फीफा वर्ल्ड कप 2026 में पांचवें दिन ऐसा नजारा देखने को मिला, जो पिछले करीब सात दशकों में केवल एक बार ही देखने को मिला था। टूर्नामेंट के इस दिन खेले गए सभी चार मुकाबले ड्रॉ पर समाप्त हुए। बड़े और छोटे देशों के बीच हुए इन मैचों में किसी भी टीम को जीत नहीं मिली, लेकिन रोमांच और संघर्ष की कोई कमी नहीं रही। खास बात यह रही कि अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाने वाली टीमों ने मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर देकर अंक बांटने पर मजबूर कर दिया।
विश्व कप के इतिहास में इससे पहले एक ही दिन खेले गए चार मैचों के ड्रॉ रहने की घटना 1958 के स्वीडन वर्ल्ड कप में दर्ज हुई थी। उस समय भी 15 जून को चार मुकाबले बराबरी पर समाप्त हुए थे। अब 68 साल बाद फिर से ऐसा संयोग देखने को मिला है, जिसने टूर्नामेंट के रिकॉर्ड बुक में एक नया अध्याय जोड़ दिया।
ईरान और न्यूजीलैंड के बीच रोमांचक मुकाबला 2-2 से बराबर
दिन का सबसे दिलचस्प मुकाबला ग्रुप-जी में ईरान और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया। लॉस एंजिल्स में हुए इस मैच में दोनों टीमों ने आक्रामक फुटबॉल का शानदार प्रदर्शन किया और दर्शकों को चार खूबसूरत गोल देखने को मिले।
न्यूजीलैंड ने मैच की शुरुआत बेहद तेज अंदाज में की। सातवें मिनट में इलिजाह जस्ट ने गोल दागकर अपनी टीम को शुरुआती बढ़त दिला दी। शुरुआती झटके के बाद ईरान ने वापसी की कोशिशें तेज कर दीं और 33वें मिनट में रामिन रेजाइयन ने गोल कर स्कोर 1-1 कर दिया।
दूसरे हाफ में एक बार फिर इलिजाह जस्ट चमके और 54वें मिनट में अपना दूसरा गोल कर न्यूजीलैंड को 2-1 से आगे पहुंचा दिया। हालांकि यह बढ़त ज्यादा देर कायम नहीं रह सकी। ईरान ने लगातार दबाव बनाए रखा और 64वें मिनट में मोहम्मद मोहेबी ने शानदार स्ट्राइक लगाकर स्कोर फिर बराबर कर दिया। इसके बाद दोनों टीमों ने जीत के लिए कई प्रयास किए, लेकिन कोई भी निर्णायक गोल नहीं कर सकी। आखिरकार मुकाबला 2-2 की बराबरी पर समाप्त हुआ।
सऊदी अरब ने उरुग्वे को जीत से रोका
ग्रुप-एच में मियामी में खेले गए मुकाबले में सऊदी अरब ने मजबूत उरुग्वे के खिलाफ शानदार रक्षात्मक प्रदर्शन किया। मैच 1-1 की बराबरी पर खत्म हुआ और दोनों टीमों को एक-एक अंक से संतोष करना पड़ा।
उरुग्वे ने मैच में गेंद पर अधिक नियंत्रण रखा और दूसरे हाफ में लगातार हमले किए, लेकिन सऊदी अरब की डिफेंस लाइन ने उन्हें सफलता नहीं मिलने दी। सऊदी खिलाड़ियों ने अनुशासित खेल दिखाते हुए दक्षिण अमेरिकी टीम के कई खतरनाक प्रयासों को विफल कर दिया।
इस परिणाम का असर ग्रुप की अंक तालिका पर भी पड़ा। अब ग्रुप-एच की सभी टीमें समान अंक के साथ खड़ी हैं, जिससे अगले मुकाबले और अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। इसके अलावा उरुग्वे के ड्रॉ के साथ एक दिलचस्प तथ्य भी सामने आया। मौजूदा टूर्नामेंट में मैदान पर उतरने वाले सभी चार दक्षिण अमेरिकी देशों में से कोई भी अपनी पहली भिड़ंत जीतने में सफल नहीं रहा है।
बेल्जियम और मिस्र के बीच अंक बंटे
सिएटल में खेले गए ग्रुप-जी के मुकाबले में बेल्जियम और मिस्र की टीमें आमने-सामने थीं। मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ, लेकिन दोनों टीमों के लिए यह मैच अलग-अलग मायने रखता है।
मिस्र ने शानदार शुरुआत करते हुए 20वें मिनट में बढ़त हासिल कर ली। इमाम अशौर ने शानदार मूव को गोल में बदलकर अपनी टीम को आगे कर दिया। पहले हाफ में मिस्र ने यह बढ़त बनाए रखी और बेल्जियम को ज्यादा मौके नहीं दिए।
दूसरे हाफ में बेल्जियम ने आक्रामक रणनीति अपनाई और बराबरी की तलाश शुरू की। 66वें मिनट में मिस्र के डिफेंडर मोहम्मद हानी से दुर्भाग्यपूर्ण गलती हो गई। उन्होंने गेंद को क्लियर करने की कोशिश में अपने ही गोलपोस्ट में पहुंचा दिया, जिससे स्कोर 1-1 हो गया।
इसके बाद बेल्जियम ने जीत हासिल करने के लिए लगातार दबाव बनाया। अंतिम मिनटों में कई अच्छे अवसर भी बने, लेकिन मिस्र के रक्षात्मक खिलाड़ियों और गोलकीपर ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मुकाबले को ड्रॉ पर समाप्त कराया। इस परिणाम के बाद भी मिस्र को विश्व कप इतिहास में अपनी पहली जीत का इंतजार बना हुआ है।
स्पेन को केप वर्डे ने चौंकाया
दिन के पहले मुकाबले में सबसे बड़ा उलटफेर तब देखने को मिला जब केप वर्डे ने यूरोपीय चैंपियन और 2010 की विश्व विजेता स्पेन को गोलरहित ड्रॉ पर रोक दिया। कागजों पर स्पेन को इस मैच का स्पष्ट दावेदार माना जा रहा था, लेकिन मैदान पर कहानी कुछ और ही रही।
स्पेन ने पूरे मैच में गेंद पर कब्जा बनाए रखा और कई बार आक्रमण किए, लेकिन केप वर्डे की मजबूत रक्षा पंक्ति उनके सामने दीवार बनकर खड़ी रही। अफ्रीकी टीम ने बेहद संगठित डिफेंस का प्रदर्शन किया और स्पेन के स्टार खिलाड़ियों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।
मैच के दौरान स्पेन को कुछ अच्छे अवसर जरूर मिले, लेकिन अंतिम क्षणों में वे गोल करने में असफल रहे। दूसरी ओर केप वर्डे ने सीमित मौकों के बावजूद आत्मविश्वास से खेलते हुए महत्वपूर्ण एक अंक हासिल किया। इस परिणाम को टूर्नामेंट के शुरुआती चरण का बड़ा सरप्राइज माना जा रहा है।
एशियाई टीमों का शानदार प्रदर्शन जारी
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में एशियाई देशों का प्रदर्शन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। अब तक एशियाई फुटबॉल परिसंघ (एएफसी) की नौ में से छह टीमें मैदान पर उतर चुकी हैं और इनमें से किसी को भी हार का सामना नहीं करना पड़ा है।
इन छह टीमों के कुल मुकाबलों पर नजर डालें तो दो टीमों ने जीत दर्ज की है, जबकि चार मैच ड्रॉ रहे हैं। सऊदी अरब का उरुग्वे के खिलाफ ड्रॉ और अन्य एशियाई टीमों के सकारात्मक नतीजों ने यह दिखाया है कि इस बार एशियाई फुटबॉल पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी नजर आ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एशियाई देशों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान घरेलू लीग, युवा विकास कार्यक्रमों और अंतरराष्ट्रीय अनुभव में हुई बढ़ोतरी का असर अब विश्व मंच पर दिखाई देने लगा है। यही वजह है कि पारंपरिक ताकतवर टीमों को भी इन देशों के खिलाफ जीत हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है।
इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ पांचवां दिन
वर्ल्ड कप 2026 के पांचवें दिन ने यह साबित कर दिया कि फुटबॉल में किसी भी टीम को हल्के में नहीं लिया जा सकता। स्पेन जैसी दिग्गज टीम का केप वर्डे के खिलाफ अंक गंवाना, ईरान का न्यूजीलैंड के सामने संघर्ष करना, उरुग्वे का सऊदी अरब से नहीं जीत पाना और बेल्जियम का मिस्र के खिलाफ बराबरी पर रुक जाना इस बात का प्रमाण है।
चारों मैचों के ड्रॉ रहने से टूर्नामेंट की प्रतिस्पर्धा और भी रोमांचक हो गई है। साथ ही 1958 के बाद पहली बार एक ही दिन में चार मुकाबलों के बराबरी पर समाप्त होने का रिकॉर्ड भी बन गया। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये नतीजे समूह चरण की तस्वीर बदलते हैं या फिर मजबूत टीमें अगले मैचों में वापसी करने में सफल रहती हैं।