दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को यमुना किनारे स्थित बेला एस्टेट की झुग्गी बस्ती का दौरा किया और वहां रहने वाले लोगों के मतदाता सूची से नाम गायब होने का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी के मुताबिक, इलाके में रहने वाले 728 लोगों में से SIR के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में केवल एक व्यक्ति का नाम दिखाई दे रहा है, जबकि 727 नाम सूची में नहीं हैं।
राहुल गांधी ने मौके पर स्थानीय लोगों से बातचीत की और इसके बाद संबंधित SDM से फोन पर बात की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति के पास स्थायी मकान नहीं है या उसका घर पहले ही टूट चुका है, तो क्या केवल इस आधार पर उसका मतदान का अधिकार प्रभावित हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि बेला एस्टेट के कई लोग लंबे समय से वहीं रह रहे हैं और पिछले चुनावों में मतदान कर चुके हैं।
बेला एस्टेट का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली की SIR प्रक्रिया के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में लाखों नाम शामिल नहीं किए गए हैं। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट रोल में 97 लाख से अधिक मतदाता दर्ज हैं, जबकि पिछली सूची की तुलना में करीब 47.5 लाख नाम कम दिखाई दिए। इसके अलावा 33 लाख से ज्यादा मामलों में मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलना अपने आप नाम कट जाने के बराबर नहीं है और संबंधित व्यक्ति को अपनी पात्रता साबित करने का अवसर दिया जा रहा है।
2024 और 2025 में वोट डालने वालों के नाम पर सवाल
राहुल गांधी ने बेला एस्टेट के लोगों से बातचीत के दौरान कहा कि यहां रहने वाले कई परिवार दशकों से इस इलाके में रह रहे हैं। उनके मुताबिक, इन लोगों ने 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी मतदान किया था। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2023 में यहां मौजूद झुग्गियों को तोड़ा गया था, लेकिन इसके बाद भी स्थानीय लोग इलाके से कहीं और नहीं गए और वहीं रह रहे हैं।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में कहा कि मकान का होना या न होना किसी व्यक्ति के वोट देने के अधिकार का आधार नहीं होना चाहिए। उन्होंने बातचीत के दौरान बेघर लोगों के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘हाउस नंबर 0’ के प्रावधान का भी उल्लेख किया और सवाल किया कि अगर ऐसी व्यवस्था मौजूद है तो बेला एस्टेट के इतने लोगों के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर क्यों हैं। यह बात राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार के कथित पूर्व बयान के संदर्भ में उठाई।
SDM से फोन पर बातचीत का वीडियो भी सामने आया
राहुल गांधी ने स्थानीय लोगों के बीच बैठकर ही SDM को फोन लगाया। बातचीत के दौरान उन्होंने अधिकारी से बेला एस्टेट के मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होने की वजह जानने की कोशिश की। वीडियो में राहुल अधिकारी से उनका नाम और पद बताने के लिए भी कहते नजर आए।
रिपोर्टों के मुताबिक, इसी बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने अधिकारी से कहा कि वह उनका नाम बताए और बाद में उन्हें “दूसरे तरीके से” देखेंगे। यह बातचीत राहुल गांधी द्वारा सोशल मीडिया पर जारी किए गए वीडियो का हिस्सा है।
हालांकि, इस पूरे मामले में यह ध्यान रखना जरूरी है कि बेला एस्टेट के 727 नामों को लेकर सामने आया आंकड़ा राहुल गांधी का दावा है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर SIR से जुड़ी ASDD सूची उपलब्ध है, जिसमें ऐसे मतदाताओं का रिकॉर्ड रखा गया है जिनके नाम ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं हैं। इसमें Absentee, Shifted, Duplicate और Deceased जैसी श्रेणियां शामिल हैं।
दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में करीब 47.5 लाख नाम कम
दिल्ली में SIR के दौरान मतदाता सूची का व्यापक सत्यापन किया गया है। 31 अगस्त को ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल प्रकाशित किया गया। इसके बाद यह सामने आया कि पहले की मतदाता सूची के मुकाबले ड्राफ्ट सूची में लगभग 47.5 लाख नाम कम हैं। इनमें ऐसे नाम भी शामिल हैं जिन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में रखा गया है।
इसके साथ ही बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं जिनके रिकॉर्ड में विसंगतियां या सत्यापन से जुड़ी समस्याएं सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 33.1 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि नोटिस जारी होने का मतलब अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हट जाना नहीं है। संबंधित व्यक्ति को जवाब देने और दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर दिया जाता है।
अब BLO घर जाकर जुटाएंगे दस्तावेज
SIR प्रक्रिया में जिन मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं, उनके लिए प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अब बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO घर जाकर दस्तावेज जुटाने की व्यवस्था कर रहे हैं। इससे ऐसे लोगों को चुनाव कार्यालय जाकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत कम होगी। एकत्र किए गए दस्तावेजों को संबंधित चुनावी रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा।
दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख भी बढ़ाई गई है। चुनाव आयोग ने समयसीमा एक महीने आगे करते हुए अब 30 अक्टूबर 2026 तक दावे और आपत्तियां दाखिल करने का मौका दिया है। इन मामलों के निपटारे की अंतिम तारीख 30 नवंबर रखी गई है। इसके बाद दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।
नाम छूट गया है तो दोबारा जुड़वाने का रास्ता मौजूद
चुनाव आयोग के मुताबिक, यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। दिल्ली के CEO की वेबसाइट पर Form-6 के जरिए नए मतदाता के रूप में नाम जोड़ने की सुविधा उपलब्ध है। मतदाता अपने नाम की स्थिति ऑनलाइन भी जांच सकते हैं।
यह प्रक्रिया केवल पुराने मतदाताओं तक सीमित नहीं है। पहली बार वोट डालने की उम्र में पहुंचे युवा भी मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। चुनाव आयोग ने भी पात्र मतदाताओं को सूची में अपना नाम जांचने और जरूरत पड़ने पर निर्धारित फॉर्म के माध्यम से आवेदन करने की सुविधा दी है।
देश के दूसरे हिस्सों में भी SIR का विस्तार
मतदाता सूची का यह विशेष पुनरीक्षण केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। चुनाव आयोग ने अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए SIR की अलग समय-सारणी जारी की है। आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर SIR-2026 से संबंधित ड्राफ्ट रोल, पुराने SIR रिकॉर्ड और मतदाता सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
आयोग की प्रक्रिया के तहत कई राज्यों में पुराने मतदाता रिकॉर्ड से मौजूदा जानकारी का मिलान किया जा रहा है। जहां रिकॉर्ड में अंतर या आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं होती, वहां संबंधित मतदाता से दस्तावेज या स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर पुराने SIR रिकॉर्ड में नाम खोजने की सुविधा भी दी गई है, ताकि मतदाता अपने पुराने विवरण की जांच कर सकें।
SIR को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज
दिल्ली में बेला एस्टेट का मामला सामने आने के बाद SIR को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। राहुल गांधी ने इस घटना को आधार बनाकर चुनावी सूची में नामों के सत्यापन और हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव अधिकारियों का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना है और किसी पात्र मतदाता का नाम उचित प्रक्रिया के बिना हटाया नहीं जाना चाहिए। दिल्ली के CEO ने स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी होने के बाद संबंधित मतदाता को अपनी पात्रता बताने और दस्तावेज देने का अवसर मिलता है।
अब बेला एस्टेट के 727 नामों का मामला दावे और दस्तावेजी सत्यापन की प्रक्रिया में कितना स्पष्ट होता है, यह आगे की कार्रवाई से सामने आएगा। फिलहाल दिल्ली के मतदाताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण तारीख 30 अक्टूबर है, जब तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं। इसके बाद प्रक्रिया पूरी होने पर 4 दिसंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है।