पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल चुनाव को लेकर सोमवार को कैंपस में सियासी हलचल अपने चरम पर रहेगी। छात्रसंघ चुनाव के लिए आज मतदान कराया जाएगा और इसी के साथ कई दिनों से चल रहा प्रचार अभियान अपने निर्णायक दौर में पहुंच जाएगा। अध्यक्ष पद की एक सीट के लिए चार प्रमुख उम्मीदवार आमने-सामने हैं। करीब 16,468 छात्र-छात्राएं अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर यह तय करेंगे कि इस बार पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति की कमान किसके हाथों में जाती है।
चुनाव को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ-साथ चंडीगढ़ पुलिस ने भी व्यापक तैयारियां की हैं। मतदान केंद्रों से लेकर मतगणना स्थल तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल के साथ वॉटर कैनन, वज्र वाहन और आंसू गैस पार्टी को भी तैयार रखा गया है। करीब 1100 पुलिसकर्मी सोमवार को सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे।
अध्यक्ष पद के चुनाव में एसैप के आदिल बराड़, एबीवीपी के अंकित बिढान, सत्थ के दर्शप्रीत सिंह और एनएसयूआई के गुरमन सिंह सिद्धू मैदान में हैं। चारों उम्मीदवारों ने चुनाव के अंतिम चरण में अपने-अपने समर्थकों के साथ वोटरों तक पहुंचने की कोशिश की। प्रचार का औपचारिक समय खत्म होने के बाद भी व्यक्तिगत स्तर पर छात्रों से संपर्क साधने का सिलसिला चलता रहा।
चार उम्मीदवारों के बीच अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला
इस बार अध्यक्ष पद का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चारों उम्मीदवारों के पीछे अलग-अलग छात्र संगठनों की ताकत है। चुनावी मैदान में मौजूद प्रत्याशियों ने अपने-अपने एजेंडे और संगठनात्मक नेटवर्क के आधार पर समर्थन जुटाने की कोशिश की है।
एसैप के आदिल बराड़ के समर्थकों ने हॉस्टल, विभागों और छात्र समूहों में संपर्क अभियान चलाया। सोशल मीडिया को भी प्रचार का अहम माध्यम बनाया गया। अंतिम समय तक वोटरों से व्यक्तिगत बातचीत और समर्थन की अपील पर जोर दिया गया।
एबीवीपी के अंकित बिढान ने भी चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में अपनी सक्रियता बढ़ाई। उनके समर्थकों ने विभिन्न विभागों और छात्र समूहों के बीच संपर्क मजबूत करने की कोशिश की। संगठन के नेटवर्क और व्यक्तिगत पहुंच के जरिए वोटरों को अपने पक्ष में करने पर जोर रहा।
एनएसयूआई के गुरमन सिंह सिद्धू ने भी युवा मतदाताओं के साथ सीधा संपर्क बढ़ाया। सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार को आगे बढ़ाने के साथ-साथ व्यक्तिगत नेटवर्क के जरिए समर्थन जुटाने का प्रयास किया गया।
वहीं सत्थ के दर्शप्रीत सिंह के समर्थक भी कैंपस के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय नजर आए। खासतौर पर उन विभागों पर ध्यान दिया गया जहां मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। ऐसे बड़े मतदाता समूहों को अपने पक्ष में करना सभी उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
9 हजार छात्राओं पर भी टिकी नजर
इस चुनाव में छात्राओं की संख्या चुनावी समीकरण में खास भूमिका निभा सकती है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कुल मतदाताओं में 7,467 छात्र और करीब 9,000 छात्राएं शामिल हैं। इसके अलावा एक ट्रांसजेंडर मतदाता भी सूची में दर्ज है।
कुल मतदाताओं में छात्राओं की संख्या अधिक होने के कारण सभी प्रत्याशियों ने महिला वोटरों तक अपनी पहुंच बनाने पर विशेष ध्यान दिया। चुनावी नतीजे में छात्राओं की भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। मतदान प्रतिशत किस दिशा में जाता है, इसका सीधा असर उम्मीदवारों के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
विभागवार मतदान केंद्र बनाए जाने की व्यवस्था से छात्रों को अपने संबंधित विभाग में वोट डालने की सुविधा मिलेगी। हालांकि जारी किए गए बूथ और मतदाता आंकड़ों में अंतिम समय तक बदलाव की संभावना बताई गई है।
यूआईईटी के 2,670 वोटरों पर सबसे ज्यादा फोकस
मतदाताओं की संख्या के लिहाज से यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी यानी यूआईईटी सबसे बड़ा केंद्र है। यहां करीब 2,670 मतदाता हैं और 24 बूथ प्रस्तावित किए गए हैं। इसके बाद यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज यानी यूआईएलएस का स्थान आता है, जहां लगभग 1,950 मतदाता हैं और 16 बूथ प्रस्तावित किए गए हैं।
लॉ विभाग में भी मतदाताओं की संख्या 1,064 के आसपास है। यही वजह है कि चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों और उनके समर्थकों ने इन बड़े विभागों को चुनावी रणनीति में खास महत्व दिया। ज्यादा वोटरों वाले विभागों में कुछ प्रतिशत वोटों का अंतर भी नतीजे को प्रभावित कर सकता है।
उम्मीदवारों की कोशिश रही कि अंतिम समय तक बड़े विभागों के छात्रों के साथ संपर्क बना रहे और मतदान के दिन समर्थकों को बूथ तक पहुंचाने की रणनीति भी प्रभावी ढंग से लागू की जा सके।
उपाध्यक्ष और सचिव पदों पर भी कड़ा मुकाबला
अध्यक्ष पद के अलावा छात्रसंघ के अन्य प्रमुख पदों के लिए भी चुनावी मुकाबला देखने को मिलेगा। उपाध्यक्ष पद के लिए एनएसयूआई की आकांक्षा ठाकुर, आईसा के अरमान सिंह, पीयूडीएफ के अरमान सिंह भिंडर, साखी की मनमीत कौर और आईएसओ के विपुल भादू चुनाव मैदान में हैं।
सचिव पद के लिए आर्यन सहारन, ध्यान सिंह और मुस्कान चौहान के बीच मुकाबला होगा। संयुक्त सचिव पद पर आमीन कौर, देवराज सिंह नैन, राम चंदर सिंह और विशाल बमल अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
इस तरह अध्यक्ष पद के साथ-साथ अन्य पदों पर भी छात्रों के वोट कई संगठनों की स्थिति स्पष्ट करेंगे। चुनाव परिणाम आने के बाद यह तस्वीर सामने आएगी कि कैंपस में किस संगठन का प्रभाव मजबूत हुआ है।
191 बूथों पर मतदान की तैयारी
मतदान को व्यवस्थित तरीके से कराने के लिए विश्वविद्यालय में 191 बूथ प्रस्तावित किए गए हैं। विभागों और मतदाता संख्या के आधार पर मतदान की व्यवस्था की गई है। प्रशासन की कोशिश है कि छात्रों को वोट डालने में परेशानी न हो और पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी कराई जाए।
मतदान समाप्त होने के बाद मतपेटियों और चुनाव सामग्री को निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतगणना स्थल तक पहुंचाया जाएगा। पंजाब यूनिवर्सिटी के जिम्नेजियम हॉल में वोटों की गिनती होगी। प्रशासन की योजना के अनुसार मतदान और मतगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सोमवार शाम तक चुनाव परिणाम सामने आ सकता है।
चुनाव के दौरान पुलिस की कड़ी निगरानी
छात्रसंघ चुनाव को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने भी सुरक्षा का व्यापक प्लान तैयार किया है। पंजाब यूनिवर्सिटी के अलावा शहर के विभिन्न कॉलेजों में होने वाली मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए कुल 1100 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
सुरक्षा व्यवस्था में डीएसपी और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी गई है। पुलिस की अलग-अलग टीमें मतदान केंद्रों, कैंपस के संवेदनशील स्थानों, मतगणना स्थल और आसपास के क्षेत्रों में तैनात रहेंगी।
मतदान खत्म होने के बाद मतगणना के दौरान भी सुरक्षा व्यवस्था जारी रहेगी। पुलिस का ध्यान खासतौर पर समर्थकों के बीच किसी विवाद या तनाव की स्थिति पैदा न हो, इस पर रहेगा। परिणाम घोषित होने के बाद भी कैंपस और आसपास के इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल मौजूद रहेगा।
वॉटर कैनन और वज्र भी रहेंगे तैयार
चुनाव के दौरान किसी भी अप्रिय परिस्थिति की आशंका को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा संसाधनों को भी तैयार रखा है। जरूरत पड़ने पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वॉटर कैनन और वज्र वाहन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा आंसू गैस पार्टी को भी तैनात रखा गया है।
पुलिस अधिकारियों का फोकस सिर्फ मतदान केंद्रों तक सीमित नहीं रहेगा। जिम्नेजियम हॉल में होने वाली मतगणना और रिजल्ट के बाद कैंपस में छात्रों और समर्थकों की संभावित भीड़ को देखते हुए भी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
सोशल मीडिया के बाद अब वोटिंग की बारी
रविवार को प्रचार अभियान समाप्त होने से पहले सभी उम्मीदवारों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। अंतिम समय में सोशल मीडिया पोस्ट, छात्रों से व्यक्तिगत संपर्क और इंडोर कैंपेनिंग के जरिए वोटरों को अपने पक्ष में करने का प्रयास हुआ। प्रचार समाप्त होने के बाद चुनावी शोर भले ही थम गया हो, लेकिन उम्मीदवारों और उनके समर्थकों की रणनीति मतदान तक जारी रही।
अब सोमवार को वोटिंग के साथ यह तय होगा कि किस उम्मीदवार को छात्रों का सबसे ज्यादा समर्थन मिलता है। खासतौर पर बड़े विभागों के वोट, छात्राओं की भागीदारी और कुल मतदान प्रतिशत चुनाव के नतीजे को प्रभावित करने वाले अहम कारक माने जा रहे हैं।
करीब 16.5 हजार मतदाताओं वाले इस चुनाव में अध्यक्ष पद की चारतरफा लड़ाई के साथ अन्य पदों के नतीजे भी छात्र राजनीति की दिशा तय करेंगे। शाम तक मतगणना पूरी होने के बाद साफ हो जाएगा कि पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस में इस बार किस संगठन और किस उम्मीदवार ने सबसे मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाई है।