देश के कई हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई शुरू हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद उत्तर भारत के कुछ राज्यों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। उत्तर प्रदेश और बिहार में नदियों के बढ़े जलस्तर के कारण लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। दूसरी ओर राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से मानसून पूरी तरह विदा हो चुका है। मानसून के लौटने के साथ राजस्थान में तापमान तेजी से बढ़ने लगा है, जबकि मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में अक्टूबर के दौरान हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी। मौसम में यह बदलाव एक तरफ जहां कई राज्यों में गर्मी बढ़ने के संकेत दे रहा है, वहीं दूसरी ओर बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम अभी भी चुनौती बना हुआ है।
बिहार में बाढ़ से 27 लोगों की मौत, कई लोग अब भी लापता
बिहार में बाढ़ का असर बड़े इलाके में देखने को मिल रहा है। राज्य में बाढ़ से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में अब तक 27 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। सारण जिला भी बाढ़ के कारण प्रभावित है, जहां पानी में डूबने की घटनाओं में 12 लोगों की जान चली गई। इसके अलावा कई लोगों के लापता होने की सूचना है। सीवान में भी बाढ़ का पानी लोगों के लिए जानलेवा साबित हुआ है। यहां पानी में डूबने से 6 बच्चों की मौत हुई है।
बाढ़ के कारण कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। निचले क्षेत्रों में पानी भरने से लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है। लगातार बढ़े जलस्तर के कारण स्थानीय लोगों के सामने आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती बनी हुई है।
राज्य का बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में
बिहार सरकार के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करीब 68.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित बताया गया है। यह राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 73 प्रतिशत हिस्सा है। बिहार के 38 में से 28 जिलों को ऐसे जिलों में शामिल किया जाता है जहां बाढ़ का खतरा बना रहता है। यही वजह है कि राज्य में हर साल बाढ़ से निपटने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी और खर्च किया जाता है।
सरकार के मुताबिक, बाढ़ नियंत्रण और उससे निपटने से जुड़े कार्यों पर हर साल करीब 6.4 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद भारी बारिश, नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी और निचले इलाकों में पानी फैलने के कारण कई बार हालात चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। इस बार भी बाढ़ से प्रभावित जिलों में लोगों की सुरक्षा और राहत व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना पड़ रहा है।
लखनऊ में गोमती का बढ़ा जलस्तर, हजारों परिवार प्रभावित
उत्तर प्रदेश में बारिश का सिलसिला फिलहाल थम गया है, लेकिन बाढ़ की समस्या अभी खत्म नहीं हुई है। राज्य के कई हिस्सों में नदियां अब भी उफान पर हैं। 11 जिलों में 10 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इसका सीधा असर नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों पर पड़ा है।
राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। नदी का पानी आसपास के इलाकों में फैल गया है और 40 हजार से अधिक घरों में पानी पहुंचने की जानकारी है। बाढ़ का पानी लोगों के घरों और गलियों तक पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है।
बताया जा रहा है कि करीब 10 हजार लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर पहुंच चुके हैं। शहर के कुछ इलाकों में सड़कों और गलियों में पानी भर जाने के कारण सामान्य आवाजाही प्रभावित हुई है। कई जगहों पर लोगों को आने-जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। बारिश रुकने के बावजूद नदी के जलस्तर में तुरंत कमी नहीं आने के कारण प्रभावित लोगों को अभी राहत का इंतजार है।
यूपी में बारिश रुकी, लेकिन नदियों का पानी अब भी बढ़ा हुआ
उत्तर प्रदेश में फिलहाल आसमान साफ होने लगा है और बारिश का दौर कमजोर पड़ गया है। इसके बावजूद नदियों में जमा पानी और ऊंचे जलस्तर के कारण बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। नदी का पानी धीरे-धीरे कम होने में समय लगने के कारण कई इलाकों में लोगों की परेशानी बनी हुई है।
निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। घरों में पानी घुसने के बाद जरूरी सामान को सुरक्षित जगहों पर ले जाना पड़ा है। वहीं, प्रशासन और स्थानीय स्तर पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। जलस्तर कम होने के साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास का काम तेज होने की उम्मीद है।
राजस्थान से मानसून की विदाई, पिलानी में पारा 41 डिग्री पार
उधर, पश्चिमी भारत के राजस्थान में मानसून का सफर पूरी तरह खत्म हो चुका है। राज्य से मानसून करीब तीन दिन की देरी के बाद शनिवार को विदा हुआ। मानसून की वापसी के साथ ही मौसम में एक अलग बदलाव देखने को मिल रहा है। बारिश का दौर कमजोर पड़ने के बाद कई इलाकों में दिन के तापमान में बढ़ोतरी शुरू हो गई है।
झुंझुनूं जिले के पिलानी में शनिवार को अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। मानसून के विदा होते ही तापमान में यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि राज्य के कई हिस्सों में अब गर्मी का असर बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं की स्थिति देखने को मिल सकती है।
मध्य प्रदेश में भी मानसून का दौर समाप्त
मध्य प्रदेश से भी शनिवार को मानसून की विदाई हो गई। हालांकि, राज्य से मानसून की वापसी के बावजूद अक्टूबर में मौसम पूरी तरह शुष्क रहने की संभावना नहीं है। कुछ इलाकों में स्थानीय मौसम परिस्थितियों के कारण बारिश हो सकती है।
मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, 7 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। इस दौरान कुछ स्थानों पर तेज हवाएं भी चल सकती हैं। यानी राज्य में मानसून की औपचारिक विदाई के बाद भी मौसम में कुछ समय तक बदलाव देखने को मिलता रहेगा।
हिमाचल और उत्तराखंड में भी मानसून विदा
पहाड़ी राज्यों में भी मानसून का चरण समाप्त हो गया है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से शनिवार को मानसून पूरी तरह लौट गया। हालांकि, मानसून की विदाई का मतलब यह नहीं है कि पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम पूरी तरह स्थिर हो जाएगा। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में स्थानीय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से कुछ क्षेत्रों में बारिश और तेज हवाएं देखने को मिल सकती हैं।
उत्तराखंड में 5 अक्टूबर से पहाड़ी जिलों में मौसम में बदलाव की संभावना जताई गई है। इसके बाद 6 और 7 अक्टूबर को कुछ जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। ऐसे में ऊंचाई वाले इलाकों में रहने वाले लोगों और पहाड़ी क्षेत्रों में आवाजाही करने वालों को मौसम में होने वाले अचानक बदलाव का सामना करना पड़ सकता है।
एक तरफ विदाई ले रहा मानसून, दूसरी ओर बाढ़ की चुनौती
देश के अलग-अलग हिस्सों में इस समय मौसम की तस्वीर एक जैसी नहीं है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से मानसून की विदाई हो चुकी है, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में बाढ़ का असर अभी भी दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि एक तरफ जहां कुछ राज्यों में तापमान बढ़ने लगा है, वहीं दूसरी तरफ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी कम होने का इंतजार किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में बारिश थमने के बावजूद नदियों का जलस्तर लोगों के लिए परेशानी बना हुआ है। लखनऊ में हजारों परिवारों का विस्थापन इसी स्थिति को दिखाता है। बिहार में बाढ़ के कारण जानमाल का नुकसान होने से हालात और गंभीर हैं। राज्य के बड़े हिस्से के बाढ़ प्रभावित होने के आंकड़े बताते हैं कि वहां बाढ़ केवल कुछ जिलों तक सीमित समस्या नहीं है।
आने वाले दिनों में मानसून की पूरी तरह वापसी के साथ मौसम का रुख बदलने की उम्मीद है। हालांकि, जिन इलाकों में नदियों का पानी अभी खतरे के निशान के ऊपर बह रहा है, वहां स्थिति सामान्य होने में समय लग सकता है। प्रशासन के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना, राहत पहुंचाना और जलस्तर कम होने तक जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराना बनी हुई है।