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The Scoopp

 

23 दिन के संघर्ष के बाद झोटा का शव पोस्टमार्टम के लिए PGI रवाना, आधी रात को अरदास के बीच दी गई विदाई

मानसा के चर्चित परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड में इंसाफ की लड़ाई के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। करीब 24 दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शन और लगातार बातचीत के बाद आखिरकार परिवार की सहमति से झोटा का शव पोस्टमार्टम के लिए चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI) भेज दिया गया। गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात करीब 12 बजे एंबुलेंस के जरिए पार्थिव शरीर को मानसा से चंडीगढ़ रवाना किया गया। इस दौरान माहौल बेहद भावुक रहा। परिजनों और वहां मौजूद लोगों ने ‘सतनाम वाहेगुरु’ का जाप करते हुए उन्हें विदाई दी।

झोटा का शव जिस एंबुलेंस में PGI भेजा गया, उसमें गंभीर मरीजों को ले जाने के लिए जरूरी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध थीं। एंबुलेंस में आईसीयू, वेंटिलेटर और फ्रीजर जैसी व्यवस्थाएं थीं। अस्पताल की मोर्चरी से शव को बाहर निकालने के बाद पूरी प्रक्रिया के तहत उसे एंबुलेंस में रखा गया और चंडीगढ़ के लिए रवाना कर दिया गया। अब शुक्रवार को PGI में मेडिकल प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम किया जाएगा। इसके बाद शव को वापस मानसा लाया जाएगा। पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद परिवार और संबंधित लोगों की सहमति से अंतिम संस्कार की आगे की तैयारियां की जाएंगी।

इस पूरे घटनाक्रम को झोटा के परिवार और उनके समर्थन में आंदोलन कर रहे लोगों के लंबे संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है। परिवार शुरुआत से ही हत्या के मामले में न्याय की मांग कर रहा था। उनकी मांग थी कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसी मांग को लेकर मानसा में लगातार धरना और प्रदर्शन किया जा रहा था। आंदोलन में शामिल संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी सरकार पर जल्द से जल्द उचित कदम उठाने का दबाव बनाया हुआ था।

सरकार और एक्शन कमेटी के बीच बनी सहमति

परविंदर सिंह झोटा को न्याय दिलाने के लिए शुरू हुआ आंदोलन अपने 23वें दिन एक अहम मोड़ पर पहुंचा। पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों और आंदोलन का नेतृत्व कर रही एक्शन कमेटी के बीच बातचीत के बाद कई मांगों पर सहमति बनने की जानकारी सामने आई। इस समझौते में मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता और रोजगार देने का आश्वासन शामिल है। सरकार की ओर से परिवार को 2 करोड़ रुपये मुआवजा देने तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया है।

इसके अलावा दलजीत सिंह भम्मे के परिवार को भी आर्थिक सहायता और नौकरी देने पर सहमति जताई गई है। आंदोलन से जुड़े लोगों की ओर से इन आश्वासनों को संघर्ष के दौरान उठाई गई प्रमुख मांगों में शामिल बताया गया। हालांकि, परिवार और प्रदर्शनकारियों की ओर से उठाए गए सवालों का समाधान केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। वे हत्या के मामले में न्याय और जांच के नतीजों को लेकर भी गंभीरता से कार्रवाई चाहते हैं।

सरकार और एक्शन कमेटी के बीच सहमति बनने के बाद आंदोलन की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता तैयार हुआ। इसके बाद परिवार की रजामंदी से शव को पोस्टमार्टम के लिए PGI भेजने का फैसला लिया गया। इससे पहले शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने को लेकर परिवार की ओर से सहमति नहीं दी जा रही थी। परिजनों का कहना था कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक वे आगे की प्रक्रिया के लिए तैयार नहीं होंगे। इसी वजह से शव लंबे समय तक मोर्चरी में रखा रहा और मामला लगातार चर्चा में बना रहा।

24वें दिन जेल से बाहर आए लक्खा सिधाना और मोहनजीत शेरो

इस आंदोलन के 24वें दिन गुरुवार को एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ। हत्या के मामले में इरादतन हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए लक्खा सिधाना और मोहनजीत शेरो को नाभा जेल से रिहा कर दिया गया। उनकी गिरफ्तारी के बाद से ही आंदोलन में शामिल कई लोग उनकी रिहाई की मांग उठा रहे थे। दोनों की जेल से रिहाई के बाद प्रदर्शनकारियों और समर्थकों के बीच इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा रही।

लक्खा सिधाना और मोहनजीत शेरो की रिहाई तथा सरकार और एक्शन कमेटी के बीच बनी सहमति के बाद आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़े। इसी क्रम में गुरुवार देर रात परिवार ने शव को PGI भेजने की अनुमति दे दी। इसके बाद एंबुलेंस की व्यवस्था की गई और आधी रात के आसपास शव को चंडीगढ़ रवाना कर दिया गया।

इस तरह कई दिनों से रुकी हुई पोस्टमार्टम की प्रक्रिया अब आगे बढ़ने जा रही है। PGI में होने वाली मेडिकल जांच इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों को जांच के दौरान ध्यान में रखा जाएगा। इसके बाद पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई करेंगी।

13 अक्टूबर को दिनदहाड़े हुई थी परविंदर सिंह झोटा की हत्या

इस पूरे मामले की शुरुआत 13 अक्टूबर को हुई थी, जब मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने इलाके में सनसनी फैला दी थी। झोटा नशे के खिलाफ आवाज उठाने और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने के कारण पहचाने जाते थे। उनकी हत्या की खबर सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों में नाराजगी फैल गई और देखते ही देखते यह मामला पंजाब के कई हिस्सों में चर्चा का विषय बन गया।

घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार और उसकी पत्नी को गिरफ्तार किया था। पुलिस की कार्रवाई के बावजूद परिवार और झोटा के समर्थक संतुष्ट नहीं थे। उनकी ओर से मामले में निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और परिवार को न्याय दिलाने की मांग की जा रही थी।

झोटा की हत्या को लेकर लोगों में गुस्सा इसलिए भी अधिक था, क्योंकि वह नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे। उनकी मौत के बाद नशे के कारोबार और इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा का मुद्दा भी सार्वजनिक चर्चा में आया। विभिन्न सामाजिक संगठनों और आंदोलनकारियों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी।

हत्या की जांच CBI को सौंप चुकी है पंजाब सरकार

मामले की गंभीरता और लगातार बढ़ते दबाव के बीच पंजाब सरकार ने हत्या की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का फैसला किया। इससे मामले की जांच अब केंद्रीय एजेंसी के स्तर पर आगे बढ़ने का रास्ता खुला है। परिवार और आंदोलन से जुड़े लोगों की प्रमुख मांगों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना भी शामिल रहा है।

CBI जांच को लेकर अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि एजेंसी किन तथ्यों और परिस्थितियों की पड़ताल करती है तथा मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है। हत्या की वजह, घटना से जुड़े सभी पहलुओं और आरोपियों की भूमिका की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी इस जांच में महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकती है।

पोस्टमार्टम के बाद मानसा लौटेगा पार्थिव शरीर

अब सबसे पहले PGI में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद परविंदर सिंह झोटा के पार्थिव शरीर को मानसा वापस लाया जाएगा। परिवार के साथ बातचीत और तय प्रक्रिया के अनुसार उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था की जाएगी। आधी रात को धार्मिक जाप के बीच शव को रवाना किए जाने का दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद भावुक पल रहा।

एक तरफ परिवार को सरकार से आर्थिक सहायता और नौकरी का भरोसा मिला है, वहीं दूसरी तरफ हत्या की जांच और न्याय की मांग अब भी इस पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा बनी हुई है। 23 दिनों तक चले संघर्ष, धरनों और बातचीत के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने पर सहमति बनना आंदोलन में एक बड़ा घटनाक्रम है।

फिलहाल मानसा और पंजाब के अन्य हिस्सों में इस मामले को लेकर लोगों की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट, CBI की जांच और सरकार की ओर से किए गए वादों पर टिकी हुई है। परिवार के लिए यह संघर्ष केवल मुआवजे और नौकरी तक सीमित नहीं है, बल्कि परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में पूरी सच्चाई सामने आने और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाने की मांग से जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में आगे क्या दिशा बनती है।