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The Scoopp

 

सिर्फ कंपकंपी ही नहीं, इन 4 छिपे संकेतों से भी हो सकता है पार्किंसंस का खतरा

दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में पार्किंसंस रोग प्रमुख बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इसके मामलों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 2050 के बीच इस बीमारी के मरीजों की संख्या तीन गुना तक बढ़ सकती है।

हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में किए गए एक बड़े शोध में इस बीमारी से जुड़े कई अहम पहलुओं पर नई जानकारी सामने आई है। करीब 11 हजार लोगों पर आधारित इस अध्ययन में मरीजों के लक्षण, जोखिम कारक और पुरुषों व महिलाओं पर इसके प्रभाव का गहराई से विश्लेषण किया गया।

क्या है पार्किंसंस रोग?

यह एक ऐसी बीमारी है जो दिमाग के उस हिस्से को प्रभावित करती है जहां से डोपामाइन नामक केमिकल बनता है। जब इस हिस्से की कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं, तो शरीर की मूवमेंट प्रभावित होने लगती है। आमतौर पर हाथ-पैर कांपना, चलने में धीमापन, मांसपेशियों में जकड़न और संतुलन बिगड़ना इसके मुख्य लक्षण माने जाते हैं।

रिसर्च में सामने आए नए संकेत

नई स्टडी के मुताबिक, यह बीमारी सिर्फ शरीर की हरकतों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई छिपे हुए लक्षण भी इसके संकेत हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं:

  • सूंघने की क्षमता में कमी
  • याददाश्त में बदलाव
  • शरीर में लगातार दर्द
  • बार-बार चक्कर आना

इसके अलावा, बड़ी संख्या में मरीजों ने नींद से जुड़ी समस्याओं की भी शिकायत की, जो इस बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है।

पुरुष और महिलाओं में अलग असर

अध्ययन में यह भी सामने आया कि पुरुषों में पार्किंसंस होने की संभावना महिलाओं से अधिक होती है। हालांकि, महिलाओं में इसके लक्षण जल्दी शुरू हो सकते हैं और उन्हें दर्द व गिरने की समस्या अधिक होती है।
वहीं पुरुषों में याददाश्त से जुड़ी दिक्कतें और व्यवहार में बदलाव ज्यादा देखने को मिले।

जीन और लाइफस्टाइल दोनों जिम्मेदार

रिसर्च के अनुसार, करीब 25 प्रतिशत मरीजों के परिवार में इस बीमारी का इतिहास पाया गया। हालांकि, केवल 10 से 15 प्रतिशत मामलों में ही सीधे तौर पर जीन का बड़ा प्रभाव देखा गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि पारिवारिक माहौल और जीवनशैली भी इस बीमारी के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

क्यों जरूरी है सतर्क रहना?

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इन शुरुआती और कम दिखाई देने वाले लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो बीमारी को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है। इसलिए सिर्फ हाथ कांपने को ही नजरअंदाज न करें, बल्कि शरीर के अन्य संकेतों पर भी ध्यान देना बेहद जरूरी है।