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1500 से ज्यादा छात्रों के वर्क परमिट पर संकट: कनाडा का मुद्दा पंजाब विधानसभा पहुंचा, केंद्र से हस्तक्षेप की मांग

कनाडा में पढ़ाई पूरी करने के बाद बेहतर करियर और स्थायी भविष्य की उम्मीद लगाए बैठे पंजाब के सैकड़ों छात्रों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ छात्रों के वर्क परमिट रद्द किए जा चुके हैं, जबकि कई ऐसे भी हैं जिन्हें पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्क परमिट नहीं मिल पा रहा है। इस पूरे मामले को लेकर पंजाब विधानसभा में भी चिंता जताई गई है।

पंजाब के एनआरआई मामलों के मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने विधानसभा के सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार कनाडा में फंसे पंजाबी छात्रों की स्थिति को गंभीरता से देख रही है। सरकार का प्रयास है कि प्रभावित युवाओं की वास्तविक समस्याओं को समझकर उनके समाधान के लिए हर संभव कदम उठाया जाए।

मंत्री के अनुसार, करीब 1500 छात्र फिलहाल वर्क परमिट से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। इन छात्रों के लिए यह केवल रोजगार का सवाल नहीं है, बल्कि उनके भविष्य, आर्थिक स्थिति और परिवारों की उम्मीदों से भी जुड़ा हुआ विषय है। पंजाब सरकार ने कहा है कि वह इस मामले को लगातार मॉनिटर कर रही है और संबंधित स्तरों पर बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश की जा रही है।

विधानसभा में उठा विदेश में पढ़ रहे छात्रों का मुद्दा

कनाडा लंबे समय से पंजाब के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा और रोजगार के प्रमुख विकल्पों में शामिल रहा है। हर साल बड़ी संख्या में छात्र वहां अलग-अलग पाठ्यक्रमों में दाखिला लेते हैं। इनमें से कई छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद काम करने के लिए पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट जैसी व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं।

ऐसे में जब पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्क परमिट से जुड़ी अड़चनें सामने आती हैं तो छात्रों के सामने कई तरह की समस्याएं खड़ी हो जाती हैं। पंजाब विधानसभा में इसी स्थिति को लेकर सरकार से सवाल उठाया गया। जवाब देते हुए एनआरआई मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने कहा कि सरकार प्रभावित छात्रों की परेशानी से पूरी तरह अवगत है।

उन्होंने सदन को बताया कि पंजाब सरकार इस मामले को महज प्रशासनिक समस्या के तौर पर नहीं देख रही, बल्कि प्रभावित छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक स्तर पर कार्रवाई करने की कोशिश कर रही है।

मंत्री ने कहा कि सरकार लगातार यह जानकारी जुटा रही है कि किन छात्रों को किस तरह की परेशानी हुई है और किन मामलों में वर्क परमिट रद्द किए गए या जारी नहीं किए गए। इससे सरकार को प्रभावित युवाओं की वास्तविक स्थिति समझने और आगे की रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।

केंद्र सरकार से बातचीत की तैयारी

पंजाब सरकार ने इस मामले में केंद्र से भी हस्तक्षेप की मांग करने का फैसला किया है। डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को पत्र लिखकर उनसे मुलाकात का समय मांगा है।

इस पत्र के जरिए पंजाब सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया है कि कनाडा में पंजाबी छात्रों से जुड़े वर्क परमिट के मामलों को कूटनीतिक स्तर पर उठाया जाए। राज्य सरकार का मानना है कि केंद्र सरकार के स्तर पर कनाडाई प्रशासन के साथ बातचीत होने से प्रभावित छात्रों के मामलों में राहत की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

मंत्री के मुताबिक, यह मामला सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं है, क्योंकि विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के भविष्य से भी इसका संबंध है। हालांकि पंजाब के छात्रों की संख्या इस मामले में उल्लेखनीय है और बड़ी संख्या में परिवारों ने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए भारी रकम खर्च की है।

डॉ. रवजोत सिंह ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र के साथ समन्वय बनाकर आगे बढ़ना चाहती है। इसके लिए विदेश मंत्रालय के साथ बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लाखों रुपये खर्च कर विदेश पहुंचे छात्र

पंजाब सरकार की चिंता का एक बड़ा कारण यह भी है कि प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों ने विदेश में पढ़ाई के लिए काफी पैसा खर्च किया है। कई परिवारों ने बच्चों की उच्च शिक्षा और भविष्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से अपनी बचत खर्च की, कर्ज लिया या अन्य आर्थिक संसाधनों का इस्तेमाल किया।

मंत्री ने विधानसभा में कहा कि ये छात्र पंजाब के अपने बच्चे हैं और बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर कनाडा गए थे। उनका कहना है कि छात्रों को दाखिले के समय यह उम्मीद थी कि निर्धारित अवधि की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे वर्क परमिट के लिए पात्र हो सकेंगे।

लेकिन पढ़ाई पूरी करने के बाद जब वर्क परमिट से संबंधित समस्याएं सामने आईं तो कई छात्रों की योजनाएं प्रभावित हो गईं। जिन युवाओं ने नौकरी, आय और आगे के इमिग्रेशन विकल्पों को ध्यान में रखते हुए अपना भविष्य तय किया था, उनके सामने अब अनिश्चितता पैदा हो गई है।

वर्क परमिट नहीं मिलने या रद्द होने की स्थिति में छात्रों के सामने नौकरी से जुड़े सवाल के अलावा रहने, खर्च उठाने और अपनी कानूनी स्थिति बनाए रखने जैसी चुनौतियां भी खड़ी हो सकती हैं।

छात्रों ने मंत्री से सीधे लगाई मदद की गुहार

एनआरआई मंत्री ने बताया कि इस समस्या से प्रभावित कई छात्रों ने उनसे सीधे संपर्क किया है। छात्रों ने अपनी परेशानियां साझा करते हुए सरकार से सहायता की मांग की है।

इन शिकायतों के बाद पंजाब सरकार ने मामले को और गंभीरता से लेना शुरू किया है। मंत्री ने कहा कि सरकार प्रभावित युवाओं की बात सुन रही है और उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ समझने की कोशिश कर रही है।

सरकार का कहना है कि छात्रों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और उनके हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध सभी विकल्पों पर विचार किया जाएगा। हालांकि विदेश में इमिग्रेशन और वर्क परमिट से संबंधित फैसले कनाडा के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, इसलिए पंजाब सरकार सीधे तौर पर वहां के नियमों में बदलाव नहीं कर सकती। ऐसे में केंद्र सरकार और कूटनीतिक माध्यमों के जरिए मामला उठाना अहम माना जा रहा है।

कानूनी लड़ाई लड़ रहे कुछ छात्र

वर्क परमिट से जुड़ी परेशानी का समाधान पाने के लिए कुछ प्रभावित छात्रों ने कनाडा की फेडरल कोर्ट का रुख भी किया है। इन छात्रों की ओर से कानूनी प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी भी विधानसभा में सामने आई।

कानूनी कार्रवाई किसी भी छात्र और उसके परिवार के लिए आर्थिक रूप से भारी पड़ सकती है। विदेश में वकील करना, कोर्ट की प्रक्रिया और अन्य कानूनी खर्च छात्रों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकते हैं। खासकर उन युवाओं के लिए मुश्किल अधिक हो सकती है जिन्होंने पहले ही अपनी पढ़ाई पर बड़ी रकम खर्च की है।

इसी वजह से पंजाब सरकार अब सामूहिक कानूनी सहायता की संभावना पर भी विचार कर रही है। डॉ. रवजोत सिंह ने कहा कि अगर आवश्यकता महसूस हुई तो योग्य वकीलों की सेवाएं उपलब्ध कराने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है।

इसका उद्देश्य प्रभावित छात्रों को कानूनी प्रक्रिया समझने और अपने मामलों को उचित तरीके से आगे बढ़ाने में सहायता देना होगा। साथ ही इससे व्यक्तिगत स्तर पर कानूनी लड़ाई का आर्थिक भार भी कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

पंजाबी मूल के कनाडाई सांसदों से भी अपील

पंजाब सरकार ने कनाडा में रहने वाले पंजाबी मूल के सांसदों से भी इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। डॉ. रवजोत सिंह ने कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक दलों के मतभेदों से ऊपर रखते हुए मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

उन्होंने पंजाबी मूल के सांसदों से आग्रह किया कि वे कनाडाई सरकार और संबंधित अधिकारियों के सामने प्रभावित छात्रों की परेशानी को मजबूती से रखें। सरकार का मानना है कि कनाडा की राजनीति और प्रशासन में प्रभाव रखने वाले पंजाबी मूल के जनप्रतिनिधि इस विषय को उचित मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मंत्री ने कहा कि छात्रों का भविष्य किसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि प्रभावित युवाओं की परिस्थितियों को समझते हुए मानवीय आधार पर समाधान खोजा जाए।

आगे क्या कदम उठा सकती है पंजाब सरकार?

फिलहाल पंजाब सरकार की प्राथमिकता प्रभावित छात्रों की संख्या, उनके मामलों की प्रकृति और वर्क परमिट से जुड़ी समस्याओं की पूरी जानकारी जुटाना है। इसके बाद केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर मामला कनाडाई अधिकारियों के समक्ष उठाने की कोशिश की जाएगी।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात के लिए भेजे गए पत्र को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि केंद्र सरकार इस विषय को कूटनीतिक स्तर पर उठाती है तो प्रभावित छात्रों को अपने मामलों के समाधान की उम्मीद बढ़ सकती है।

वहीं, जिन छात्रों ने कनाडा की फेडरल कोर्ट में कानूनी रास्ता अपनाया है, उनके लिए संभावित कानूनी सहायता पर भी पंजाब सरकार विचार कर रही है। इससे उन छात्रों को कुछ राहत मिल सकती है जो आर्थिक दबाव के बीच अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखे हुए हैं।

कुल मिलाकर, कनाडा में वर्क परमिट से जुड़ी परेशानी ने पंजाब के उन परिवारों की चिंता बढ़ा दी है जिन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य के लिए विदेश का रुख किया था। अब करीब 1500 प्रभावित छात्रों के मामले को लेकर पंजाब सरकार ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की है। आने वाले समय में विदेश मंत्रालय और कनाडाई अधिकारियों के बीच बातचीत से यह स्पष्ट होगा कि इन छात्रों को राहत दिलाने के लिए क्या रास्ता निकलता है।