दुबई से इजराइल के तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान में उस समय हड़कंप मच गया, जब कॉकपिट के अंदर मौजूद को-पायलट ने भारतीय को-पायलट कैप्टन स्मित मच्छर पर कथित तौर पर हमला कर दिया। घटना इतनी गंभीर थी कि विमान का संतुलन बिगड़ने लगा और वह तेजी से नीचे जाने लगा। विमान में बैठे यात्रियों को पहले तो समझ ही नहीं आया कि आखिर कॉकपिट में क्या हुआ है। चीख-पुकार और अफरातफरी के बीच घायल कैप्टन ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोला। इसी दौरान विमान में यात्री के रूप में सफर कर रहे दो अन्य पायलटों के लिए अंदर पहुंचने का रास्ता खुल गया।
इन दोनों पायलटों ने बिना समय गंवाए कॉकपिट में प्रवेश किया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। खास बात यह है कि ये दोनों उस फ्लाइट के नियमित ऑपरेटिंग क्रू का हिस्सा नहीं थे। वे तेल अवीव से दुबई लौटने वाली दूसरी फ्लाइट के लिए ड्यूटी पर जाने के उद्देश्य से इस विमान में यात्रा कर रहे थे। एविएशन इंडस्ट्री में इस तरह ड्यूटी के लिए किसी दूसरे स्थान तक यात्री की तरह यात्रा करने वाले क्रू को ‘डेडहेडिंग’ कहा जाता है।
विमान को संभालने के बाद भी इन दोनों पायलटों ने तत्काल यात्रियों से कोई संपर्क नहीं किया। काफी देर तक केबिन में बैठे लोगों को यह जानकारी नहीं थी कि कॉकपिट में कौन मौजूद है, विमान किस दिशा में जा रहा है और आगे क्या होने वाला है। इस चुप्पी ने यात्रियों की चिंता और बढ़ा दी। कुछ लोगों को आशंका होने लगी कि कहीं विमान पर किसी ने कब्जा तो नहीं कर लिया है और उसे ईरान की ओर ले जाया जा रहा है।
करीब 45 मिनट बाद यात्रियों को कुछ राहत मिली। कॉकपिट से जानकारी दी गई कि विमान को सऊदी अरब के तबुक में उतारा जाएगा और स्थिति नियंत्रण में है। इसके बाद यात्रियों को पहली बार भरोसा हुआ कि विमान सुरक्षित दिशा में जा रहा है। फ्लाईदुबई ने घटना के कई दिन बाद भी इन दोनों पायलटों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। एयरलाइन ने केवल इतना बताया है कि दोनों क्रू मेंबर थे और उस समय यात्री के तौर पर विमान में मौजूद थे।
कॉकपिट से आई चीखों ने यात्रियों को चौंकाया
विमान में आगे की सीटों पर बैठे यात्री डेनियल श्लिक्टर ने अमेरिकी समाचार एजेंसी AP को घटना के बारे में बताया। उनके मुताबिक, अचानक कॉकपिट के भीतर से आवाजें और चीख-पुकार सुनाई देने लगीं। शुरुआत में यात्रियों को यह समझ नहीं आया कि वहां क्या चल रहा है, लेकिन जल्द ही अंदाजा हो गया कि मामला सामान्य नहीं है।
श्लिक्टर के अनुसार, को-पायलट ने अपने साथी पायलट पर हमला किया था। हमले के दौरान कैप्टन स्मित मच्छर गंभीर रूप से घायल हो गए। कॉकपिट के अंदर खून फैल गया था और विमान का नियंत्रण भी प्रभावित हुआ। इसी स्थिति में कैप्टन ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की।
दरवाजा खुलते ही केबिन में मौजूद लोगों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। एक यात्री ने कथित तौर पर हमलावर को पकड़कर कॉकपिट से बाहर खींच लिया, जबकि अन्य यात्रियों ने भी उसे काबू करने में मदद की। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विमान हवा में था और यात्रियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि विमान को सुरक्षित रखा जाए।
यात्री बनकर बैठे थे दो पायलट, अचानक बन गए विमान के सबसे अहम लोग
कॉकपिट का दरवाजा खुलने के बाद विमान में मौजूद दो अतिरिक्त पायलटों ने तुरंत वहां पहुंचकर कमान संभाली। यह बात यात्रियों के लिए भी काफी देर तक रहस्य बनी रही कि आखिर ये दोनों कौन हैं और उन्हें कॉकपिट में जाने का अधिकार कैसे मिला।
बाद में सामने आया कि दोनों पायलट उस समय अपनी नियमित ड्यूटी पर नहीं थे। उन्हें तेल अवीव से दुबई लौटने वाली फ्लाइट संचालित करनी थी। इसी वजह से वे दुबई से तेल अवीव जाने वाली फ्लाइट में यात्री के रूप में सवार हुए थे। ऐसी स्थिति में क्रू सदस्य विमान में यात्रा तो करते हैं, लेकिन उनकी उस समय उड़ान की ड्यूटी नहीं होती।
एविएशन की भाषा में इस प्रक्रिया को ‘डेडहेडिंग’ कहा जाता है। आम यात्रियों की नजर में वे दोनों भी विमान में सफर कर रहे यात्रियों जैसे ही थे, लेकिन अचानक पैदा हुई आपात स्थिति ने उनकी भूमिका पूरी तरह बदल दी। कॉकपिट में संकट पैदा होने के बाद उनकी ट्रेनिंग और अनुभव ही विमान को दोबारा नियंत्रण में लाने में काम आया।
पहले विमान नीचे गया, फिर पायलटों ने धीरे-धीरे संभाला कंट्रोल
दोनों अतिरिक्त पायलटों के कॉकपिट में पहुंचने के बाद भी खतरा तुरंत खत्म नहीं हुआ। विमान को पूरी तरह स्थिर करने में उन्हें कुछ समय लगा। रिपोर्ट के मुताबिक, विमान को नियंत्रण में लाने की प्रक्रिया में करीब 10 मिनट या उससे अधिक समय लगा।
इससे पहले विमान इतनी तेजी से नीचे आया था कि उसके पिछले हिस्से को भी नुकसान पहुंचा। स्थिति को देखते हुए पायलटों ने मे-डे कॉल जारी किया और सुरक्षित लैंडिंग के लिए उपयुक्त एयरपोर्ट की तलाश शुरू की।
उस समय विमान में बैठे लोगों के लिए सबसे मुश्किल बात यह थी कि उन्हें कॉकपिट की वास्तविक स्थिति के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही थी। यात्रियों को यह पता नहीं था कि कौन विमान उड़ा रहा है और अगला कदम क्या होगा। इस वजह से डर का माहौल और गहरा गया।
कुछ यात्रियों के मन में यह आशंका भी पैदा हो गई कि विमान का अपहरण किया जा सकता है। चूंकि विमान इजराइल की ओर जा रहा था और क्षेत्र में तनाव का माहौल था, इसलिए कुछ लोगों को डर था कि विमान को जबरन किसी दूसरी दिशा में मोड़ा जा सकता है। यहां तक कि कुछ यात्रियों को आशंका थी कि विमान को ईरान ले जाया जा सकता है।
45 मिनट तक यात्रियों को नहीं मिली पूरी जानकारी
विमान को संभालने के बाद दोनों पायलटों ने तत्काल केबिन में कोई विस्तृत घोषणा नहीं की। यह चुप्पी यात्रियों के लिए बेहद तनावपूर्ण रही। लोग एक-दूसरे से सवाल कर रहे थे कि कॉकपिट के अंदर कौन है और विमान आखिर कहां जा रहा है।
करीब 45 मिनट बाद स्थिति कुछ स्पष्ट हुई। पायलटों की ओर से यात्रियों को बताया गया कि विमान को सऊदी अरब के तबुक में उतारा जाएगा। साथ ही यह भी संकेत दिया गया कि विमान अब नियंत्रण में है और यात्रियों को घबराने की जरूरत नहीं है।
इस घोषणा के बाद केबिन में मौजूद लोगों को पहली बार राहत महसूस हुई। यात्रियों को यह भरोसा हुआ कि कॉकपिट में मौजूद लोग विमान को सुरक्षित जगह पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक में उतारा गया। इस तरह एक ऐसी उड़ान, जो कुछ समय पहले गंभीर खतरे में दिखाई दे रही थी, आखिरकार सुरक्षित लैंडिंग तक पहुंची।
यात्रियों ने कहा- समय पर नहीं पहुंचते तो हालात और बिगड़ सकते थे
घटना के प्रत्यक्षदर्शी डेनियल श्लिक्टर ने दोनों अतिरिक्त पायलटों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, जिस समय विमान में अफरातफरी थी, उस वक्त इन दोनों ने कॉकपिट में पहुंचकर स्थिति को संभालने का काम किया।
श्लिक्टर के मुताबिक, पहले कॉकपिट में पहुंचने वाले पायलट ने हालात को समझने में ज्यादा समय नहीं लगाया और विमान का नियंत्रण संभालने की कोशिश शुरू कर दी। कुछ ही समय बाद दूसरे पायलट ने भी कॉकपिट में प्रवेश किया। दोनों ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया और विमान को सुरक्षित दिशा में ले जाने पर ध्यान केंद्रित किया।
यात्रियों के लिए यह पूरी घटना किसी असामान्य अनुभव से कम नहीं थी। कुछ मिनट पहले तक वे सामान्य उड़ान की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन कॉकपिट में हुई हिंसा के बाद अचानक विमान की सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो गया। इसके बाद दो ऐसे पायलट, जिनके बारे में अधिकांश यात्रियों को कुछ पता भी नहीं था, संकट के समय कॉकपिट में पहुंचे और उड़ान को संभालने लगे।
फ्लाईदुबई ने अभी तक नहीं बताए दोनों पायलटों के नाम
इस पूरी घटना में सबसे ज्यादा चर्चा अब उन दो पायलटों की हो रही है, जिन्होंने यात्री के रूप में विमान में मौजूद रहते हुए आपात स्थिति में कॉकपिट की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, फ्लाईदुबई ने अभी तक दोनों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।
एयरलाइन की ओर से केवल यह पुष्टि की गई है कि दोनों क्रू मेंबर थे और उस समय विमान में यात्रा कर रहे थे। उनकी पहचान और व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
यही वजह है कि घटना के कई दिन बाद भी दोनों पायलटों की पहचान लोगों के लिए एक रहस्य बनी हुई है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार इतना स्पष्ट है कि वे उस विमान को नियमित रूप से नहीं उड़ा रहे थे, बल्कि दूसरी उड़ान के लिए ड्यूटी पर जाने के क्रम में यात्री के तौर पर सवार थे।
एक सामान्य यात्रा अचानक बन गई इमरजेंसी ड्यूटी
इस घटना का सबसे अहम पहलू यही है कि दोनों पायलट उस समय अपने निर्धारित विमान की कॉकपिट सीट पर नहीं थे। वे केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए फ्लाइट में यात्रा कर रहे थे। लेकिन जैसे ही विमान के कॉकपिट में संकट पैदा हुआ, उनकी पेशेवर भूमिका अचानक सामने आ गई।
हमले के बाद घायल कैप्टन द्वारा दरवाजा खोल पाना, यात्रियों द्वारा हमलावर को काबू करना और फिर दोनों अतिरिक्त पायलटों का कॉकपिट तक पहुंचना, इन घटनाओं ने मिलकर विमान को पूरी तरह अनियंत्रित होने से बचाने में भूमिका निभाई।
विमान को स्थिर करने, मे-डे कॉल करने और सुरक्षित लैंडिंग के लिए तबुक का चयन करने के बाद दोनों पायलटों ने यात्रियों को सुरक्षित जमीन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि घटना की पूरी जांच और कॉकपिट में हुई हिंसा के कारणों को लेकर अभी और जानकारी सामने आनी बाकी है।
फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि फ्लाईदुबई की उस उड़ान में यात्री बनकर बैठे वे दोनों पायलट कौन थे, जिन्होंने संकट की घड़ी में कॉकपिट संभाल लिया। एयरलाइन की ओर से नाम सार्वजनिक नहीं किए जाने के कारण उनकी पहचान अभी पर्दे के पीछे है, लेकिन विमान में मौजूद यात्रियों के लिए वे दो अनजान क्रू सदस्य उस समय सबसे महत्वपूर्ण साबित हुए, जब कुछ मिनटों के लिए पूरी उड़ान का नियंत्रण खतरे में दिखाई दे रहा था।