उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे से जुड़ा मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। मंदिर प्रशासन द्वारा की गई शुरुआती जांच के बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने अपने अध्यक्ष के निजी सचिव प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। समिति ने उनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है और निर्धारित समय के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो मामले में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद प्रदेश में मंदिरों के चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
मंदिर समिति के अनुसार, पूरे मामले की जानकारी मिलने के बाद परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग की विस्तार से जांच की गई। जांच के दौरान 2 जुलाई 2026 की फुटेज को विशेष रूप से देखा गया, जिसमें कथित तौर पर प्रमोद नौटियाल गणना स्थल पर मौजूद दिखाई दिए। आरोप है कि नियमित प्रक्रिया के दौरान गिनती किए जा रहे चढ़ावे के अलावा उन्होंने कुछ सामान अपने पास रख लिया। इसी आधार पर समिति ने उनके खिलाफ प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया।
समिति की ओर से जारी नोटिस में प्रमोद नौटियाल से स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि उन्होंने अपने पास क्या रखा था और उसका उद्देश्य क्या था। उन्हें 48 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं दिया गया या दिया गया उत्तर संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मंदिर प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड सरकार भी सक्रिय हो गई है। बताया जा रहा है कि सरकार मामले की विस्तृत जांच गढ़वाल मंडल के आयुक्त आनंद स्वरूप को सौंपने पर विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है तो प्रशासनिक स्तर पर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच होगी और यह भी पता लगाया जाएगा कि घटना किसी एक व्यक्ति तक सीमित थी या इसके पीछे कोई बड़ी लापरवाही अथवा संगठित गड़बड़ी मौजूद थी।
मंदिर समिति का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया प्रत्येक दान धार्मिक आस्था से जुड़ा होता है, इसलिए उसकी सुरक्षा और पारदर्शी गणना सर्वोच्च प्राथमिकता है। समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में उपलब्ध सभी डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है ताकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की पुष्टि की जा सके।
इस मामले के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति भी गर्म हो गई है। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए पूरे प्रकरण को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद अब उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में भी चढ़ावे की कथित चोरी और गबन जैसे मामलों की चर्चा होना चिंताजनक है। उनके अनुसार ऐसे मामलों की निष्पक्ष और व्यापक जांच होनी चाहिए ताकि लोगों का धार्मिक संस्थाओं पर विश्वास बना रहे।
मायावती ने अपने बयान में यह भी कहा कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक जांच सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनके अनुसार संबंधित ट्रस्ट और प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उनका कहना था कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो यह देखना जरूरी है कि वह किसी की मिलीभगत का परिणाम है या फिर प्रशासनिक लापरवाही के कारण ऐसा हुआ। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते पूरी सच्चाई सामने नहीं लाई गई तो भविष्य में भी इस प्रकार की घटनाओं की आशंका बनी रह सकती है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया के बीच मंदिर समिति ने दोहराया है कि फिलहाल जांच प्रारंभिक चरण में है और किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। समिति का कहना है कि सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले में किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होगा, वहीं यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
धार्मिक स्थलों पर आने वाले चढ़ावे का प्रबंधन हमेशा से संवेदनशील विषय माना जाता है। लाखों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ मंदिरों में दान करते हैं। ऐसे में यदि चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसका सीधा असर श्रद्धालुओं के विश्वास पर पड़ता है। यही कारण है कि बद्रीनाथ धाम से जुड़ा यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर तेजी से कार्रवाई की गई और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी गई।
जानकारों का कहना है कि वर्तमान समय में अधिकांश बड़े मंदिरों में सीसीटीवी निगरानी, डिजिटल रिकॉर्डिंग और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था लागू है। ऐसे मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बद्रीनाथ धाम के मामले में भी समिति ने सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए कार्रवाई की है। हालांकि अंतिम निर्णय जांच पूरी होने और सभी तथ्यों के परीक्षण के बाद ही लिया जाएगा।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रमोद नौटियाल अपने नोटिस का क्या जवाब देते हैं और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। यदि उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं माना जाता है तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। वहीं यदि सरकार स्वतंत्र जांच का आदेश देती है तो पूरे मामले की जांच का दायरा और भी व्यापक हो सकता है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों के निर्णय के आधार पर इस पूरे विवाद की दिशा तय होगी।