एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने शेयर बाजार में कदम रखते ही ऐसा इतिहास रचा, जिसकी चर्चा दुनियाभर के निवेशकों के बीच होने लगी। कंपनी का आईपीओ लॉन्च होने के साथ ही निवेशकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में शेयरों की तेज खरीदारी ने स्पेसएक्स को दुनिया की सबसे चर्चित कंपनियों में शामिल कर दिया। लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने वाला शेयर धीरे-धीरे दबाव में आ गया और जिन निवेशकों ने शुरुआती दिनों में ऊंचे दाम पर खरीदारी की थी, उन्हें बड़ा नुकसान झेलना पड़ा।
12 जून को स्पेसएक्स का बहुप्रतीक्षित आईपीओ बाजार में आया। कंपनी ने प्रति शेयर 135 डॉलर का इश्यू प्राइस तय किया था। हालांकि बाजार खुलते ही निवेशकों की भारी मांग के कारण शेयर तेजी से ऊपर चढ़ गया। शुरुआती कारोबार में इसका भाव 150 डॉलर तक पहुंच गया और दिन के दौरान इसने 176 डॉलर का स्तर भी छू लिया। कारोबार समाप्त होने तक शेयर 160.95 डॉलर पर बंद हुआ। इस शानदार शुरुआत ने स्पेसएक्स को इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल कर दिया।
लिस्टिंग के बाद भी निवेशकों का उत्साह लगातार बना रहा। अगले कुछ दिनों में शेयरों में तेजी जारी रही और कीमत बढ़कर करीब 225 डॉलर तक पहुंच गई। इस उछाल के साथ स्पेसएक्स का मार्केट कैपिटलाइजेशन इतना बढ़ गया कि उसने दुनिया की कई दिग्गज टेक कंपनियों को भी पीछे छोड़ दिया। बाजार में चर्चा होने लगी कि कंपनी आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्पेस टेक्नोलॉजी दोनों क्षेत्रों में बड़ी ताकत बन सकती है।
निवेशकों की इस जबरदस्त दिलचस्पी के पीछे एक बड़ी वजह मस्क की एआई रणनीति भी थी। इसी साल स्पेसएक्स ने एलन मस्क की ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी एक्सएआई का अधिग्रहण किया था। बाद में इस यूनिट को नया नाम देकर स्पेसएक्स एआई के रूप में पेश किया गया। ग्रोक चैटबॉट की लोकप्रियता और एआई सेक्टर में बढ़ते निवेश को देखते हुए कई लोगों ने मान लिया कि स्पेसएक्स अब केवल रॉकेट बनाने वाली कंपनी नहीं रही, बल्कि वह तेजी से एआई आधारित टेक कंपनी में बदल रही है।
इसी धारणा ने शुरुआती दिनों में शेयरों को असाधारण तेजी दिलाई। कई छोटे निवेशकों ने भी उम्मीद जताई कि एआई के कारण कंपनी की कमाई आने वाले वर्षों में कई गुना बढ़ सकती है। सोशल मीडिया पर भी स्पेसएक्स को लेकर जबरदस्त चर्चा होने लगी और निवेशकों के बीच इसे भविष्य का सबसे बड़ा टेक स्टॉक बताया जाने लगा।
हालांकि कुछ ही समय बाद वास्तविक कारोबारी स्थिति सामने आने लगी। विश्लेषकों ने बताया कि कंपनी की आय का सबसे बड़ा स्रोत अब भी रॉकेट निर्माण, अंतरिक्ष मिशनों की लॉन्चिंग और स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा ही है। एआई कारोबार अभी शुरुआती चरण में है और उससे होने वाली कमाई कुल राजस्व की तुलना में बेहद सीमित है। जैसे-जैसे यह जानकारी बाजार में स्पष्ट हुई, निवेशकों का उत्साह कम होने लगा।
स्थिति तब और बदल गई जब स्टारलिंक को अमेरिका के मेम्फिस क्षेत्र में डेटा सेंटर परियोजना को लेकर स्थानीय विरोध का सामना करना पड़ा। विवाद के बीच कंपनी ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अपनी कुछ सेवाओं की कीमतों में कटौती की घोषणा की। बाजार ने इसे मुनाफे पर दबाव बढ़ने का संकेत माना। इस खबर के बाद स्पेसएक्स के शेयरों में एक ही दिन करीब 8 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
इसके बाद भी शेयरों पर दबाव कम नहीं हुआ। 7 जुलाई को कंपनी को प्रतिष्ठित नैस्डैक-100 इंडेक्स में शामिल किया गया। आमतौर पर किसी बड़े इंडेक्स में शामिल होने के बाद संबंधित कंपनी के शेयरों में मजबूती देखने को मिलती है, लेकिन स्पेसएक्स के मामले में उल्टा असर दिखाई दिया। उस दिन जहां पूरा इंडेक्स लगभग 1.7 प्रतिशत नीचे रहा, वहीं स्पेसएक्स के शेयर करीब 4.4 प्रतिशत टूट गए। इससे यह संकेत मिला कि बाजार अब कंपनी के वास्तविक वित्तीय प्रदर्शन को ज्यादा महत्व देने लगा है।
लिस्टिंग के पहले महीने के अंत तक शेयर की कीमत लगभग 145 डॉलर के आसपास आ गई। यह पहले कारोबारी दिन के उच्चतम स्तर से करीब 18 प्रतिशत और अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से लगभग 35 प्रतिशत नीचे थी। जिन निवेशकों ने शुरुआती पांच दिनों के दौरान ऊंची कीमतों पर शेयर खरीदे थे, उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा। कई रिटेल निवेशकों ने सोशल मीडिया पर अपनी चिंता भी जाहिर की।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती तेजी का बड़ा हिस्सा निवेशकों की उम्मीदों और मस्क की लोकप्रियता पर आधारित था। निवेश रिसर्च फर्म सीएफआरए के विश्लेषक कीथ स्नाइडर के अनुसार, एलन मस्क का नाम निवेशकों के बीच हमेशा उत्साह पैदा करता है। उनके मुताबिक इस बार बड़ी संख्या में लोगों को लगा कि वे एक ऐसी कंपनी में निवेश कर रहे हैं, जिसका भविष्य एआई से जुड़ा हुआ है। लेकिन जैसे-जैसे कंपनी के वास्तविक कारोबार और आय के स्रोत स्पष्ट हुए, शेयरों की कीमत में स्वाभाविक सुधार देखने को मिला।
कुछ विश्लेषकों ने तो स्पेसएक्स के शुरुआती कारोबार की तुलना उन तथाकथित “मीम स्टॉक्स” से भी की, जिनकी कीमतें मूलभूत कारोबारी प्रदर्शन से ज्यादा सोशल मीडिया के उत्साह के आधार पर बढ़ जाती हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन चर्चाओं और निवेशकों की भावनाओं ने शुरुआती दिनों में शेयर को वास्तविक मूल्य से कहीं अधिक ऊपर पहुंचा दिया था।
वित्तीय आंकड़े भी यही संकेत देते हैं कि कंपनी के सामने अभी कई चुनौतियां मौजूद हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में स्पेसएक्स ने करीब 18 अरब डॉलर यानी लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया था। इसके बावजूद कंपनी अब भी लाभ में नहीं पहुंच सकी है और उसे कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर भारी निवेश करना पड़ रहा है। ऐसे में निवेशकों की उम्मीदों और वास्तविक वित्तीय स्थिति के बीच अंतर धीरे-धीरे साफ होता गया।
इसी दौरान एलन मस्क ने एक और बड़ा कदम उठाकर बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। 16 जून को, जब स्पेसएक्स का शेयर रिकॉर्ड ऊंचाई पर कारोबार कर रहा था, कंपनी ने एआई आधारित कोडिंग प्लेटफॉर्म कर्सर को लगभग 60 अरब डॉलर यानी करीब 5.7 लाख करोड़ रुपये के मूल्यांकन पर खरीदने की घोषणा की। इस अधिग्रहण की सबसे खास बात यह रही कि कंपनी ने नकद भुगतान करने के बजाय अपने ही शेयरों के जरिए सौदा पूरा किया।
चूंकि उस समय स्पेसएक्स के शेयर बेहद ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहे थे, इसलिए कंपनी को बड़ी मात्रा में नकद खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ी। ऊंचे वैल्यूएशन वाले शेयरों का इस्तेमाल करके इतनी बड़ी कंपनी का अधिग्रहण करना बाजार की नजर में बेहद रणनीतिक कदम माना गया। कई विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी के दौर में अपने शेयरों का उपयोग करके बड़ी खरीद करना किसी भी कंपनी के लिए पूंजी प्रबंधन का प्रभावी तरीका हो सकता है।
मार्केट विश्लेषक सैमुअल कर का मानना है कि इस सौदे ने यह दिखाया कि एलन मस्क बाजार की परिस्थितियों का इस्तेमाल अपने पक्ष में करने की क्षमता रखते हैं। उनके अनुसार जब किसी कंपनी के शेयर बहुत ऊंचे मूल्य पर ट्रेड कर रहे हों, तब उन्हीं शेयरों के जरिए अधिग्रहण करना नकदी बचाने का प्रभावी तरीका बन जाता है। यही कारण है कि इस डील को हाल के वर्षों के सबसे दिलचस्प कॉरपोरेट सौदों में गिना जा रहा है।
फिलहाल स्पेसएक्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती निवेशकों का भरोसा लंबे समय तक बनाए रखने की है। कंपनी को यह साबित करना होगा कि वह केवल चर्चाओं और उम्मीदों के सहारे नहीं, बल्कि मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और टिकाऊ मुनाफे के दम पर आगे बढ़ सकती है। आने वाले महीनों में रॉकेट लॉन्चिंग, स्टारलिंक का विस्तार और एआई कारोबार की प्रगति तय करेगी कि स्पेसएक्स दोबारा उसी रफ्तार से आगे बढ़ पाती है या नहीं। फिलहाल बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शुरुआती उत्साह के बाद कंपनी अपने कारोबार को किस तरह नई ऊंचाइयों तक पहुंचाती है।