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सिर्फ 10 मिनट का सूर्य नमस्कार देगा जबरदस्त फायदा, जानिए इसे करने का सही समय और पूरा तरीका

आजकल फिट रहने के लिए लोग जिम के साथ-साथ योग को भी अपनी दिनचर्या में शामिल कर रहे हैं। योग शरीर को चुस्त रखने के साथ मानसिक शांति भी देता है। इन्हीं योगासन में सूर्य नमस्कार सबसे असरदार माना जाता है। रोज सुबह कुछ मिनट तक इसे करने से शरीर एक्टिव रहता है और कई स्वास्थ्य समस्याओं से राहत मिल सकती है।

वजन कंट्रोल करने में मददगार

अगर नियमित रूप से सूर्य नमस्कार किया जाए तो शरीर की अतिरिक्त कैलोरी तेजी से बर्न होती है। यह पेट की चर्बी कम करने और वजन घटाने में सहायक माना जाता है। तेज गति से करने पर यह कार्डियो एक्सरसाइज की तरह काम करता है।

शरीर में लचीलापन बढ़ाता है

सूर्य नमस्कार करने से रीढ़ की हड्डी, कंधे, हाथ और पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इसके लगातार अभ्यास से शरीर ज्यादा लचीला और संतुलित बनता है।

मानसिक तनाव होता है कम

रोजाना सुबह सूर्य नमस्कार करने से दिमाग शांत रहता है। यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है। साथ ही फोकस और एकाग्रता भी बेहतर होती है।

पाचन तंत्र को पहुंचाता है फायदा

इस योग के दौरान पेट पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे पाचन क्रिया मजबूत होती है। कब्ज, गैस और अपच जैसी परेशानियों में राहत मिल सकती है।

त्वचा और बालों पर दिखता है असर

सूर्य नमस्कार शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है। इससे चेहरे पर ग्लो आता है और त्वचा स्वस्थ बनी रहती है। कई लोग इसे बालों के लिए भी फायदेमंद मानते हैं।

कब करना चाहिए सूर्य नमस्कार

विशेषज्ञों के मुताबिक इसे सुबह खाली पेट उगते सूर्य की दिशा में करना सबसे अच्छा माना जाता है। हालांकि हाई ब्लड प्रेशर, स्लिप डिस्क या हर्निया जैसी समस्या वाले लोगों को डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही इसे करना चाहिए।

सूर्य नमस्कार करने की सही विधि

1. प्रणामासन

सीधे खड़े होकर दोनों हाथों को छाती के सामने जोड़ें और शरीर को स्थिर रखें।

2. हस्त उत्तानासन

गहरी सांस लेते हुए हाथों को ऊपर उठाएं और हल्का पीछे की तरफ झुकें।

3. पादहस्तासन

अब सांस छोड़ते हुए आगे झुकें और हाथों को पैरों के पास जमीन पर लगाने की कोशिश करें।

4. अश्व संचालनासन

दाहिना पैर पीछे ले जाएं, घुटना जमीन पर रखें और सामने की ओर देखें।

5. पर्वतासन

दूसरे पैर को भी पीछे ले जाकर शरीर को उल्टे V आकार में बनाएं।

6. अष्टांग नमस्कार

घुटने, छाती और ठुड्डी को जमीन से स्पर्श कराएं और सांस रोकें।

7. भुजंगासन

शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाकर आसमान की ओर देखें।

8. पर्वतासन

फिर से शरीर को पर्वतासन की स्थिति में लाएं।

9. अश्व संचालनासन

दाहिने पैर को आगे दोनों हाथों के बीच लाएं।

10. पादहस्तासन

अब दूसरा पैर आगे लाकर शरीर को आगे की ओर झुकाएं।

11. हस्त उत्तानासन

धीरे-धीरे ऊपर उठते हुए हाथों को पीछे की ओर ले जाएं।

12. प्रणामासन

अंत में सामान्य अवस्था में आकर दोनों हाथ जोड़ लें।