फीफा वर्ल्ड कप 2026 अब अपने सबसे अहम और रोमांचक चरण में प्रवेश कर चुका है। टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है और इस बार सबसे ज्यादा चर्चा यूरोपीय देशों के शानदार प्रदर्शन की हो रही है। करीब 32 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद ऐसा मौका आया है, जब अंतिम-8 में छह यूरोपीय टीमों ने अपनी जगह बनाई है। इससे पहले 1994 के विश्व कप में इतनी बड़ी संख्या में यूरोपीय टीमें क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थीं। इस उपलब्धि ने एक बार फिर दुनिया के फुटबॉल नक्शे पर यूरोप की ताकत को साबित कर दिया है।
क्वार्टर फाइनल में कुल आठ टीमें पहुंची हैं, जिनमें छह यूरोप से, एक दक्षिण अमेरिका से और एक अफ्रीका से है। दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप का प्रतिनिधित्व मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना कर रहा है, जबकि अफ्रीका की उम्मीदें एक बार फिर मोरक्को के कंधों पर टिकी हैं। इस बार एशिया की कोई भी टीम अंतिम आठ तक का सफर तय नहीं कर सकी, जिससे एशियाई फुटबॉल प्रशंसकों को निराशा हाथ लगी है।
विश्व कप के इतिहास पर नजर डालें तो यूरोप का ऐसा दबदबा बहुत कम देखने को मिला है। 1934 में आठों क्वार्टर फाइनलिस्ट यूरोपीय थे, जबकि 1958 और 1994 में सात-सात यूरोपीय टीमें अंतिम-8 तक पहुंची थीं। अब 2026 का संस्करण भी इस सूची में शामिल हो गया है, जहां छह यूरोपीय देशों ने जगह बनाकर नया अध्याय जोड़ दिया है।
इस बार क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने वाली टीमों में अर्जेंटीना, फ्रांस, इंग्लैंड, स्पेन, बेल्जियम, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और मोरक्को शामिल हैं। इन टीमों के बीच होने वाले मुकाबलों में दुनिया के कई सुपरस्टार खिलाड़ी मैदान पर उतरेंगे। लियोनेल मेसी, किलियन एमबाप्पे, हैरी केन, अर्लिंग हालैंड और लामिने यमाल जैसे सितारों पर दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों की नजरें रहेंगी।
फ्रांस और मोरक्को के बीच फिर होगी बड़ी टक्कर
पहले क्वार्टर फाइनल में फ्रांस और मोरक्को आमने-सामने होंगे। यह मुकाबला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि दोनों टीमें 2022 विश्व कप के सेमीफाइनल में भी भिड़ चुकी हैं। उस मुकाबले में फ्रांस ने जीत दर्ज कर फाइनल का टिकट हासिल किया था, जबकि मोरक्को ने अफ्रीकी फुटबॉल के इतिहास में पहली बार सेमीफाइनल तक पहुंचकर नया रिकॉर्ड बनाया था।
फ्रांस इस बार भी खिताब जीतने के सबसे मजबूत दावेदारों में गिना जा रहा है। टीम के कप्तान किलियन एमबाप्पे शानदार लय में हैं। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में वह 100 से ज्यादा मुकाबलों में 60 से अधिक गोल कर चुके हैं और फ्रांस के सबसे सफल गोल स्कोररों में शामिल हो चुके हैं। उनके अनुभव और तेज रफ्तार से किसी भी रक्षा पंक्ति के लिए चुनौती पैदा हो सकती है।
दूसरी तरफ मोरक्को पिछली उपलब्धियों से प्रेरित होकर इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतरेगा। टीम के कुछ खिलाड़ी चोट से जूझ रहे हैं, लेकिन प्रमुख स्ट्राइकर के खेलने की संभावना जताई जा रही है। मिडफील्ड और विंग से मोरक्को लगातार आक्रमण करने में सक्षम है। अचरफ हकीमी की रफ्तार और ब्राहिम डियाज की रचनात्मकता फ्रांस की मुश्किलें बढ़ा सकती है। हालांकि कागजों पर फ्रांस मजबूत नजर आता है, लेकिन मोरक्को पहले भी बड़े उलटफेर कर चुका है और एक बार फिर चौंकाने की क्षमता रखता है।
स्पेन और बेल्जियम के बीच अनुभव बनाम अनुशासन
दूसरे क्वार्टर फाइनल में स्पेन का सामना बेल्जियम से होगा। यह मुकाबला दो अलग-अलग शैली की टीमों के बीच खेला जाएगा। स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में अब तक अपनी रक्षा पंक्ति को अभेद्य बनाए रखा है। टीम ने एक भी गोल नहीं खाया है, जो उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई है।
स्पेन की डिफेंस लाइन में मार्क कुकुरेला, आयमेरिक लापोर्टे, पाउ कुबार्सी और पेड्रो पोरो ने शानदार तालमेल दिखाया है। वहीं गोलकीपर उनाई सिमोन लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। युवा स्टार लामिने यमाल भी टीम के आक्रमण को नई धार दे रहे हैं और विपक्षी टीमों के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं।
उधर बेल्जियम का हमला इस समय जबरदस्त फॉर्म में है। टीम ने पिछले दो मुकाबलों में कुल नौ गोल दागकर अपने इरादे साफ कर दिए हैं। अनुभवी गोलकीपर थिबो कोर्टुआ, स्ट्राइकर रोमेलु लुकाकू, मिडफील्ड के मास्टर केविन डि ब्रुएन और लिएंड्रो ट्रॉसार्ड जैसे खिलाड़ी किसी भी समय मैच का रुख बदल सकते हैं। यह मुकाबला स्पेन की मजबूत रक्षा और बेल्जियम के आक्रामक खेल के बीच दिलचस्प संघर्ष साबित हो सकता है।
हालैंड और हैरी केन की भिड़ंत पर दुनिया की नजर
तीसरे क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड और नॉर्वे आमने-सामने होंगे। इस मुकाबले की सबसे बड़ी खासियत दो विश्वस्तरीय स्ट्राइकरों की सीधी टक्कर होगी। नॉर्वे के अर्लिंग हालैंड और इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन इस विश्व कप में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।
हालैंड की ताकत उनकी गति, शारीरिक क्षमता और गोल करने की अद्भुत कला है। उन्हें रोकने की जिम्मेदारी इंग्लैंड के डिफेंडरों और गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड पर होगी। यदि इंग्लैंड की रक्षा पंक्ति हालैंड को खुलकर खेलने का मौका देती है तो मैच का परिणाम बदल सकता है।
इंग्लैंड के मुख्य कोच थॉमस ट्यूशेल ने इस टूर्नामेंट में टीम चयन को लेकर कई साहसिक फैसले लिए हैं। शुरुआती दौर में इन फैसलों की आलोचना भी हुई थी, लेकिन अब तक उनके प्रयोग सफल साबित हुए हैं। इंग्लैंड संतुलित टीम के रूप में नजर आ रहा है, फिर भी नॉर्वे की टीम अपने स्टार स्ट्राइकर के दम पर किसी भी बड़े प्रतिद्वंद्वी को हराने का माद्दा रखती है।
अर्जेंटीना के सामने स्विट्जरलैंड की चुनौती
चौथे क्वार्टर फाइनल में मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना का मुकाबला स्विट्जरलैंड से होगा। इस मैच पर सबसे ज्यादा नजरें कप्तान लियोनेल मेसी पर रहेंगी। यदि अर्जेंटीना इस बार भी विश्व कप जीतने में सफल रहता है तो मेसी फुटबॉल इतिहास में ऐसे पहले कप्तान बन जाएंगे, जिन्होंने दो बार विश्व कप ट्रॉफी अपने हाथों में उठाई हो।
इसके अलावा अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार पुरुष फुटबॉल विश्व कप जीतने वाला केवल दूसरा देश बन सकता है। इससे पहले यह उपलब्धि सिर्फ ब्राजील के नाम दर्ज है। यही वजह है कि अर्जेंटीना के लिए यह मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्विट्जरलैंड को भले ही विश्व फुटबॉल की सबसे बड़ी महाशक्ति नहीं माना जाता, लेकिन टीम लगातार बड़े टूर्नामेंटों में मजबूत चुनौती देती रही है। 1934, 1938, 1954 और अब 2026 में उसने क्वार्टर फाइनल तक पहुंचकर अपनी निरंतरता साबित की है। हालांकि अब तक वह कभी भी विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सका है। ऐसे में इस बार स्विस टीम इतिहास बदलने के इरादे से मैदान में उतरेगी।
सुपरस्टार खिलाड़ियों पर टिकी रहेंगी उम्मीदें
इस विश्व कप के क्वार्टर फाइनल की एक और खास बात यह है कि दुनिया के लगभग सभी बड़े फुटबॉल सितारे अभी भी टूर्नामेंट में बने हुए हैं। मेसी अपने करियर में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करना चाहेंगे, जबकि एमबाप्पे फ्रांस को फिर से विश्व चैंपियन बनाने का सपना देख रहे हैं। दूसरी ओर हैरी केन और अर्लिंग हालैंड पहली बार अपनी-अपनी टीमों को विश्व कप के सबसे बड़े मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे।
युवा खिलाड़ी लामिने यमाल भी लगातार अपने प्रदर्शन से प्रभावित कर रहे हैं। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि वह आने वाले वर्षों में विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े सितारों में शामिल हो सकते हैं। वहीं बेल्जियम के अनुभवी खिलाड़ियों के लिए यह शायद आखिरी बड़ा विश्व कप साबित हो सकता है, इसलिए वे पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेंगे।
रोमांचक मुकाबलों की उम्मीद
अब जबकि विश्व कप अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है, हर मुकाबला ‘करो या मरो’ की स्थिति वाला होगा। छोटी-सी गलती भी किसी टीम का सपना तोड़ सकती है। यूरोप का दबदबा जरूर देखने को मिल रहा है, लेकिन अर्जेंटीना और मोरक्को जैसी टीमें इस संतुलन को बदलने का दम रखती हैं।
चारों क्वार्टर फाइनल मुकाबलों में फुटबॉल प्रशंसकों को रणनीति, गति, अनुभव और युवा जोश का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलेगा। यही कारण है कि 2026 फीफा वर्ल्ड कप का यह चरण अब तक का सबसे यादगार और रोमांचक दौर बनने की पूरी संभावना रखता है।