प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सेंट्रल एशिया दौरा रणनीतिक और कूटनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उज्बेकिस्तान पहुंचने के बाद उनका कार्यक्रम केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत और मध्य एशिया के बीच व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने पर भी जोर रहेगा। ताशकंद पहुंचते ही उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया।
एयरपोर्ट पर स्वागत के बाद दोनों नेता एक ही कार से होटल के लिए रवाना हुए। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों की गर्मजोशी को दिखाने वाली तस्वीर के तौर पर देखी जा रही है। होटल पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री ने वहां मौजूद भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। इस दौरान कुछ भारतीय महिलाओं ने पीएम मोदी की कलाई पर राखी बांधी। राखी बंधवाते हुए प्रधानमंत्री ने भारतीय समुदाय के लोगों से बातचीत भी की।
प्रधानमंत्री का यह दौरा करीब चार साल के अंतराल के बाद सेंट्रल एशिया की यात्रा का हिस्सा है। उज्बेकिस्तान के बाद उनका अगला पड़ाव किर्गिस्तान होगा, जहां वे शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की 26वीं शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे। इस दौरान कई देशों के शीर्ष नेताओं के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत होने की संभावना है।
ताशकंद में भारत-उज्बेकिस्तान रिश्तों पर होगी अहम बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में रहेंगे। प्रधानमंत्री के तौर पर यह उनकी उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है। इस दौरान उनकी राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता होगी।
दोनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत में कई अहम क्षेत्र शामिल होंगे। इनमें व्यापार और निवेश के साथ-साथ रक्षा सहयोग, ऊर्जा, शिक्षा और तकनीक जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। दोनों देश आपसी आर्थिक साझेदारी को बढ़ाने और नई परियोजनाओं के लिए संभावनाएं तलाशने पर भी चर्चा कर सकते हैं।
भारत और उज्बेकिस्तान अपने-अपने दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए सहयोग के नए क्षेत्र तलाश रहे हैं। भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य और उज्बेकिस्तान के ‘उज्बेकिस्तान-2030’ विजन के बीच साझेदारी को मजबूत करने के अवसरों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
माना जा रहा है कि बैठक में दोनों देश आर्थिक संबंधों को और गति देने के साथ-साथ निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार करने पर जोर दे सकते हैं। मध्य एशिया में उज्बेकिस्तान की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र व्यापार और कनेक्टिविटी के लिहाज से रणनीतिक महत्व रखता है।
शास्त्री स्मारक पहुंचेंगे पीएम मोदी
ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी खास रहेगा। वे पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के स्मारक पर जाएंगे। शास्त्री जी का निधन 1966 में ताशकंद में हुआ था। इसलिए भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों में ताशकंद का विशेष ऐतिहासिक महत्व है।
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में महात्मा गांधी सेंटर का दौरा भी शामिल है। इन दोनों स्थानों की यात्रा के जरिए भारत की ऐतिहासिक विरासत और दोनों देशों के बीच पुराने संबंधों को भी रेखांकित किया जाएगा।
उज्बेकिस्तान के साथ भारत के संबंध केवल सरकारी स्तर की बातचीत तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच शिक्षा, संस्कृति, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क भी लगातार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री का भारतीय समुदाय से मिलना इसी व्यापक जुड़ाव का हिस्सा माना जा रहा है।
ताशकंद के बाद बिश्केक की ओर रवाना होंगे मोदी
उज्बेकिस्तान में दो दिन के कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
शंघाई सहयोग संगठन भारत के लिए मध्य एशिया, रूस और चीन के साथ संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच है। भारत 2017 से इस संगठन का पूर्ण सदस्य है। संगठन के मंच पर क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला, आर्थिक सहयोग, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठते रहे हैं।
बिश्केक में होने वाली बैठक में भी क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा होने की संभावना है। खासतौर पर अफगानिस्तान की स्थिति, आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषय भारत के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
जिनपिंग और पुतिन से मुलाकात पर नजर
SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई देशों के नेताओं से मुलाकात होने की संभावना है। इनमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ संभावित बातचीत पर विशेष नजर रहेगी।
भारत के लिए चीन और रूस दोनों ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश हैं। ऐसे में बहुपक्षीय सम्मेलन के दौरान होने वाली द्विपक्षीय मुलाकातें भी कूटनीतिक दृष्टि से अहम हो सकती हैं।
इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ भी बातचीत कर सकते हैं। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति, व्यापार और आर्थिक साझेदारी के मुद्दों पर विचार-विमर्श संभव है।
वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन में भी शामिल होंगे मोदी
बिश्केक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी हिस्सा लेंगे। यह आयोजन मध्य एशिया की पारंपरिक संस्कृति और खेल विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने वाला प्रमुख कार्यक्रम है।
प्रधानमंत्री की इस कार्यक्रम में मौजूदगी भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूती देने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत लगातार मध्य एशिया के देशों के साथ राजनीतिक और आर्थिक संबंधों के अलावा सांस्कृतिक संपर्क बढ़ाने पर भी जोर देता रहा है।
मध्य एशिया भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को केवल दो देशों की यात्रा के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे भारत की व्यापक सेंट्रल एशिया नीति भी जुड़ी हुई है। मध्य एशिया संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र है और भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा तथा औद्योगिक जरूरतों के लिए इस क्षेत्र के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है।
1. तेल, गैस और खनिजों पर नजर
मध्य एशिया के कई देशों के पास तेल, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम और दूसरे महत्वपूर्ण खनिजों के बड़े भंडार हैं। भारत के लिए इन संसाधनों तक बेहतर पहुंच उसकी दीर्घकालिक ऊर्जा और आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।
ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा भारत मध्य एशियाई देशों के साथ साझेदारी को इसी नजरिए से भी देखता है। खनिज संसाधनों की उपलब्धता उद्योग और नई तकनीकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
2. बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की कोशिश
भारत की अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ ऊर्जा की मांग भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मध्य एशिया के ऊर्जा उत्पादक देशों के साथ सहयोग बढ़ाना भारत के लिए फायदेमंद हो सकता है।
तेल और गैस के अलावा परमाणु ऊर्जा से जुड़े संसाधनों तथा अन्य रणनीतिक खनिजों के क्षेत्र में भी संभावित सहयोग महत्वपूर्ण है। इसलिए मोदी सरकार सेंट्रल एशिया के साथ ऊर्जा संबंधों को मजबूत करने पर लगातार जोर देती रही है।
3. व्यापार और कनेक्टिविटी का विस्तार
मध्य एशिया तक पहुंच भारत के लिए भौगोलिक चुनौती भी है, क्योंकि भारत और इन देशों के बीच सीधे समुद्री या जमीनी संपर्क सीमित हैं। इसी वजह से भारत नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।
अगर बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित होती है तो भारतीय कंपनियों के लिए मध्य एशिया के बाजारों तक पहुंच आसान हो सकती है। इससे दवाओं, कृषि उत्पादों, मशीनरी, आईटी और दूसरे क्षेत्रों में कारोबार बढ़ाने के अवसर पैदा हो सकते हैं।
4. आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा
मध्य एशिया भारत की सुरक्षा रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। अफगानिस्तान में बदलती परिस्थितियों और वहां सक्रिय आतंकी संगठनों को लेकर भारत और मध्य एशियाई देशों के हित कई जगह एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
आतंकवाद, कट्टरपंथ और सीमा पार सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए क्षेत्रीय सहयोग जरूरी माना जाता है। SCO जैसे मंच भारत को इन मुद्दों पर दूसरे देशों के साथ सीधे संवाद का अवसर देते हैं।
दौरे से भारत को क्या उम्मीद?
प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत मध्य एशिया के साथ अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने पर जोर दे रहा है। ताशकंद में मिर्जियोयेव के साथ बातचीत से जहां द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है, वहीं बिश्केक में SCO बैठक भारत को बड़े क्षेत्रीय मुद्दों पर अपनी स्थिति रखने का मंच देगी।
एक तरफ ताशकंद में व्यापार, निवेश, ऊर्जा और शिक्षा जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश होगी, तो दूसरी ओर SCO सम्मेलन में आतंकवाद, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे व्यापक मुद्दों पर चर्चा होगी।
इस तरह प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत की ‘सेंट्रल एशिया आउटरीच’ रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उज्बेकिस्तान में ऐतिहासिक स्थलों का दौरा और भारतीय समुदाय से मुलाकात जहां लोगों के स्तर पर रिश्तों को मजबूत करने का संदेश देगी, वहीं बिश्केक में होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों से भारत की क्षेत्रीय कूटनीति को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।