तेलुगु सुपरस्टार राम चरण की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘पेद्दी’ आखिरकार सिनेमाघरों में पहुंच चुकी है और रिलीज के साथ ही इसने दर्शकों के बीच खास चर्चा छेड़ दी है। ‘आरआरआर’ के बाद राम चरण की अगली फिल्म को लेकर पहले से ही जबरदस्त उत्सुकता थी। अब फिल्म देखने के बाद यह साफ नजर आता है कि अभिनेता ने अपने किरदार को जीवंत बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
खेल से शुरू होकर संघर्ष तक पहुंचती है कहानी
फिल्म की कहानी एक सरकारी खेल अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी भूमिका बोमन ईरानी ने निभाई है। देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिक पदक दिलाने की चिंता उसे दूर-दराज के इलाकों तक ले जाती है, जहां उसकी मुलाकात पेद्दी नाम के युवक से होती है। पेद्दी ऐसे आदिवासी समुदाय से आता है जो विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह कटा हुआ है। बुनियादी सुविधाओं से वंचित इस समाज के लोगों का सरकारी रिकॉर्ड में भी कोई खास अस्तित्व नहीं है। इन्हीं कठिन परिस्थितियों के बीच पेद्दी अपनी प्रतिभा और जुनून के दम पर आगे बढ़ने का सपना देखता है।
सिर्फ स्पोर्ट्स ड्रामा नहीं, सामाजिक संदेश भी
फिल्म सतही तौर पर एक स्पोर्ट्स ड्रामा लगती है, लेकिन इसकी असली ताकत इसके सामाजिक मुद्दों में छिपी है। कहानी यह दिखाती है कि देश के कई हिस्सों में आज भी ऐसे समुदाय मौजूद हैं जो पहचान, अधिकार और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। निर्देशक बुची बाबू सना ने इस संवेदनशील विषय को मनोरंजन के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया है। वहीं कहानी के पीछे सुकुमार की लेखनी का प्रभाव भी स्पष्ट दिखाई देता है। फिल्म दर्शकों को केवल रोमांचित नहीं करती, बल्कि कई सवाल सोचने पर मजबूर करती है।
जान्हवी कपूर की भूमिका सीमित लेकिन प्रभावशाली
फिल्म में जान्हवी कपूर का स्क्रीन टाइम ज्यादा नहीं है, लेकिन उनके हिस्से में आए दृश्य कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं। हालांकि कुछ जगहों पर उनका प्रस्तुतीकरण ग्रामीण परिवेश से पूरी तरह मेल नहीं खाता, जिसकी वजह से किरदार की वास्तविकता थोड़ी प्रभावित होती है।
अभिनय में छाए राम चरण
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष राम चरण का प्रदर्शन है। एक साधारण युवक से लेकर संघर्षशील खिलाड़ी तक के सफर को उन्होंने प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा है। एक्शन, भावनात्मक दृश्य, डायलॉग डिलीवरी और शारीरिक परिवर्तन—हर स्तर पर उनका समर्पण दिखाई देता है। बोमन ईरानी, रवि किशन, दिव्येंदु शर्मा और उपेंद्र लिमये जैसे कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों में दमदार काम किया है, लेकिन फिल्म का केंद्रबिंदु पूरी तरह राम चरण ही बने रहते हैं।
फिल्म उठाती है कई असहज सवाल
‘पेद्दी’ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उन लोगों की कहानी सामने लाती है, जिनकी चर्चा अक्सर विकास की बहसों में नहीं होती। फिल्म बताती है कि आधुनिक भारत के बीच आज भी ऐसे इलाके मौजूद हैं जहां सड़क, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और पहचान जैसी मूलभूत चीजें भी लोगों की पहुंच से दूर हैं। कहानी यह सवाल उठाती है कि जब देश प्रगति की बात करता है, तब उन समुदायों का क्या होता है जो सरकारी व्यवस्था की नजरों से लगभग गायब हैं।
देखें या नहीं?
अगर आप सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि एक ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जो खेल, संघर्ष और सामाजिक यथार्थ को एक साथ पेश करती हो, तो ‘पेद्दी’ आपके लिए अच्छी पसंद साबित हो सकती है। राम चरण के प्रशंसकों के लिए यह फिल्म किसी खास तोहफे से कम नहीं है, जबकि सामान्य दर्शकों को भी यह कहानी सोचने पर मजबूर कर सकती है।
रेटिंग की बात करें तो ‘पेद्दी’ मनोरंजन और संदेश के संतुलन के कारण एक यादगार सिनेमाई अनुभव देने में सफल नजर आती है।