Skip to main content

The Scoopp

 

प्रयागराज बॉर्डर पर पटाखा फैक्ट्री में खौफनाक धमाका: 11 की मौत, कई घर मलबे में तब्दील; लाइसेंस रद्द होने के बाद भी चल रहा था कारोबार

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और कौशांबी की सीमा पर सोमवार दोपहर हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। कौशांबी जिले के मोहम्मदपुर गांव में संचालित पटाखा फैक्ट्री में अचानक हुए धमाके से 11 लोगों की जान चली गई। मृतकों में आठ बच्चे भी शामिल हैं। हादसे ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। एक रेलवे कर्मचारी का परिवार तो लगभग पूरी तरह खत्म हो गया और परिवार की सबसे बड़ी बेटी के बचने से ही घर में किसी के जीवित होने की उम्मीद बची।

धमाका इतना तेज था कि घटनास्थल के आसपास मौजूद कई मकानों की दीवारें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। कुछ घर पूरी तरह ढह गए, जबकि कई मकानों की दीवारों में बड़े-बड़े छेद हो गए। विस्फोट के बाद इलाके में धूल और धुएं का ऐसा गुबार छा गया कि कुछ समय तक आसपास कुछ भी साफ नजर नहीं आ रहा था। ग्रामीणों के मुताबिक, धमाके की आवाज करीब दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी।

600 वर्गफीट में चल रही थी फैक्ट्री, आसपास बस रही थी नई आबादी

पुलिस के अनुसार जिस इमारत में पटाखा बनाने का काम हो रहा था, वह करीब 600 वर्गफीट क्षेत्र में बनी एक मंजिला संरचना थी। आरोप है कि यहां पटाखों और बारूद का कारोबार चल रहा था, जबकि फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही रद्द हो चुका था। इसके बावजूद गतिविधियां जारी रहने का मामला सामने आया है।

हादसे के आसपास नई बस्ती भी विकसित हो रही थी। इसी वजह से विस्फोट की चपेट में आसपास बने मकान भी आ गए। करीब 100 मीटर के दायरे में मौजूद आठ घरों को नुकसान पहुंचा। बताया गया कि पांच से छह मकान इतने क्षतिग्रस्त हुए कि वे पूरी तरह गिर गए। कई मकानों की दीवारों में करीब आठ फीट तक के छेद हो गए।

हादसे के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया। पुलिस, एयरफोर्स, NDRF और SDRF के करीब 200 जवान मौके पर पहुंचे। मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए करीब 10 बुलडोजरों की मदद से मलबा हटाया गया।

एयरफोर्स स्टेशन भी ज्यादा दूर नहीं

घटना स्थल की संवेदनशीलता इस वजह से भी बढ़ जाती है क्योंकि मोहम्मदपुर गांव प्रयागराज सीमा के पास है और मनौरी स्थित एयरफोर्स स्टेशन यहां से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर है। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी।

विस्फोट का असर सिर्फ आसपास के मकानों तक सीमित नहीं रहा। घटनास्थल से करीब 500 मीटर की दूरी पर गुजरने वाले प्रयागराज-कानपुर रेल मार्ग की ओवरहेड इलेक्ट्रिक यानी OHE लाइन भी प्रभावित हो गई। इससे रेल यातायात पर असर पड़ा और कानपुर से प्रयागराज की तरफ आने वाली ट्रेनों का संचालन लगभग डेढ़ घंटे तक बाधित रहा।

रेलवे के इंजीनियरों ने मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त लाइन की जांच की और मरम्मत के बाद रेल संचालन को दोबारा शुरू कराया गया।

चारपाई पर घायलों को अस्पताल ले जाते दिखे ग्रामीण

विस्फोट के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग तुरंत मदद के लिए पहुंचे। कई झुलसे हुए लोगों को ग्रामीण चारपाई और अन्य साधनों से बाहर निकालते नजर आए। धुएं और मलबे के बीच बचावकर्मियों ने काफी देर तक लोगों की तलाश की।

हादसे में घायल पांच लोगों को प्रयागराज के स्वरूप रानी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं एक बच्ची पीहू का इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है। प्रशासन की ओर से घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रत्यक्षदर्शी ने बिजली की चिंगारी को बताया वजह

हादसे की वास्तविक वजह अभी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं हुई है। हालांकि स्थानीय महिला रानी ने दावा किया कि जिस इमारत में पटाखे रखे गए थे, उसके ऊपर से बिजली के तार गुजर रहे थे। उनके अनुसार तारों से चिंगारी निकली और इसके बाद वहां रखे बारूद ने आग पकड़ ली। देखते ही देखते जोरदार विस्फोट हो गया।

फैक्ट्री के अंदर विस्फोट के समय कितने लोग मौजूद थे, इसकी भी तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी। पुलिस और प्रशासनिक टीमें मामले की जांच में जुटी हैं।

एक के बाद एक परिवार उजड़ गए

इस हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों से सामने आई है, जिन्होंने एक ही घटना में अपने कई सदस्यों को खो दिया। मंजीत कुमार के परिवार में उनके दो बच्चे प्रियांजलि और प्रवीन सिंह की मौत हुई। वहीं गया प्रसाद के चार बच्चों जाह्नवी, आदित्य, अमित और रवि की भी हादसे में जान चली गई। गया प्रसाद की पत्नी अनीता, जिनकी उम्र करीब 42 वर्ष बताई गई है, इस घटना में घायल हुई हैं। उन्होंने पटाखा फैक्ट्री के मालिक के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। अनीता ने पुलिस के सामने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि हादसे में उनका पूरा परिवार खत्म हो गया।

सबसे ज्यादा हृदयविदारक मामला रेलकर्मी विक्रम के परिवार का सामने आया। बताया गया कि विक्रम खाना खाने के लिए अपने घर आए थे। इसी दौरान हुए धमाके में विक्रम, उनकी पत्नी अंजू और दोनों बेटों अंश तथा शिवांश की मौत हो गई।

परिवार की सबसे बड़ी बेटी संजना उस समय घर पर नहीं थी। वह किराने की दुकान से कुछ सामान लेने गई हुई थी। इसी वजह से वह हादसे में बच गई। एक परिवार के चार सदस्यों की मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है।

रात में गोदाम पर चला बुलडोजर

प्रशासन ने हादसे के बाद अवैध निर्माण और पटाखा भंडारण के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। घटना के करीब आठ घंटे बाद रात लगभग साढ़े सात बजे फैक्ट्री से करीब 400 मीटर की दूरी पर मौजूद एक गोदाम को बुलडोजर की मदद से ढहा दिया गया।

DM अमित पाल शर्मा ने स्पष्ट किया कि मामले में जिम्मेदार लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर उनकी संपत्ति कुर्क किए जाने की बात कही।

प्रभारी मंत्री कृष्णा पासवान भी घटनास्थल पर पहुंचीं और अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।

मंत्री ने कहा- दो साल से चल रही थी फैक्ट्री

प्रभारी मंत्री कृष्णा पासवान के मुताबिक शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि पटाखा फैक्ट्री करीब दो वर्षों से संचालित थी। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री का लाइसेंस रद्द हो चुका था। इसके बावजूद यदि वहां पटाखा निर्माण या भंडारण का काम जारी था, तो यह गंभीर लापरवाही का मामला है।

मंत्री ने कहा कि जांच के बाद जिस भी व्यक्ति की भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस मामले में किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई

हादसे के बाद स्थानीय स्तर पर निगरानी और कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे हैं। शुरुआती जांच में लापरवाही के आरोप में पिपरी थाना प्रभारी विकास सिंह, चायल चौकी प्रभारी अमित द्विवेदी और पूर्व चायल चौकी प्रभारी मनीष पाल को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

इसके अलावा बीट पर तैनात सिपाही जितेंद्र कुमार और कृष्ण कुमार को निलंबित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी कमियां और जिम्मेदारियां सामने आएंगी, उनके आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।

अस्पताल पहुंचे डिप्टी सीएम केशव मौर्य

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज के SRN अस्पताल पहुंचकर हादसे में घायल लोगों का हाल जाना। उन्होंने कहा कि एक ही परिवार के कई सदस्यों की मौत बेहद दुखद और पीड़ादायक है।

उन्होंने कहा कि सरकार के लिए फिलहाल घायलों की जान बचाना सबसे पहली प्राथमिकता है। इलाज में किसी भी तरह की कमी नहीं रहने दी जाएगी। डिप्टी सीएम ने बताया कि जिलाधिकारी और SSP को पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

PM और CM ने जताया दुख, मुआवजे का ऐलान

प्रयागराज-कौशांबी सीमा पर हुए इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दुख जताया है। सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता का ऐलान किया गया है।

प्रधानमंत्री राहत कोष से हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये देने की बात कही है।

फिलहाल प्रशासन की जांच का फोकस इस बात पर है कि रिहायशी इलाके के इतने करीब पटाखा फैक्ट्री किस तरह चल रही थी, लाइसेंस रद्द होने के बाद भी काम कैसे जारी रहा और सुरक्षा मानकों की निगरानी में कहां चूक हुई। जांच पूरी होने के बाद हादसे की असली वजह और जिम्मेदार लोगों की भूमिका पूरी तरह स्पष्ट होने की उम्मीद है।