियान में सिख अधिकारों, पंथक मामलों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देने की बात कर रहा है। पार्टी का प्रयास है कि इन मुद्दों को विधानसभा चुनाव की बहस का हिस्सा बनाया जाए।

अमृतपाल सिंह की राजनीति भी शुरुआत से ही इन्हीं विषयों के आसपास केंद्रित रही है। लोकसभा चुनाव में खडूर साहिब से उनकी जीत के बाद उनके राजनीतिक प्रभाव पर बहस और तेज हुई थी। अब विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किए जाने और लगातार उम्मीदवार उतारे जाने से यह स्पष्ट है कि संगठन पंजाब की चुनावी राजनीति में लंबी पारी खेलने की तैयारी कर रहा है।

हालांकि पार्टी के सामने कई राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौतियां भी हैं। अभी तक उसका राजनीतिक दल के तौर पर औपचारिक पंजीकरण नहीं हुआ है। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया में संगठन की कानूनी और प्रशासनिक स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा राज्य की राजनीति में पहले से मौजूद बड़े दलों के बीच अपनी जगह बनाना भी पार्टी के लिए आसान नहीं होगा।

2027 में किस तरह की होगी टक्कर?

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं और अभी चुनाव में काफी समय बाकी है। इसके बावजूद राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। वारिस पंजाब दे की ओर से लगातार उम्मीदवारों की घोषणा इसी शुरुआती तैयारी का हिस्सा है। पार्टी का फोकस यदि पंथक मुद्दों और युवाओं के सवालों पर रहता है, तो आने वाले समय में इन्हीं विषयों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।

अमृतपाल सिंह के जेल में रहने के बावजूद पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया है। अब दो जेल में बंद नेताओं को विधानसभा चुनाव का टिकट देकर पार्टी ने एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश दिया है। हालांकि इन उम्मीदवारों की वास्तविक चुनावी भूमिका आगे की कानूनी परिस्थितियों और चुनावी नियमों पर निर्भर करेगी।

फिलहाल पार्टी ने छह विधानसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम सामने रख दिए हैं। बस्सी पठाना के बाद अब अजनाला, मोगा, गिल, कपूरथला और कोटकपूरा में भी चेहरे तय हो चुके हैं। इससे 2027 के चुनाव के लिए वारिस पंजाब दे की शुरुआती तस्वीर बनने लगी है।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ती है, किन मुद्दों को अपना मुख्य चुनावी एजेंडा बनाती है और अमृतपाल सिंह की गैरमौजूदगी में चुनाव अभियान को किस तरह आगे बढ़ाती है। फिलहाल पांच नए उम्मीदवारों की घोषणा ने पंजाब की चुनावी राजनीति में इस संगठन की सक्रियता को जरूर बढ़ा दिया है।