पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्र राजनीति के लिहाज से इस बार का छात्र संघ चुनाव काफी अहम रहा। अध्यक्ष पद पर एक बार फिर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के उम्मीदवार ने बाजी मार ली है। ABVP प्रत्याशी अंकित बिढान ने 2879 वोट हासिल कर अध्यक्ष पद अपने नाम किया। उनकी जीत के साथ ही विश्वविद्यालय में लगातार दूसरी बार ABVP का अध्यक्ष चुना गया है। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद संगठन के समर्थकों में खासा उत्साह देखने को मिला और कैंपस में जश्न का माहौल बन गया।
अंकित बिढान की जीत को सिर्फ एक छात्र नेता की चुनावी सफलता के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। ABVP ने इसे युवाओं के बीच संगठन की स्वीकार्यता और छात्र राजनीति में अपनी मजबूत होती स्थिति से जोड़कर पेश किया है। खास बात यह है कि चुनाव से पहले स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (SOI) ने भी अंकित बिढान को अपना समर्थन दिया था। ऐसे में अध्यक्ष पद का यह मुकाबला शुरू से ही काफी चर्चा में रहा।
कौन हैं अंकित बिढान?
अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने वाले अंकित बिढान मूल रूप से हरियाणा के जींद जिले से ताल्लुक रखते हैं। उनकी शुरुआती उच्च शिक्षा जींद में हुई, जहां से उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी का रुख किया और यहां के लॉ विभाग से कानून की पढ़ाई की।
कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी उन्होंने अकादमिक क्षेत्र से अपना रिश्ता बनाए रखा। फिलहाल अंकित बिढान पंजाब यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल इंक्लूजन में रिसर्च स्कॉलर के तौर पर पीएचडी कर रहे हैं। छात्र राजनीति के साथ-साथ उनका रिसर्च से जुड़ाव भी उन्हें विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच एक अलग पहचान देता है।
अंकित बिढान लंबे समय से छात्र राजनीति में सक्रिय हैं। वह वर्ष 2021 से ABVP के साथ जुड़े हुए हैं। संगठन के साथ कई वर्षों तक काम करने के बाद उन्हें इस बार अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतारा गया था। चुनाव में उन्हें छात्रों का पर्याप्त समर्थन मिला और आखिरकार उन्होंने 2879 वोटों के साथ जीत दर्ज की।
जीत के बाद क्या बोले अंकित बिढान?
अध्यक्ष पद का परिणाम अपने पक्ष में आने के बाद अंकित बिढान ने अपनी जीत को व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने इसे पूरी Gen-Z की जीत बताया। उनका कहना था कि चुनाव परिणाम ने यह दिखाया है कि नई पीढ़ी का ABVP और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति विश्वास कायम है।
उन्होंने छात्रों की ओर से मिले समर्थन के लिए आभार जताते हुए कहा कि अब उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को सामने रखना होगी। उनके मुताबिक, छात्रों ने उन पर भरोसा जताया है और इस भरोसे को काम के जरिए मजबूत करना उनकी प्राथमिकता रहेगी।
बिढान के बयान से यह भी संकेत मिला कि वह छात्र राजनीति को केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं रखना चाहते। उनका जोर विद्यार्थियों की समस्याओं को उठाने और उनके समाधान के लिए काम करने पर रहेगा। अध्यक्ष के तौर पर अब उनके सामने विश्वविद्यालय के छात्रों की अलग-अलग मांगों और मुद्दों को प्रशासन तक पहुंचाने की चुनौती होगी।
लगातार दूसरी बार ABVP के खाते में अध्यक्ष पद
पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव में ABVP के लिए यह लगातार दूसरी बड़ी सफलता है। पिछले साल भी संगठन के उम्मीदवार गौरव वीर सोहल ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की थी। उस चुनाव में ABVP के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह पंजाब यूनिवर्सिटी में संगठन की अध्यक्ष पद पर पहली जीत थी।
पिछले चुनाव में गौरव वीर सोहल को 3148 वोट मिले थे। उन्होंने स्टूडेंट फ्रंट के उम्मीदवार सुमित शर्मा को 488 वोटों के अंतर से हराया था। इसके बाद इस साल भी ABVP ने अध्यक्ष पद पर अपना दबदबा कायम रखा और अंकित बिढान के जरिए लगातार दूसरी बार यह पद हासिल कर लिया।
दो साल लगातार अध्यक्ष पद पर जीत ABVP के लिए विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने का संकेत है। परिणाम घोषित होने के बाद संगठन से जुड़े छात्रों और समर्थकों ने जीत का जश्न मनाया। दूसरी ओर, इस नतीजे ने कैंपस की छात्र राजनीति में ABVP की भूमिका को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
SOI के समर्थन से मुकाबला हुआ दिलचस्प
इस बार के चुनाव की एक अहम बात यह भी रही कि अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले SOI ने अंकित बिढान को समर्थन दिया। SOI को अकाली दल से जुड़े छात्र संगठन के तौर पर जाना जाता है। ऐसे में ABVP और SOI के बीच चुनाव से पहले बनी राजनीतिक समझ ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया था।
दोनों संगठनों के साथ आने को पंजाब की व्यापक छात्र राजनीति के संदर्भ में भी देखा गया। चुनाव परिणाम के बाद ABVP के उम्मीदवार की जीत ने इस गठजोड़ को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, छात्रसंघ चुनाव का मूल केंद्र छात्रों से जुड़े मुद्दे ही होते हैं, लेकिन राजनीतिक संगठनों से जुड़े छात्र संगठनों की सक्रियता के कारण इनके परिणामों का असर कैंपस से बाहर भी चर्चा का विषय बनता है।
उपप्रधान पद पर अरमान सिंह भिंडर की जीत
अध्यक्ष पद के अलावा उपप्रधान पद का परिणाम भी सामने आया। इस पद पर पीयूडीएफ के अरमान सिंह भिंडर ने जीत दर्ज की। अरमान सिंह भिंडर मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ के रहने वाले हैं।
शैक्षणिक रूप से भी उनका विश्वविद्यालय से मजबूत जुड़ाव है। वह फिलहाल उर्दू में एमए की पढ़ाई कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कानून की डिग्री भी हासिल की है। छात्रसंघ में उपप्रधान पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद अब उनसे भी विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाने की उम्मीद रहेगी।
इस तरह छात्रसंघ के प्रमुख पदों पर अलग-अलग छात्र संगठनों की मौजूदगी ने परिषद के भीतर भी एक विविध राजनीतिक समीकरण तैयार किया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नवनिर्वाचित पदाधिकारी छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर किस तरह साथ मिलकर काम करते हैं।
सांसद सतनाम सिंह संधू ने बताया बड़ा राजनीतिक संदेश
अंकित बिढान की जीत पर राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल चुनाव में ABVP उम्मीदवार की जीत को पंजाब के युवाओं के बीच भाजपा के प्रति बढ़ते भरोसे का संकेत बताया।
संधू ने लगातार दूसरी बार ABVP उम्मीदवार के अध्यक्ष बनने को महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश करार दिया। उनके अनुसार विश्वविद्यालय के छात्रों ने अपने मतदान के जरिए युवाओं की राजनीतिक सोच को लेकर बनाए जा रहे कई तरह के भ्रम को दूर किया है।
उन्होंने कहा कि आज का युवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना चाहता है। उनके मुताबिक, युवा अपने भविष्य को विकास, रोजगार और नए अवसरों से जोड़कर देख रहा है। उन्होंने छात्र राजनीति के इस परिणाम को इसी बदलती सोच से जोड़ते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी।
कैंपस से बाहर भी चर्चा में आया चुनाव परिणाम
पंजाब यूनिवर्सिटी लंबे समय से पंजाब और चंडीगढ़ के युवाओं के बीच बहस, विचार-विमर्श और छात्र राजनीति का एक प्रमुख केंद्र रही है। यहां होने वाले छात्रसंघ चुनाव केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इनके परिणामों को अक्सर पंजाब और चंडीगढ़ की व्यापक युवा राजनीति के संदर्भ में भी देखा जाता है।
सतनाम सिंह संधू ने भी इसी पहलू को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी का चुनाव परिणाम कैंपस से बाहर भी एक संदेश देता है। उनके मुताबिक, पंजाब का युवा टकराव और निराशा की राजनीति की जगह विकास, निवेश, नवाचार और समृद्धि जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देना चाहता है।
हालांकि, नवनिर्वाचित अध्यक्ष अंकित बिढान के सामने अब चुनावी जीत को जमीनी काम में बदलने की चुनौती होगी। छात्रों ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना है, इसलिए विश्वविद्यालय से जुड़े शैक्षणिक, प्रशासनिक और छात्र कल्याण के मुद्दों पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव का यह परिणाम ABVP के लिए लगातार दूसरी बड़ी उपलब्धि बनकर सामने आया है। अंकित बिढान ने अध्यक्ष पद जीतकर संगठन की पिछली सफलता को आगे बढ़ाया है, जबकि उपप्रधान पद पर अरमान सिंह भिंडर की जीत ने परिषद के समीकरण को अलग रूप दिया है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नई छात्र परिषद छात्रों की समस्याओं और उनकी मांगों को किस तरह उठाती है और चुनाव के दौरान किए गए दावों को कितना प्रभावी तरीके से जमीन पर उतार पाती है।