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पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रा मौत मामले में बड़ा कदम, प्रशासन ने गठित की तीन सदस्यीय जांच कमेटी; सात दिन में देनी होगी रिपोर्ट

चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर में पीएचडी शोधार्थी ज्योति की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में यूटी प्रशासन ने अब औपचारिक जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। लंबे समय से उठ रही निष्पक्ष जांच की मांग के बीच जिला मजिस्ट्रेट, यूटी चंडीगढ़ ने मामले की पड़ताल के लिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रशासन की ओर से गठित तीन सदस्यीय समिति को पूरे घटनाक्रम की जांच कर एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

इस जांच का उद्देश्य केवल शोधार्थी की मौत के कारणों का पता लगाना ही नहीं है, बल्कि यह भी तय करना है कि घटना के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही, सुरक्षा में कमी या जिम्मेदारी की अनदेखी तो नहीं हुई। प्रशासन ने समिति को घटना से जुड़े हर पहलू की विस्तृत समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

तीन अधिकारियों की टीम करेगी पूरे मामले की जांच

जिला मजिस्ट्रेट की ओर से जारी आदेश के अनुसार जांच समिति की कमान यूटी समाज कल्याण विभाग के निदेशक नवीन रत्तू (डेनिक्स) को सौंपी गई है। उनके साथ चंडीगढ़ पुलिस के डीएसपी (ट्रैफिक) लक्ष्य पांडे (डैनिप्स) और यूटी इंजीनियरिंग विभाग के डिवीजन-1 के कार्यकारी अभियंता (इलेक्ट्रिकल) गुरप्रीत सिंह बैंस को सदस्य बनाया गया है।

समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह घटना से संबंधित सभी परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर जांच पूरी करे। अधिकारियों को यह पता लगाने को कहा गया है कि ज्योति की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे तत्काल एवं वास्तविक कारण क्या थे।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच का दायरा सीमित नहीं रखा जाएगा। घटना से जुड़े प्रत्येक पहलू की जांच की जाएगी ताकि किसी भी संभावित कमी या जिम्मेदारी की पहचान की जा सके।

सुरक्षा व्यवस्था और रखरखाव की भी होगी समीक्षा

मामले की जांच के दौरान समिति विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद सुरक्षा इंतजामों और रखरखाव व्यवस्था की भी समीक्षा करेगी। प्रशासन यह जानना चाहता है कि क्या परिसर में सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया जा रहा था या फिर किसी तरह की लापरवाही सामने आई।

इसके अलावा आपातकालीन स्थिति में प्रतिक्रिया देने वाली व्यवस्था की भी जांच की जाएगी। समिति यह देखेगी कि घटना के समय संबंधित विभागों और अधिकारियों की भूमिका क्या रही और क्या जरूरी कदम समय पर उठाए गए थे।

यदि जांच में सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी प्रणाली या रखरखाव से जुड़ी कोई कमी सामने आती है तो उसे रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। साथ ही ऐसी घटनाओं को भविष्य में रोकने के लिए सुधारात्मक कदमों का सुझाव भी समिति देगी।

घटना स्थल का निरीक्षण और रिकॉर्ड की जांच करेगी समिति

जांच को प्रभावी और निष्पक्ष बनाने के लिए समिति को कई अधिकार दिए गए हैं। समिति के सदस्य घटना स्थल का दौरा कर वहां की परिस्थितियों का निरीक्षण कर सकेंगे। इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच भी की जाएगी।

घटना से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों से बातचीत कर जानकारी जुटाई जाएगी। जरूरत पड़ने पर तकनीकी विशेषज्ञों की राय भी ली जा सकेगी, ताकि मामले के सभी पहलुओं को समझा जा सके।

प्रशासन ने समिति को निर्देश दिए हैं कि वह किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी या दस्तावेज को नजरअंदाज न करे और हर तथ्य की गहराई से जांच करे। रिपोर्ट में घटनाक्रम से जुड़ी पूरी स्थिति और जिम्मेदारी तय करने से संबंधित सभी बिंदुओं को शामिल किया जाना है।

पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन को जांच में सहयोग के निर्देश

जिला मजिस्ट्रेट ने पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन को जांच समिति के साथ पूरा सहयोग करने के आदेश दिए हैं। विश्वविद्यालय को निर्देश दिया गया है कि वह समिति को आवश्यक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी रिपोर्ट और अन्य संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए।

इसके साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन को जांच प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा कराने के लिए जरूरी प्रशासनिक सहायता भी उपलब्ध कराने को कहा गया है। सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को भी जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन का कहना है कि जांच में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए और समिति को सभी जरूरी जानकारियां समय पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट तैयार हो सके।

छात्रों और संगठनों ने उठाई थी निष्पक्ष जांच की मांग

गौरतलब है कि 28 जुलाई को पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर में पीएचडी शोधार्थी ज्योति की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। घटना के बाद विश्वविद्यालय के छात्रों और विभिन्न संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की मांग उठाई थी।

छात्रों का कहना था कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लगातार उठ रही मांगों के बाद यूटी प्रशासन ने मामले में मजिस्ट्रियल जांच का फैसला लिया है।

अब जांच समिति के सामने घटना से जुड़े कई सवालों के जवाब तलाशने की जिम्मेदारी होगी। समिति यह पता लगाएगी कि मौत किन परिस्थितियों में हुई, क्या सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त थी और क्या किसी विभाग या व्यक्ति की कोई भूमिका या लापरवाही सामने आती है।

रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

प्रशासन को उम्मीद है कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद मामले की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही या जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं, यदि सुरक्षा या व्यवस्था से जुड़ी कोई कमी सामने आती है तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नए दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं।

फिलहाल सभी की नजरें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। एक सप्ताह के भीतर आने वाली रिपोर्ट से यह साफ होने की उम्मीद है कि पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर में हुई इस घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और क्या किसी स्तर पर चूक हुई थी।