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The Scoopp

 

नेपाल में बर्फ का कहर, 4 की जान गई; 12 अब भी लापता, 24 घंटे बाद पहुंची पूरी रेस्क्यू टीम

नेपाल के मनांग जिले में स्थित हिमलुंग हिमाल पर हुए हिमस्खलन ने पर्वतारोहण की तैयारियों में जुटे एक दल को भारी नुकसान पहुंचाया है। रविवार को 7,126 मीटर ऊंची इस पर्वत चोटी के बेस कैंप के पास अचानक बर्फ का बड़ा हिस्सा नीचे आ गिरा। जिस समय यह घटना हुई, उस वक्त गाइड और सपोर्ट स्टाफ के कई सदस्य एक टेंट के भीतर आराम कर रहे थे। देखते ही देखते पूरा टेंट बर्फ के मलबे के नीचे दब गया।

हादसे के बाद से इलाके में बचाव अभियान जारी है। अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 12 अन्य लोग अभी लापता बताए जा रहे हैं। दुर्गम इलाका और खराब मौसम राहत एवं बचाव कार्य के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। शुरुआती प्रयासों में स्थानीय स्तर पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने दो शव बरामद किए थे। इसके बाद मौसम की स्थिति बिगड़ने और हेलिकॉप्टर उड़ान में परेशानी आने के कारण बचाव दल के बाकी सदस्यों को घटनास्थल तक पहुंचने में समय लगा।

सोमवार सुबह मौसम में कुछ सुधार के बाद हेलिकॉप्टर की मदद से अतिरिक्त बचावकर्मियों को बेस कैंप तक पहुंचाया गया। इसके साथ ही अभियान को आगे बढ़ाने की कोशिश तेज हुई। अधिकारियों और बचाव दल की प्राथमिकता बर्फ में दबे लोगों की तलाश करना और लापता पर्वतारोहियों तथा कर्मचारियों के बारे में जानकारी जुटाना है।

पर्वतारोहण सीजन से पहले चल रही थी तैयारियां

हिमलुंग हिमाल पर मौजूद लोग किसी सामान्य पर्यटक दल का हिस्सा नहीं थे। वे आने वाले पर्वतारोहण सीजन की तैयारियों के लिए वहां पहुंचे थे। ऊंचाई वाले इलाकों में मुख्य चढ़ाई शुरू होने से पहले गाइड और सपोर्ट स्टाफ कई तरह की व्यवस्थाएं पूरी करते हैं। इसी काम के लिए एक समूह बेस कैंप क्षेत्र में मौजूद था।

बताया गया है कि जिस टेंट को हिमस्खलन ने अपनी चपेट में लिया, उसमें कुल 22 लोग थे। इनमें 9 पर्वतारोही शामिल थे, जबकि 13 लोग सपोर्ट स्टाफ के तौर पर काम कर रहे थे। इन कर्मचारियों की जिम्मेदारियों में चढ़ाई के रास्ते को तैयार करना, जरूरी जगहों पर रस्सियां लगाना और बेस कैंप की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना शामिल था।

पर्वतीय इलाकों में मुख्य अभियान शुरू होने से पहले इस तरह की तैयारियां बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। ऊंचाई पर मौसम तेजी से बदल सकता है और बर्फ की स्थिति भी लगातार बदलती रहती है। ऐसे में रास्ते की जांच, फिक्स्ड रोप लगाने और कैंप तैयार करने जैसे काम पहले से किए जाते हैं।

लेकिन रविवार को अचानक हुए हिमस्खलन ने पूरी स्थिति बदल दी। बर्फ की चपेट में आने के बाद कई लोग लापता हो गए। रेस्क्यू टीम ने तत्काल तलाश शुरू की, लेकिन मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों ने अभियान की रफ्तार प्रभावित की।

24 घंटे तक मुश्किल में फंसा रहा बचाव अभियान

हिमलुंग हिमाल का इलाका बेहद ऊंचाई पर और दूरदराज क्षेत्र में आता है। इसलिए यहां किसी दुर्घटना के बाद राहत दल को पहुंचाना मैदानी इलाकों की तुलना में कहीं अधिक कठिन होता है। हादसे के तुरंत बाद कुछ बचावकर्मी मौके तक पहुंचने में सफल रहे और उन्होंने बर्फ के नीचे फंसे लोगों की तलाश शुरू की।

शुरुआती कार्रवाई में दो शव निकाले गए। इसके बाद खराब मौसम के कारण हेलिकॉप्टर संचालन प्रभावित हुआ। नतीजतन बचाव अभियान में शामिल पूरी टीम एक साथ बेस कैंप तक नहीं पहुंच सकी।

सोमवार सुबह हेलिकॉप्टर से अतिरिक्त बचावकर्मियों को वहां ले जाया गया। इससे तलाशी अभियान को आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा लोगों और संसाधनों की मदद मिली। हालांकि ऊंचाई, बर्फ और मौसम की चुनौती अब भी बनी हुई है।

अभियान में सबसे बड़ी चिंता उन 12 लोगों को लेकर है, जिनका अभी पता नहीं चल पाया है। बचावकर्मी बर्फ के नीचे दबे संभावित स्थानों की जांच कर रहे हैं। ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र में किसी व्यक्ति तक पहुंचने में लगने वाला समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, इसलिए रेस्क्यू टीम लगातार तलाश में जुटी है।

7,126 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है हिमलुंग हिमाल

हिमलुंग हिमाल नेपाल के मनांग जिले में स्थित प्रमुख पर्वत चोटियों में से एक है। इसकी ऊंचाई करीब 7,126 मीटर है। यह क्षेत्र तिब्बत की सीमा के नजदीक पड़ता है और भौगोलिक रूप से काफी दुर्गम माना जाता है।

हिमलुंग तक पहुंचने के लिए पर्वतारोहियों को कठिन पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। ऊंचाई बढ़ने के साथ हवा में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जाती है। यही वजह है कि यहां आने वाले पर्वतारोहियों के लिए केवल शिखर तक पहुंचना ही चुनौती नहीं होता, बल्कि शरीर को इस तरह के वातावरण के अनुकूल बनाना भी जरूरी होता है।

इसी कारण हिमलुंग का इस्तेमाल कई पर्वतारोही ऊंचाई वाले पर्वत अभियानों की तैयारी के लिए करते हैं। खासतौर पर वे लोग जो एवरेस्ट और मनास्लू जैसी 8,000 मीटर से ज्यादा ऊंची चोटियों पर जाने की तैयारी कर रहे होते हैं, उनके लिए इस तरह के पर्वतों पर प्रशिक्षण उपयोगी माना जाता है।

कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में लंबे समय तक काम करने और बर्फीले इलाके में आगे बढ़ने का अनुभव पर्वतारोहियों को ऊंची चोटियों के लिए तैयार करने में मदद करता है।

बर्फीली ढलानों पर तकनीकी चढ़ाई का अभ्यास

हिमलुंग पर चढ़ाई को कुछ अन्य बेहद ऊंची पर्वत चोटियों की तुलना में अपेक्षाकृत कम कठिन माना जाता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि यहां जोखिम नहीं होता। ऊंचाई, बर्फ, मौसम और खड़ी ढलानें पर्वतारोहियों के सामने लगातार चुनौती पेश करती हैं।

इस पर्वत पर चढ़ाई के दौरान पर्वतारोही कई तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। फिक्स्ड रोप के सहारे खड़ी बर्फीली ढलानों को पार किया जाता है। जुमार की मदद से पर्वतारोही रस्सी पर ऊपर की ओर बढ़ सकते हैं, जबकि क्रैम्पॉन बर्फ पर पकड़ बनाने में मदद करते हैं।

ऐसी परिस्थितियां पर्वतारोहियों को यह समझने का मौका देती हैं कि अधिक ऊंचाई और कठिन बर्फीले रास्तों पर किस तरह आगे बढ़ना है। बड़े अभियानों से पहले तकनीकी कौशल का अभ्यास करना पर्वतारोहण की तैयारियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

हिमलुंग पर आने वाले कई पर्वतारोही इसलिए भी यहां प्रशिक्षण लेते हैं क्योंकि उन्हें ऊंचाई वाले वातावरण में अपने शरीर की प्रतिक्रिया को समझने का अवसर मिलता है। कम ऑक्सीजन में चलना, आराम करना और काम करना सामान्य परिस्थितियों से काफी अलग होता है।

बेस कैंप करीब 4,900 मीटर की ऊंचाई पर

हिमलुंग हिमाल का बेस कैंप समुद्र तल से लगभग 4,900 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जाता है। इतनी ऊंचाई पर पहुंचने के बाद पर्वतारोहियों को वातावरण के अनुकूल होने के लिए समय देना पड़ता है।

बेस कैंप से ऊपर शिखर की ओर बढ़ते हुए आम तौर पर तीन प्रमुख कैंप बनाए जाते हैं। इन कैंपों का इस्तेमाल पर्वतारोहियों को अलग-अलग ऊंचाई पर रुकने, आराम करने और अगले चरण की तैयारी करने के लिए किया जाता है।

पहला कैंप करीब 5,450 मीटर की ऊंचाई पर होता है। इसके बाद पर्वतारोही लगभग 6,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित दूसरे कैंप तक पहुंचते हैं। तीसरा कैंप करीब 6,350 मीटर पर बनाया जाता है।

कैंप 3 के बाद शिखर की दिशा में अंतिम चरण की चढ़ाई शुरू होती है। इस हिस्से में ऊंचाई काफी ज्यादा होती है और ऑक्सीजन की कमी का असर भी अधिक महसूस किया जा सकता है। इसलिए पर्वतारोही अपनी गति, आराम और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ते हैं।

ऊंची चोटियों की तैयारी का अहम हिस्सा

हिमलुंग जैसे पर्वत केवल चढ़ाई के लिए ही नहीं, बल्कि पर्वतारोहण प्रशिक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यहां पर्वतारोही ऊंचाई के साथ तालमेल बैठाने के अलावा बर्फीली ढलानों, रस्सियों और पर्वतीय उपकरणों के इस्तेमाल का अनुभव हासिल करते हैं।

इसी वजह से पर्वतारोहण सीजन शुरू होने से पहले गाइड और सपोर्ट टीमों का बेस कैंप पहुंचना जरूरी होता है। रास्ते की सुरक्षा, कैंप की स्थापना और फिक्स्ड रोप जैसी व्यवस्थाएं अभियान के दौरान पर्वतारोहियों की आवाजाही को आसान बनाने में मदद करती हैं।

लेकिन रविवार का हिमस्खलन इसी तैयारी के दौरान हुआ। घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम और बर्फ की स्थिति कितनी तेजी से बदल सकती है।

फिलहाल बचाव अभियान का केंद्र उन 12 लापता लोगों की तलाश है। चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और शुरुआती चरण में दो शव बरामद किए गए थे। अतिरिक्त रेस्क्यू टीम के बेस कैंप पहुंचने के बाद तलाश अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। दुर्गम इलाके और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच बचावकर्मी बर्फ में दबे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।